System Files of MS DOS in Hindi

What are Some Important System Files of MS DOS in Hindi

MS-DOS के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Microsoft Disk Operating System (MS DOS)

Microsoft Disk Operating System (MS DOS) एक आपरेटिंग सिस्टम साप्टवेयर है इसका निर्माण बहुत सारे Files या Programs से मिलकर हुआ है जिन्हें System Files कहते है। अलग-अलग सिस्टम फाईलें सिस्टम से संबंधित अलग-अलग जरूरतो को पूरा करती है। MS DOS की कुछ महत्वपूर्ण सिस्टम फाइलें निम्नलिखित है—

System Files of MS DOS in Hindi

IO.SYS and MSDOS.SYS

इन दोनों फाईलो का कार्य कम्प्यूटर सिस्टम में Input/Output Devices और Operating System के मध्य संपर्क स्थापित करना होता है। ये दोनों Hidden Files होती है जो बूटिंग के दौरान स्वतः मेमोरी में लोड हो जाती है। इन्हें DOS Kernel भी कहा जाता है।

COMMAND.COM

यह फाईल User और Computer के मध्य संपर्क स्थापित करता है। इसमें MS DOS के विभिन्न Internal Commamds स्टोर होते है जिन्हें हम DOS Prompt पर क्रियान्वित कर सकते है। यह भी बूटिंग के दौरान स्वतः ही मेमोरी में लोड हो जाता है। इसे Command Interpreter, Console Command Processor या Shell भी कहा जाता है।

AUTOEXEC.BAT

AUTOEXEC.BAT एक Batch File है जिसमें लिखे Commands बूटिंग के दौरान स्वतः क्रियान्वित हो जाता है। इसीलिए इस File का नाम AUTOEXEC अर्थात् Auto Executable रखा गया है। इसमें DOS के लिए प्रारंभिक निर्देश DOS Commands के रूप में होते है।

CONFIG.SYS

यह एक ऐसा फाईल है जिसमें कम्प्यूटर से जुड़े विभिन्न हार्डवेयरों जैसे—Keyboard, Mouse, Printer, Memory आदि का Configuration (Setting) स्टोर रहता है। इसका उपयोग DOS और अन्य Applications के द्वारा किया जाता है। CONFIG.SYS फाईल AUTOEXEC.BAT फाईल के बाद क्रियान्वित होता है। यह कम्प्यूटर के Root Directory में स्टोर होता है।

I-Facts (Interesting facts about MS DOS System Files in Hindi)

  1. MS-DOS में बूटिंग पूरा होने पर जो स्क्रीन में दिखाई देता है उसे DOS Prompt या System Prompt कहते है। यह पहले A:\> के रूप में दिखता था किन्तु अब C:\> के रूप में दिखाई देता है।
  2. DOS में दो तरह की फाईलें होती है—Data File और Program File. डेटा फाईल डेटा या सूचनाओं का संग्रह होता है जबकि प्रोग्राम फाईल निर्देशों का संग्रह होता है।
  3. DOS में फाईल का नाम दो भागों से मिलकर बना होता है—Primary Name और Extension Name. प्रायमरी नाम 8 अक्षरों का होता है जबकि एक्सटेंशन नाम 3 अक्षरों का होता है। इन दोनों नामों के मध्य Dot ( . ) का प्रयोग किया जाता है।
  4. DOS में Folder को Directory कहा जाता है। Directory फाईलों का संग्रह होता है। इसे हार्ड डिस्क के एक Named Section के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  5. Windows आपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानने के लिए देखें—Introduction to MS-Windows
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MS DOS Booting Process notes in Hindi

Explain Booting Process of MS DOS in Hindi

कम्प्यूटर को Start एवं Restart करना Booting कहलाता है। बंद पड़े कम्प्यूटर को स्टार्ट करना Cold Booting तथा पहले से चालू कम्प्यूटर को रिस्टार्ट करना Warm Booting कहलाता है। जब हम कम्प्यूटर का पावर बटन आन करते है तो ROM Memory में स्टोर प्रोग्राम BIOS (Basic Input Output System) अपने आप Execute (Run) हो जाता है। यह प्रोग्राम सभी Devices को Check करता है जिसे POST (Power On Self Test) कहते है।

