System Files of MS DOS in Hindi

What are Some Important System Files of MS DOS in Hindi

MS-DOS के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Microsoft Disk Operating System (MS DOS)

Microsoft Disk Operating System (MS DOS) एक आपरेटिंग सिस्टम साप्टवेयर है इसका निर्माण बहुत सारे Files या Programs से मिलकर हुआ है जिन्हें System Files कहते है। अलग-अलग सिस्टम फाईलें सिस्टम से संबंधित अलग-अलग जरूरतो को पूरा करती है। MS DOS की कुछ महत्वपूर्ण सिस्टम फाइलें निम्नलिखित है—

System Files of MS DOS in Hindi

IO.SYS and MSDOS.SYS

इन दोनों फाईलो का कार्य कम्प्यूटर सिस्टम में Input/Output Devices और Operating System के मध्य संपर्क स्थापित करना होता है। ये दोनों Hidden Files होती है जो बूटिंग के दौरान स्वतः मेमोरी में लोड हो जाती है। इन्हें DOS Kernel भी कहा जाता है।

COMMAND.COM

यह फाईल User और Computer के मध्य संपर्क स्थापित करता है। इसमें MS DOS के विभिन्न Internal Commamds स्टोर होते है जिन्हें हम DOS Prompt पर क्रियान्वित कर सकते है। यह भी बूटिंग के दौरान स्वतः ही मेमोरी में लोड हो जाता है। इसे Command Interpreter, Console Command Processor या Shell भी कहा जाता है।

AUTOEXEC.BAT

AUTOEXEC.BAT एक Batch File है जिसमें लिखे Commands बूटिंग के दौरान स्वतः क्रियान्वित हो जाता है। इसीलिए इस File का नाम AUTOEXEC अर्थात् Auto Executable रखा गया है। इसमें DOS के लिए प्रारंभिक निर्देश DOS Commands के रूप में होते है।

CONFIG.SYS

यह एक ऐसा फाईल है जिसमें कम्प्यूटर से जुड़े विभिन्न हार्डवेयरों जैसे—Keyboard, Mouse, Printer, Memory आदि का Configuration (Setting) स्टोर रहता है। इसका उपयोग DOS और अन्य Applications के द्वारा किया जाता है। CONFIG.SYS फाईल AUTOEXEC.BAT फाईल के बाद क्रियान्वित होता है। यह कम्प्यूटर के Root Directory में स्टोर होता है।

I-Facts (Interesting facts about MS DOS System Files in Hindi)

  1. MS-DOS में बूटिंग पूरा होने पर जो स्क्रीन में दिखाई देता है उसे DOS Prompt या System Prompt कहते है। यह पहले A:\> के रूप में दिखता था किन्तु अब C:\> के रूप में दिखाई देता है।
  2. DOS में दो तरह की फाईलें होती है—Data File और Program File. डेटा फाईल डेटा या सूचनाओं का संग्रह होता है जबकि प्रोग्राम फाईल निर्देशों का संग्रह होता है।
  3. DOS में फाईल का नाम दो भागों से मिलकर बना होता है—Primary Name और Extension Name. प्रायमरी नाम 8 अक्षरों का होता है जबकि एक्सटेंशन नाम 3 अक्षरों का होता है। इन दोनों नामों के मध्य Dot ( . ) का प्रयोग किया जाता है।
  4. DOS में Folder को Directory कहा जाता है। Directory फाईलों का संग्रह होता है। इसे हार्ड डिस्क के एक Named Section के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  5. Windows आपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानने के लिए देखें—Introduction to MS-Windows
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MS DOS Booting Process notes in Hindi

Explain Booting Process of MS DOS in Hindi

कम्प्यूटर को Start एवं Restart करना Booting कहलाता है। बंद पड़े कम्प्यूटर को स्टार्ट करना Cold Booting तथा पहले से चालू कम्प्यूटर को रिस्टार्ट करना Warm Booting कहलाता है। जब हम कम्प्यूटर का पावर बटन आन करते है तो ROM Memory में स्टोर प्रोग्राम BIOS (Basic Input Output System) अपने आप Execute (Run) हो जाता है। यह प्रोग्राम सभी Devices को Check करता है जिसे POST (Power On Self Test) कहते है।