MS-DOS आपरेटिंग सिस्टम के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Microsoft Disk Operating System (MS DOS)

यदि सभी डिवाईस ठीक तरह से कार्य कर रहे होते है तो यह  MS-DOS को External Storage Device (Hard Disk) से Internal Memory Device (RAM) में लोड करता है। इस प्रक्रिया को Booting Process कहा जाता है। सफलातापूर्वक Booting हो जाने के बाद हमें DOS Command Prompt ( C:\> ) दिखायी देता है और हमारा कम्प्यूटर कार्य करने के लिए तैयार हो जाता है। MS-DOS के Booting Process को निम्नलिखित Steps से समझा जा सकता है—

  1. BIOS Initialization: इस चरण में BIOS Firmware कम्प्यूटर सिस्टम से जुड़े हार्डवेयर डिवाइसों की पहचान करता है और उन्हें प्रारंभ करता है।
  2. POST: इस चरण में BIOS आपरेटिंग सिस्टम के लोडिंग के लिए Disk की पहचान करता है तथा Boot Sector में स्थित MBR को पढ़ता है।
  3. MBR Program Data Area में स्टोर दो फाईलों IO.SYS व MSDOS.SYS को ढूँढ़कर इसे मेमोरी में लोड करता है इसके बाद कम्प्यूटर के द्वारा CONFIG.SYS फाईल को लोड किया जाता है।
  4. Booting के अंतिम चरण में COMMAND.COM नामक फाईल को मेमोरी में लोड किया जाता है जिसमें DOS के सभी Internal Commands स्टोर होते है। इसके बाद AUTOEXEC.BAT फाईल स्वतः ही Execute हो जाता है और हमारा कम्प्यूटर पूरी तरह से चालू हो जाता है।
Booting Process notes in Hindi
Fig. Booting Process

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS Booting Process in Hindi)

  1. POST – Power On Self Test, BIOS – Basic Input Output System, MBR – Master Boot Records
  2. Boot Sequence: यह उन Operations का समूह होता है जिन्हें कम्प्यूटर तब Perform करता है जब कम्प्यूटर स्टार्ट होता है।
  3. Bootstrap Loader: यह आपरेटिंग सिस्टम को स्टार्ट करने के लिए आवश्यक अन्य साफ्टवेयर को मेमोरी में लोड करता है।
  4. Master Boot Record (MBR): Hard Disk के सबसे पहले Sector में स्टोर सूचना होता है जो बताता है कि आपरेटिंग सिस्टम डिस्क में कहाँ स्थित है और इसे किस तरह मेमोरी में लोड किया जा सकता है। Master Boot Record को Master Partition Table भी कहा जाता है।
  5. Warm Reboot के लिए Keyboard Shortcut Ctrl+Alt+Del का प्रयोग किया जाता है।
  6. Cold Booting में कम्प्यूटर के हार्डवेयर पार्ट्स ठंडे होते है जबकि Warm Booting में कम्प्यूटर पहले से ही चालू होता है अतः इसके हार्डवेयर पार्ट्स गरम होते है इसीलिए इसका नाम Warm Booting है।
  7. आपरेटिंग सिस्टम क्या होता है इसके बारे में अधिक जानने के लिए देखें—OS: Operating System Software
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Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

What is MS DOS in Hindi

MS-Windows क्या होता है Windows और DOS में क्या अंतर होता है जानने के लिए देखें—Introduction to MS-Windows

Microsoft Disk Operating System (MS-DOS) एक आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है Microsoft कम्पनी के द्वारा बनाया गया है। यह CLI अर्थात् Command Line Interface पर आधारित आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है जिसमें सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है। इसे Disk Operating System इसलिए कहा जाता है क्योकिं यह कम्प्यूटर के Hard Disk को नियंत्रित करता है और अधिकतर Disk से संबंधित Input/Output का कार्य करता है। MS-DOS हमारे Hard Disk को मुख्यतः निम्नलिखित दो भागों में विभाजित करता है—System Area और Data Area.

Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

System Area वह भाग होता है जिसमें हमारे डिस्क के नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएँ होती है तथा Data Area वह भाग होता है जहाँ यूजर का डेटा स्टोर होता है। System Area आगे तीन भागों Boot Record, File Allocation Table (FAT) व Root Directory में विभाजित होता है। Boot Record Disk का सबसे पहला भाग होता है जहा DOS को चालू करने सें संबंधित जानकारी स्टोर होता है। File Allocation Table (FAT) में हार्ड डिस्क के Data Area को नियंत्रण करने से संबंधित जानकारी संग्रहीत रहता है। Root Directory कम्प्यूटर सिस्टम का सबसे प्रमुख File Directory होता है जिसे Backslash ( \ ) से सूचित किया जाता है।

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS in Hindi)

  1. Interface के आधार पर Operating System मुख्यतः दो प्रकार के होते है—CLI और GUI.
  2. CLI – Command Line Interface आपरेटिंग सिस्टम में सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है।
  3. GUI – Graphical User Interface आपरेटिंग सिस्टम में कार्य करने के लिए Graphics और Mouse का प्रयोग किया जाता है।
  4. DOS को CUI (Character User Interface) आपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है।
  5. Microsoft से पहले International Business Machines (IBM) ने Personal Computer Disk Operating System (PC-DOS) नाम से सन् 1981 में एक आपरेटिंग सिस्टम बनाया था।
  6. MS-DOS का पहले Version सन् 1981 में रिलिज किया गया था जिसका नाम MS-DOS 1.0 था। इसका अंतिम Version MS-DOS 6.22 था जिसे सन् 1994 में रिलिज किया गया था। इसके बाद से DOS को Windows के साथ Accessories में Command Prompt के नाम से जोड़ दिया गया।
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New Features of Windows 7 in Hindi

New Features of Windows 7 in Hindi

MS-Office 2007 में इसके पुराने Versions की तुलना में बहुत से परिवर्तन किए गए है और नए Features को जोड़ा गया है। यह आधुनिक जरूरतों को पुरा करने के लिए एक Best आपरेटिंग सिस्टम है। इसके महत्वपूर्ण Features निम्नलिखित है—(Windows Operating System के महत्वपूर्ण Elements को जानने के लिए देखें—Screen Elements of Windows 7)

New Features of Windows 7 in Hindi

Performance

Windows 7 एक Best Performing आपरेटिंग सिस्टम है। यह उपयोगकर्ता की समस्त जरूरतों को पूरा करता है और बहुत Fast कार्य करता है। इसे इस तरह से बनाया गया है कि यह कम क्षमता के हार्डवेयर पर भी आसानी से चल जाता है।  

Aero Shake

इसकी सहायता से हम बहुत सारे खुले हुए Window में से जिसमें कार्य करना है उसे छोड़कर बाकी सभी को Minimize कर सकते है। इसके लिए जिसमें कार्य करना है उस Window के Title Bar में माउस से क्लिक करके Shake करते है।

Aero Snap

इसकी सहायता से किसी एक Window को मानीटर स्क्रीन में आधा या पूरा Maximize व Minimize कर सकते है। आधे स्क्रीन पर Maximize करने के लिए Window के Title Bar में माउस से क्लिक करके उसे मानीटर स्क्रीन के बाए या दाए किनारे तक Drag  करते है और पूरे स्क्रीन पर करने के लिए ऊपरी किनारे तक Drag करते है।

Aero Peek

इसकी सहायता से हम वर्तमान में खुले हुए Windows को Minimize किए बिना ही कम्प्यूटर के Desktop को देख सकते है और सभी को Single Click में Minimizeभी कर सकते है। इसके लिए Taskbar के सबसे दाए स्थित Show Desktop बटन पर माउस Pointer को ले जाते है।