MS-DOS आपरेटिंग सिस्टम के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Microsoft Disk Operating System (MS DOS)

यदि सभी डिवाईस ठीक तरह से कार्य कर रहे होते है तो यह  MS-DOS को External Storage Device (Hard Disk) से Internal Memory Device (RAM) में लोड करता है। इस प्रक्रिया को Booting Process कहा जाता है। सफलातापूर्वक Booting हो जाने के बाद हमें DOS Command Prompt ( C:\> ) दिखायी देता है और हमारा कम्प्यूटर कार्य करने के लिए तैयार हो जाता है। MS-DOS के Booting Process को निम्नलिखित Steps से समझा जा सकता है—

  1. BIOS Initialization: इस चरण में BIOS Firmware कम्प्यूटर सिस्टम से जुड़े हार्डवेयर डिवाइसों की पहचान करता है और उन्हें प्रारंभ करता है।
  2. POST: इस चरण में BIOS आपरेटिंग सिस्टम के लोडिंग के लिए Disk की पहचान करता है तथा Boot Sector में स्थित MBR को पढ़ता है।
  3. MBR Program Data Area में स्टोर दो फाईलों IO.SYS व MSDOS.SYS को ढूँढ़कर इसे मेमोरी में लोड करता है इसके बाद कम्प्यूटर के द्वारा CONFIG.SYS फाईल को लोड किया जाता है।
  4. Booting के अंतिम चरण में COMMAND.COM नामक फाईल को मेमोरी में लोड किया जाता है जिसमें DOS के सभी Internal Commands स्टोर होते है। इसके बाद AUTOEXEC.BAT फाईल स्वतः ही Execute हो जाता है और हमारा कम्प्यूटर पूरी तरह से चालू हो जाता है।
Booting Process notes in Hindi
Fig. Booting Process

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS Booting Process in Hindi)

  1. POST – Power On Self Test, BIOS – Basic Input Output System, MBR – Master Boot Records
  2. Boot Sequence: यह उन Operations का समूह होता है जिन्हें कम्प्यूटर तब Perform करता है जब कम्प्यूटर स्टार्ट होता है।
  3. Bootstrap Loader: यह आपरेटिंग सिस्टम को स्टार्ट करने के लिए आवश्यक अन्य साफ्टवेयर को मेमोरी में लोड करता है।
  4. Master Boot Record (MBR): Hard Disk के सबसे पहले Sector में स्टोर सूचना होता है जो बताता है कि आपरेटिंग सिस्टम डिस्क में कहाँ स्थित है और इसे किस तरह मेमोरी में लोड किया जा सकता है। Master Boot Record को Master Partition Table भी कहा जाता है।
  5. Warm Reboot के लिए Keyboard Shortcut Ctrl+Alt+Del का प्रयोग किया जाता है।
  6. Cold Booting में कम्प्यूटर के हार्डवेयर पार्ट्स ठंडे होते है जबकि Warm Booting में कम्प्यूटर पहले से ही चालू होता है अतः इसके हार्डवेयर पार्ट्स गरम होते है इसीलिए इसका नाम Warm Booting है।
  7. आपरेटिंग सिस्टम क्या होता है इसके बारे में अधिक जानने के लिए देखें—OS: Operating System Software
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Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

What is MS DOS in Hindi

MS-Windows क्या होता है Windows और DOS में क्या अंतर होता है जानने के लिए देखें—Introduction to MS-Windows

Microsoft Disk Operating System (MS-DOS) एक आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है Microsoft कम्पनी के द्वारा बनाया गया है। यह CLI अर्थात् Command Line Interface पर आधारित आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है जिसमें सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है। इसे Disk Operating System इसलिए कहा जाता है क्योकिं यह कम्प्यूटर के Hard Disk को नियंत्रित करता है और अधिकतर Disk से संबंधित Input/Output का कार्य करता है। MS-DOS हमारे Hard Disk को मुख्यतः निम्नलिखित दो भागों में विभाजित करता है—System Area और Data Area.

Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

System Area वह भाग होता है जिसमें हमारे डिस्क के नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएँ होती है तथा Data Area वह भाग होता है जहाँ यूजर का डेटा स्टोर होता है। System Area आगे तीन भागों Boot Record, File Allocation Table (FAT) व Root Directory में विभाजित होता है। Boot Record Disk का सबसे पहला भाग होता है जहा DOS को चालू करने सें संबंधित जानकारी स्टोर होता है। File Allocation Table (FAT) में हार्ड डिस्क के Data Area को नियंत्रण करने से संबंधित जानकारी संग्रहीत रहता है। Root Directory कम्प्यूटर सिस्टम का सबसे प्रमुख File Directory होता है जिसे Backslash ( \ ) से सूचित किया जाता है।

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS in Hindi)

  1. Interface के आधार पर Operating System मुख्यतः दो प्रकार के होते है—CLI और GUI.
  2. CLI – Command Line Interface आपरेटिंग सिस्टम में सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है।
  3. GUI – Graphical User Interface आपरेटिंग सिस्टम में कार्य करने के लिए Graphics और Mouse का प्रयोग किया जाता है।
  4. DOS को CUI (Character User Interface) आपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है।
  5. Microsoft से पहले International Business Machines (IBM) ने Personal Computer Disk Operating System (PC-DOS) नाम से सन् 1981 में एक आपरेटिंग सिस्टम बनाया था।
  6. MS-DOS का पहले Version सन् 1981 में रिलिज किया गया था जिसका नाम MS-DOS 1.0 था। इसका अंतिम Version MS-DOS 6.22 था जिसे सन् 1994 में रिलिज किया गया था। इसके बाद से DOS को Windows के साथ Accessories में Command Prompt के नाम से जोड़ दिया गया।
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Accounting Software Tally ERP 9 notes in Hindi

What is Accounting Software Tally ERP 9 in Hindi

Accounting साफ्टवेयर ऐसा साफ्टवेयर होता है जिसकी सहायता से हम Manual किए जाने वाले अकाउंटिंग कार्य को Electronic विधि से बहुत ही आसानी से कर सकते है। सामान्यतः अकाउंटिंग का कार्य बिजनेस में होने वाले Transactions से प्रारंभ होकर विभिन्न प्रकार के रिपोर्ट बनाने तक चलता है। इस दौरान Transactions की एंट्री की जाती है तथा Trail Balance, Trading A/c, Profit & Loss A/c, Balance Sheet आदि रिपोर्ट बनाए जाते है जिससे हमें व्यापार में होने वाले लाभ-हानि का पता चलता है।

साफ्टवेयर क्या होता है इसके कितने प्रकार होते है विस्तार से जानने के लिए देखें—Software and its Types

किन्तु ये सभी कार्य Manual तरीके से करना बहुत ही कठीन होता है इसीलिए आज सभी प्रकार के बिजनेस अकाउंटिंग के लिए किसी न किसी अकाउंटिंग साफ्टवेयर का ही प्रयोग करते है। अकाउंटिंग साफ्टवेयर की मदद से अकाउंटिंग का कार्य बहुत ही आसान हो जाता है क्योंकि हमें इसमें केवल Transactions की एंट्री करनी होती है फिर बाकी सभी प्रकार के रिपोर्ट साफ्टवेयर स्वयं ही तैयार लेता है। इसका प्रयोग पूरे बिजनेस का हिसाब-किताब रखने, बिल बनाने, टैक्स व लाभ-हानि की गणना करने आदि के लिए किया जाता है। उदाहरण—Tally ERP 9

Starting Tally ERP9: Tally ERP9 को Start करने के निम्नलिखित दो प्रमुख तरीके होते है—