Gadgets

Gadget छोटे-छोटे प्रोग्राम होते है जो हमें कोई विशेष जानकारी प्रदान करते है। इन्हें हम अपने कम्प्यूटर के Desktop पर कहीं भी रख सकते है। ये दिखने में बहुत सुंदर व आकर्षक भी लगते है। Windows 7 के साथ आने वाले Gadgets है—Calendar, Clock, CPU Meter, Slide Show आदि।

New Themes

Windows 7 के लिए Aero Themes नाम से बहुत से नए Themes भी बनाए गए है। इन Themes में बहुत सारे Background Wallpapers के साथ Windows Color, Sounds, Auto Change Desktop Wallpaper आदि Features होते है। कुछ Themes के नाम है—Windows 7, Architecture, Nature आदि।

Jump List

Jump List वर्तमान में चल रहे किसी प्रोग्राम के द्वारा हाल ही में खोले गए फाईलो का List होता है। इसें हम टास्कबार में प्रोग्राम के बटन पर Right Click करके देख सकते है और किसी फाईल के नाम पर क्लिक करके उसे सीधे ही खोल सकते है।

Libraries

Windows 7 में Library की सुविधा दी गई है जिसमें अलग-अलग प्रकार के फाईलों को रखने के लिए पहले से ही Folders बने होते है जो इन फाईलों के लिए Default Save Location का कार्य करते है। हम Library के प्रयोग से अपने फाईलों को अच्छी तरह से Organize करके रख सकते है। इसके लिए इसमें Documents, Pictures, Music, Videos आदि Folder होते है।

Windows Touch

Windows 7 में Touch Screen मानीटर या डिस्प्ले को सपोर्ट करने की Functionality को भी जोड़ दिया गया है। इसकी सहायता से हम टच स्क्रीन वाले मानीटरों के साथ Windows 7 को चलाने का आनंद ले सकते है।

Home Group

Windows 7 में नेटवर्किंग को बहुत ही आसान बनाया गया है। इसमें हम किसी भी नेटवर्क को आसानी से Configure व Connect कर सकते है। साथ ही इसमें उपस्थित Home Group Feature की सहायता से अपने घर के डिवाईसों का एक अलग नेटवर्क बना सकते है।

XP Mode

इस Feature की सहयता से हम Windows 7 के अंदर ही Windows XP को चला सकते है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे हमारे वे पुराने Applications भी आसानी से चल जाते है जो Windows 7 में नहीं चल पाते।

New Taskbar Features

Windows 7 के टास्कबार में बहुत से नए Features को जोड़ा गया है। इसमें हम किसी भी प्रोग्राम को बहुत ही आसानी से Pin एवं Unpin कर सकते है। साथ ही यह एक ही तरह के खुले प्रोग्रामों और फाईलों को स्वतः ही ग्रुप कर देता है। हम टास्कबार में प्रोग्राम बटन के उपर Pointer ले जाकर एक फाईल से दूसरे फाईल में आसानी से Switch कर सकते है। उनका पूरे स्क्रीन में Preview देख सकते है, उन्हें Rearrange कर सकते है और आवश्यकता पड़ने एक फाईल या पूरे ग्रुप को एक ही बार में Close कर सकते है। 

I-Facts (Interesting facts about features of Windows Operating System)

  1. Windows आपरेटिंग सिस्टम के कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर प्रयोग में लाए जाने वाले Keyboard Shortcuts निम्नलिखित है—
  2. Windows (Opens start menu and you can search file/folders/programs)
  3. Windows + D (Goto the desktop of computer)
  4. Windows + Tab (Switch between opened applications)
  5. Windows + L (Locks computer)
  6. Windows + R (Opens Run)
  7. Windows + M (Minimize all applications)
  8. Alt + F4 (Close application)
  9. Alt + F4 + Enter (Shut down computer)
  10. Alt + Tab (Switch between opened applications)
  11. Ctrl + Shift + Esc (Open task manager)
  12. Prtsc (Take screenshot)
  13. Tab (Goto different sections of active window)
  14. Windows Booting Process को जानने के लिए देखें—Booting Process in Windows 7
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Booting Process in MS-Windows 7 in Hindi