  1. Start -> All Programs -> Tally ERP 9
  2. Windows -> Tally -> Enter
  3. Double Click Tally ERP9 Icon on Desktop
Accounting Software Tally notes in Hindi
Fig. Tally ERP 9

I-Facts (Interesting facts about Accounting Software Tally in Hindi)

  1. Tally Accounting Software का विकास भारत की बैंगलोर स्थित कम्पनी Tally Solution Private Limited द्वारा किया गया है।
  2. Tally ERP9 टैली साफ्टवेयर का New Version है। यहाँ ERP से तात्पर्य Enterprise Resource Planningसे है। इस साफ्टवेयर का प्रयोग बड़े आकार के बिजनेस में Accounting के किया जाता है।
  3. Busy एक Business Accounting Software है जिसका विकास Busy Infotech Private Limited Delhi द्वारा किया गया है। इसका प्रयोग अधिकतर छोटे एवं मध्यम आकार के बिजनेस के लिए किया जाता है।
  4. Email Client Program क्या होता है जानने के लिए देखें—Email Client MS-Outlook
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Web Browser Software notes in Hindi

What is Web Browser Software in Hindi

Browser वे साफ्टवेयर होते है जिनकी सहायता से हम अपने कम्प्यूटर पर इंटरनेट व वेब का प्रयोग करते है। ब्राउजर के द्वारा ही हम इंटरनेट पर विभिन्न वेबसाईट एवं उनमें उपस्थित सूचना तक पहुँच पाते है। इसका प्रमुख कार्य HTML Document को पढ़ना और उसके अनुसार वेबपेज को प्रदर्शित करना होता है। प्रत्येक ब्राउजर में एक Text Field या Search Box होता है जिसमें हम उस वेबसाईट का नाम जिसे Domain Name कहते है लिखकर सर्च करते है जिसे हम खोलना चाहते है।

Email Client Software क्या होता है इसकी सहयता से ईमेल को कैसे मैनेज करते है जानने के लिए देखें—Email Client MS-Outlook

उदाहरण के लिए गूगल का वेबसाईट खोलने के लिए www.google.com लिखकर सर्च करना पड़ेगा जिससे गूगल का वेबसाईट एक ही बार में हमारे कम्प्यूटर में खुल जायेगा।  किन्तु यदि हमें वेबसाईट का पूरा नाम नहीं पता है तो उससे संबंधित Keywords लिखकर सर्च करते है जिससे लाखों-करोड़ो की संख्या में परीणाम प्राप्त होते है।

आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है जानने के लिए देखें—OS: Operating System Software

प्रत्येक ब्राउजर वेब पर सर्च करने के लिए किसी न किसी सर्च इंजन का प्रयोग करता है जैसे कि Google Chrome एक प्रसिद्ध ब्राउजर है जिसे गूगल कंपनी ने बनाया है और इसमें सर्च करने के लिए Google Search Engine का प्रयोग किया जाता है। इसी प्रकार Internet Explorer माइक्रोसाफ्ट कम्पनी के द्वारा बनाया गया एक प्रसिद्ध ब्राउजर है और इसमें सर्च करने के लिए Bing Search Engine का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा Mozilla FireFox, Safari, Opera आदि ब्राउजर भी बाजार में उपलब्ध है। इन सभी ब्राउजरों को Client प्रोग्राम भी कहा जाता है।

Starting a Browser: Web Browser Google Chrome को Start करने के निम्नलिखित तीन प्रमुख तरीके होते है—

  1. Start -> All Programs -> Google Chrome
  2. Windows -> Chrome -> Enter
  3. Double Click Google Chrome Icon on Desktop
Web Browser notes in Hindi
Fig. Google Chrome and Internet Explorer

I-Facts (Interesting facts about Web Browsers in Hindi)