Booting Process in MS-Windows 7 in Hindi

कम्प्यूटर को Start एवं Restart करना Booting कहलाता है। बंद पड़े कम्प्यूटर को स्टार्ट करना Cold Booting तथा पहले से चालू कम्प्यूटर को रिस्टार्ट करना Warm Booting कहलाता है। जब हम कम्प्यूटर का पावर बटन आन करते है तो ROM Memory में स्टोर प्रोग्राम BIOS (Basic Input Output System) अपने आप Execute (Run) हो जाता है। यह प्रोग्राम सभी Devices को Check करता है जिसे POST (Power On Self Test) कहते है।

Window 7 आपरेटिंग सिस्टम के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट देखें—Introduction to MS-Windows 7

यदि सभी डिवाईस ठीक तरह से कार्य कर रहे होते है तो यह  MS-Windows 7 को External Storage Device (Hard Disk) से Internal Memory Device (RAM) में लोड करता है। इस प्रक्रिया को Booting Process कहा जाता है। सफलातापूर्वक Booting हो जाने के बाद Windows 7 एक Welcome मैसेज देता है और हमारा कम्प्यूटर कार्य करने के लिए तैयार हो जाता है। Windows 7 के Booting Process को निम्नलिखित Steps से समझा जा सकता है—

  1. BIOS Initialization: इस चरण में BIOS Firmware कम्प्यूटर सिस्टम से जुड़े हार्डवेयर डिवाइसों की पहचान करता है और उन्हें प्रारंभ करता है।
  2. POST: इस चरण में BIOS आपरेटिंग सिस्टम के लोडिंग के लिए Disk की पहचान करता है तथा MBR को पढ़ता है। इसके बाद Bootmgr.exe को क्रियान्वित करता है जो Winload.exe को खोजने और इसे क्रियान्वित करने का कार्य करता है।
  3. OS Loader: इस चरण में Winload.exe जरूरी System Drivers को लोड करता है और Kernel को क्रियान्वित करता है।
  4. OS Initialization: इस चरण में Windows का Desktop हमारे लिए तैयार हो जाता है और Windows 7 पूरी तरह प्रारंभ हो जाता है।  
Booting Process in MS-Windows 7 in Hindi
Fig. Booting Process

I-Facts (Interesting facts about Windows Booting Process)

  1. Boot Sequence: यह उन Operations का समूह होता है जिन्हें कम्प्यूटर तब Perform करता है जब कम्प्यूटर स्टार्ट होता है।
  2. Bootstrap Loader: यह आपरेटिंग सिस्टम को स्टार्ट करने के लिए आवश्यक अन्य साफ्टवेयर को मेमोरी में लोड करता है।
  3. Warm Reboot के लिए Keyboard Shortcut Ctrl+Alt+Del का प्रयोग किया जाता है।
  4. Master Boot Record (MBR): Hard Disk के सबसे पहले Sector में स्टोर सूचना होता है जो बताता है कि आपरेटिंग सिस्टम डिस्क में कहाँ स्थित है और इसे किस तरह मेमोरी में लोड किया जा सकता है। Master Boot Record को Master Partition Table भी कहा जाता है।
  5. Cold Booting में कम्प्यूटर के हार्डवेयर पार्ट्स ठंडे होते है जबकि Warm Booting में कम्प्यूटर पहले से ही चालू होता है अतः इसके हार्डवेयर पार्ट्स गरम होते है इसीलिए इसका नाम Warm Booting है।
  6. POST – Power On Self Test, BIOS – Basic Input Output System, MBR – Master Boot Records
  7. Windows 7 के नए Features को जानने के लिए यह पोस्ट देखें—New Features of Windows 7
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Introduction to MS-Windows 7 Notes in Hindi