  1. Search Engine का कार्य यूजर द्वारा Type किए गए Keywords के अनुसार Web से Webpages को सर्च करके निकालना होता है।
  2. Web Browser का कार्य इन Webpages को पढ़ना और इनमें उपलब्ध सूचनाओं को यूजर के समक्ष प्रस्तुत करना होता है।
  3. दुनिया के सबसे पहले Search Engine का नाम Archie था जिसे Alan Emtage से सन् 1990 में बनाया था।
  4. दुनिया के सबसे पहले Web Browser का नाम WorldWideWeb था जिसे Tim Berners Lee ने सन् 1990 में बनाया था। इसका नाम बदलकर बाद में Nexus रख दिया गया।
  5. World Wide Web (WWW) के अविष्कार का श्रेय भी Tim Berners Lee को ही जाता है इन्होनें ही दुनिया के सबसे पहले वेबसाइट info.cern.ch का निर्माण किया था।
  6. दुनिया का सबसे पहला Graphical User Interface (GUI) पर आधारित वेब ब्राउजर Mosaic था।
  7. कुछ प्रमुख Search Engines है— Google, Bing, Yahoo, Baidu, Altavista, AOL, Ask, Excite, Duckduckgo, Wolframalpha, Yandex, Lycos, Chacha, Mamma, Dogpile, Hotbot, Khoj etc.
  8. कुछ प्रमुख Web Browsers है— Chrome, FireFox, Edge, Internet Explorer, Safari, Opera, SeaMonkey, Maxthon, Vivaldi, GNU IceCat, Comodo Dragon, Comodo IceDragon, Chromium, Dooble, UC Browser, Netscape, Mosaic, Yandex etc.
  9. Accounting Software Tally ERP9 के बारे में जानने के लिए देखें—Accounting Software Tally ERP 9
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Utility Software Programs notes in Hindi

What are Utility Software Programs in Hindi

वे साफ्टवेयर जिनका प्रयोग कम्प्यूटर को Maintain करने, इसमें Errors का पता लगाकर इसे ठीक करने तथा इसकी Performance को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है यूटिलिटी साफ्टवेयर कहलाते है। इन्हें Service Programs भी कहा जाता है। बहुत सारे Common Utilities तो आपरेटिंग सिस्टम के साथ ही आते है जो निम्नलिखित है—

Utility Software Programs notes in Hindi

Linker और Loader क्या होते है किसी प्रोग्राम के विकास में इनकी क्या उपयोगिता होती है जानने के लिए देखें—Linker and Loader

Text Editor

Text Editor का प्रयोग Text File को बनाने के लिए किया जाता है। सामान्यतः ये टाईपिंग करने व प्रोग्राम के सोर्स कोड को लिखने के काम आते है। इनकी सहायता से हम किसी भी प्रोग्रामिंग भाषा जैसे—C, C++, HTML, CSS आदि के सोर्स कोड को लिख सकते है। Notepad एक प्रसिद्ध टैक्स्ट एडिटर है जो Windows आपरेटिंग सिस्टम के साथ आता है। इसके अलावा कुछ उन्नत टैक्स्ट एडिटर जैसे—Notepad++, Sublime Text आदि भी होते है जिनमें अलग-अलग प्रोग्रामिंग भाषाओं में कोडिंग करने के लिए बहुत से Features होते है।

File Manager

वे साफ्टवेयर जो कम्प्यूटर में फाईल और फोल्डर को मैनेज करने का कार्य करते है File Manager कहलाते है। इनका कार्य फाईल और फोल्डर बनाना तथा उनको Cut, Copy, Paste, Move आदि करने की सुविधा देना होता है। इनकी सहायता से हम कम्प्यूटर में उपस्थित फाईलों एवं फोल्डरों को देख सकते है तथा उन्हें Search व Sort भी कर सकते है। Windows Explorer एक फाईल मैनेजर है जो विन्डोज आपरेटिंग सिस्टम के साथ आता है।

System Monitor

System Monitor वे साफ्टवेयर है जो हमें हमारे कम्प्यूटर से जुड़े महत्वपूर्ण डिवाईसो जैसे—CPU, RAM, Hard Disk के वर्तमान Performance के बारे में जानकारी प्रदान करते है। उदाहरण के लिए ये बताते है कि CPU का कितना उपयोग हो रहा है, RAM या Disk में कितना स्पेस खाली है, नेटवर्क की स्थिति क्या है आदि। System Monitor हमें ये सभी जानकारी बिलकुल Real Time में प्रदान करते है। Resource Monitor एक सिस्टम मानिटर साफ्टवेयर है जो विन्डोज के साथ आता है।

Disk Cleaner

यह एक ऐसा साफ्टवेयर है जो हमारे कम्प्यूटर के हार्ड डिस्क से अनावश्यक फाईलो को डिलिट करता है। इससे कम्प्यूटर की गति और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इसकी सहायता से हम सभी अनावश्यक फाईलो, अस्थायी फाइलो, डाउनलोड किए गए प्रोग्रामो और रिसायकल बिन की फाईलो आदि को डिलिट कर सकते है। प्रतिमाह एक बार Disk Cleaner को रन करना कम्प्यूटर के लिए अच्छा Maintenance कार्य माना जाता है। इसके लिए हम Disk Cleanup जो कि विन्डोज के साथ आया हुआ Cleaner Utility है का प्रयोग कर सकते है।

Disk Defragmenter

यह एक ऐसा साफ्टवेयर है जो हार्ड डिस्क में अलग-अलग स्थान पर स्टोर फाईल के भागों (Fragments) को एकसाथ एक स्थान पर लाता है। इससे डिस्क स्पेस की बचत होती है और कम्प्यूटर की गति व कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इस प्रकार इसका कार्य Fragments को Defragment करना होता है इसीलिए इसे Defragmenter कहा जाता है। Disk Defragmenter एक Defragmenter Utility है जो विन्डोज के साथ आता है।

Diagnostic

ये वे साफ्टवेयर है जो हमारे कम्प्यूटर में Bugs (Errors) का पता लगाकर उसे ठीक करते है। ये हार्डवेयर व साफ्टवेयर दोनो में ही Bugs का पता लगा सकते है। इनकी सहायता से कोई  साप्टवेयर ठीक से नहीं काम कर रहा हो तो उसे ठीक किया जा सकता है। साथ ही RAM, Disk में कोई गलती है तो उसका भी पता लगाकर सुधारा जा सकता है। Windows Memory Diagnostic एक Diagnostic साफ्टवेयर है जो विन्डोज के साथ आता है।

Antivirus

Antivirus वे साफ्टवेयर है जो हमारे कम्प्यूटर को वायरस से सुरक्षा प्रदान करते है। वायरस ऐसा प्रोग्राम होता है जो हमारे कम्प्यूटर को नुकसान पहुचाता है। एन्टी वायरस हमारे कम्प्यूटर में वायरस को नहीं आने देते है और यदि सिस्टम में पहले से कोई वायरस है तो उसे खोजकर समाप्त करते है। Windows Defender विन्डोस के साथ आने वाला एन्टीवायरस है। इसके अलावा आजकल मार्केट में बहुत सारे एन्टी वायरस प्रोग्राम उपलब्ध है। उदाहरण के लिए Quick Heal, Kaspersky, Norton, Avast आदि जिनकी कीमत सामान्यतः 500 से 1000 तक की होती है।

I-Facts (Interesting facts related to Utility Programs in Hindi)

  1. Compression Utility एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो हार्ड डिस्क में स्टोर Data या Files को Compress करता है अर्थात् उन्हें छोटी आकार की Files में परिवर्तित करता है।
  2. Encryption Utility एक ऐसा प्रोग्राम है जो विशेष Algorithm का प्रयोग करते हुए Data, File, Application आदि को Encrypt करने का कार्य करता है ताकि इन्हें Unauthorized Users से बचाया जा सके।
  3. Backup Utility  एक ऐसा प्रोग्राम है जो हमारे हार्ड डिस्क में स्टोर Data या File की कापी बनाता है। इसकी सहयता से हम अपने डेटा को Disk Failure की स्थिति में होने वाले नुकसान से सुरक्षित रखते है। Backup Manual व Automatic दोनो तरीको से किया जा सकता है।
  4. Synchronization Utility एक ऐसा प्रोग्राम है जो दो Data Sources के मध्य Consistency बनाए रखता है। यह एक Data Source में हुए परिवर्तन के अनुसार दूसरे Data Source को भी अपडेट करते जाता है। यह Auto Backup का ही उदाहरण है।
  5. Debugger क्या होता है किसी साफ्टवेयर के विकास में इसकी क्या भूमिका होती है जानने के लिए देखें—Debugger: A Debugging Tool
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Debugger and Debugging Tools notes in Hindi