Introduction to MS-Windows 7 in Hindi

MS-Windows 7 साफ्टवेयर बनाने वाली विश्व की सबसे बड़ी कम्पनी Microsoft के द्वारा बनाया गया एक Operating System Software है। इसे सन् 2009 में रिलिज किया गया था जिसे दुनिया भर में बहुत पसंद किया गया। यह एक Best आपरेटिंग साप्टवेयर है जो हार्डवेयर और साफ्टवेयर के बीच संतुलन बनाता है और हमारे कम्प्यूटर के Performance में वृद्धि करता है। यह 32 bit व 64 bit दोनों में उपलब्ध है। साथ ही अलग-अलग जरूरतों के अनुसार इसके अलग-अलग Flavors भी है जैसे—Starter, Home Basic, Home Premium, Professional, Enterprise, Ultimate. इसे चलाने के लिए बहुत ही कम क्षमता के हार्डवेयर की आवश्यकता होती है जो निम्नलिखित है—(Windows 7 के विभिन्न Features को पढ़ने के लिए देखें—New Features of Windows 7)

  1. Processor – 1 GHz 32 bit (x86) or 1 GHz 64 bit (x64)
  2. RAM – 1 GB (32 bit) or 2 GB (64 bit)
  3. Hard Disk – 16 GB (32 bit) or 20 GB (64 bit)
  4. Graphics Card – DX9 Graphics Device 128 MB with WDDM 1.0 Driver
Windows 7 Logo
Fig. Windows 7 Logo

I-Facts (Interesting facts about MS-Windows 7)

  1. Object: Windows में किसी भी File, Folder, Program आदि को Object कहा जाता है।
  2. Icons: Windows में किसी भी File, Folder, Program, Option या tool को दर्शाने वाले छोटे-छोटे images को icons कहा जाता है। हम इन icons पर क्लिक करके किसी File, Folder को खोलते है, किसी प्रोग्राम को चलाते है या किसी Option, Tool का प्रयोग करते है। Windows के Screen Elements के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Screen Elements of Windows 7
  3. Accessories: Windows एक Single Software न होकर बहुत सारे साफ्टवेयर का समूह होता है। Accessories उन महत्वपूर्ण साफ्टवेयर व यूटिलिट प्रोग्रामों का समूह होता है जो Windows के साथ आते है।
  4. Default: Windows में विभिन्न विकल्पों के मान पहले से ही सेट होकर आते है जिन्हें Default Values कहा जाता है। उदाहरण के लिए Windows 7 में डेस्कटॉप बैकग्राउंड के रूप में Windows 7 Theme पहले से सेट होता है।
  5. Customization: Default  Settings को अपनी जरूरत के अनुरूप परिवर्तित करना Customization कहलाता है।
  6. Optimization: सिस्टम को ऐसे सेट करना जिससे कि इसके विभिन्न संसाधनों का आवश्यक कार्य के लिए बेहतर से बेहतर उपयोग हो सके Optimization कहलाता है।
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History and Versions of Windows in Hindi

Introduction to History and Important Versions of Windows in Hindi

Microsoft ने सन् 1981 में एक प्रोजेक्ट पर कार्य करना प्रारंभ किया जिसका नाम Interface Manager रखा गया। इसके बाद सन् 1983 में इसकी घोषणा की और बताया कि कम्पनी जल्द ही GUI आपरेटिंग सिस्टम बाजार में लायेगी और सन् 1985 में Windows 1.0 को रिलिज किया जो Windows का सबसे पहला Version था। अपनी शुरूआत से ही Windows कम्प्यूटर उपयोगकर्ताओं के बीच बहुत लोकप्रिय हो गया जिसका मुख्य कारण इसका User Friendly होना था। इसकी लोकप्रियता इसके नए Versions के साथ बढ़ती ही गयी और Windows दुनिया का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाले आपरेटिंग सिस्टम बन गया। Windows के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Introduction to MS-Windows. समय-समय पर रिलिज हुए इसके प्रसिद्ध Versions निम्नलिखित है—

History and Versions of Windows in Hindi
Fig. Versions of Windows

I-Facts (Interesting facts about History and Versions of Windows and GUI)

  1. GUI – Graphical User Interface का सर्वप्रथम प्रयोग Xerox Corporation नामक कंपनी के द्वारा Xerox Star नामक कम्प्यूटर में किया गया था। इस कम्प्यूटर का निर्माण करने वाली अनुसंधान समूह के अध्यक्ष माउस के अविष्कारक Douglas Engelbart थे।
  2. GUI में सभी कार्य से संबंधित Commands को Graphics के रूप में दिखाया जाता है जिन पर Mouse से क्लिक करने हम उस Command को Run कर सकते है।
  3. Windows आपरेटिंग सिस्टम के पहले Version 1.0 को Interface Manager के नाम से भी जाना जाता है।
  4. Windows के आधुनिक Versions 32 bit व 64 bit दोनों में उपलब्ध है साथ ही इन Versions के विभिन्न Flavors जैसे— Home, Professional, Enterprise, Ultimate आदि भी होते है।
  5. Windows आपरेटिंग सिस्टम में Windows Shell नामक Graphical User Interface का प्रयोग किया जाता है जिसमें Desktop, Taskbar, Start Menu आदि elements होते है। Windows की महत्वपूर्ण विशेषताएँ जानने के लिए देखें—New Features of Windows 7
  6. Windows NT कम्प्यूटर नेटवर्क में प्रयोग के लिए बनाया गया Multiuser व Timesharing आपरेटिंग सिस्टम है जिसे Network Operating System (NOS) भी कहा जाता है।
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Introduction to MS-Windows Notes in Hindi

Introduction to MS-Windows in Hindi

MS-Windows साफ्टवेयर बनाने वाली विश्व की सबसे बड़ी कम्पनी Microsoft के द्वारा बनाया गया एक Operating System Software है। इसमें सारे प्रोग्राम Run होते समय एक आयताकार खिड़की (Window) के रूप में खुलते है इसी कारण इस आपरेटिंग सिस्टम का नाम Windows रखा गया है। Windows एक GUI (Graphical User Interface) पर आधारित साफ्टवेयर है जिसमें सभी कार्य से संबंधित Commands को Graphics के रूप में दिखाया जाता है जिन पर Mouse से क्लिक करने हम उस Command को Run कर सकते है।

इससे पहले आपरेटिंग सिस्टम के रुप में DOS (Disk Operating System) का प्रयोग किया जाता था जो CLI (Command Line Interface) पर आधारित साफ्टवेयर था। इसमें कोई भी कार्य करने के लिए उससे संबंधित Command को Command Prompt पर Type करके एंटर करना होता था। इसके लिए यूजर को सभी Commands को याद रखने की जरूरत होती थी और उसे सही Spelling के साथ Type करना होता था जो एक कठिन कार्य था। DOS के मुकाबले Windows ने यूजर के लिए कम्प्यूटर पर कार्य को बहुत आसान बना दिया। इसे आसानी से कोई भी यूजर बहुत कम समय में सीख सकता है। यही कारण है कि इसे User-friendly Operating System भी कहा जाता है। Windows की महत्वपूर्ण विशेषताएं जानने के लिए देखें—New Features of Windows 7

Windows 7 Logo
Fig. Windows 7 Logo

I-Facts (Interesting facts about MS-Windows Operating System)

  1. Windows आपरेटिंग सिस्टम में सारे प्रोग्राम Run होते समय एक आयताकार खिड़की (Window) के रूप में खुलते है इसी कारण इस आपरेटिंग सिस्टम का नाम Windows रखा गया है।
  2. Windows के पहले Version को सन् 1985 में रिलिज किया गया था जिसका नाम Windows 1.0 था। Windows का इतिहास जानने के लिए देखें—History and Versions of Windows
  3. Interface के आधार पर आपरेटिंग सिस्टम मुख्यतः दो प्रकार के होते है CLI – Command Line Interface और GUI – Graphical User Interface
  4. CLI को CUI – Character User Interface भी कहा जाता है।
  5. Windows के पहले DOS चलता था जिसमें CLI का प्रयोग होता था किन्तु Windows में GUI का प्रयोग होता है।
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