What is Debugger and Debugging Tools in Hindi

Debugger एक ऐसा प्रोग्राम है जो किसी अन्य कम्प्यूटर प्रोग्राम में errors का पता लगाता है और उसे ठीक करता है। प्रोग्राम बनाते समय प्रोग्रामर से गलतिया हो जाती है जिन्हें bug कहा जाता है। इन bug का पता लगाकर उसे ठीक करना debug कहलाता है। और जो प्रोग्राम debug करने का कार्य करता है वह debugger कहलाता है।  इसे debugging tool भी कहा जाता है।

Linker और Loader क्या होता है इनका प्रयोग क्यो किया जाता है जानने के लिए देखें—Linker and Loader

वैसे तो हम कोई छोटा प्रोग्राम बनाते है तो उसमें गलतियों को ढूँढ़ना बहुत आसान होता है किन्तु बड़े प्रोग्राम में यह उतना आसान नहीं होता है। इसीलिए यहाँ debugger का प्रयोग किया जाता है। Debugger प्रोग्राम की जाँच करके प्रोग्रामर को बताता है कि इसके किस लाईन में क्या गलती है। साथ ही यह प्रोग्राम के लाईनों को step-by-step भी चेक कर सकता है जिससे हमें प्रोग्राम कब और कहाँ crash होता है इसका पता चल जाता है।

सामान्यतः आजकल text editor, compiler, debugger और साफ्टवेयर बनाने के लिए अन्य जरूरी tools एकसाथ आते है जिन्हें Integrated Development Environment (IDE) साफ्टवेयर कहा जाता है। CodeBlocks, Turbo C++, MS-Visual Studio, Dev C++ आदि इसके उदाहरण है।

Debugger and Debugging Tools notes in Hindi
Fig. Debugger Menu under CodeBlocks

I-Facts (Interesting facts related to Debugger and IDE Software)

  1. Code Blocks एक Free, Open Source और Cross Platform IDE है जिसे Code Block Team ने बनाया है। यह एक से अधिक Compiler को सपोर्ट करता है। उदाहरण के लिए इसमें Clang और GCC Compilers का प्रयोग किया जाता है।
  2. Turbo C++ एक Freeware IDE है जिसे सर्वप्रथम Borland Software Corporation के द्वारा बनाया गया था। यह वर्तमान में Discontinued है किन्तु इसका प्रयोग आज भी किया जाता है।
  3. Vsual Studio माईक्रोसाफ्ट के द्वारा विकसित किया गया एक एक Freemium IDE है। यह एक बहुत ही बड़ा IDE साफ्टवेयर है जिसकी सहयता से न केवल साफ्टवेयर बनाए जा सकते है बल्कि Mobile Apps और Websites भी बनाए जा सकते है।
  4. Dev C++ एक Free IDE Software है जिसका विकास सर्वप्रथम Bloodshed Software के दवारा किया गया था। इसमें MinGW तथा GCC Compilers का प्रयोग किया जाता है।
  5. Utility Software कौन – कौन से होते है और उनके क्या क्या कार्य होते है जानने के लिए देखें—Utility Software: Service Programs
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Linker and Loader notes in Hindi

Linker and Loader notes in Hindi

Compiler क्या है यह कैसे कार्य करता है जानने के लिए देखें—Compiler: A Language Translator Program

किसी छोटे कम्प्यूटर प्रोग्राम को बनाना और कम्प्यूटर पर क्रियान्वित कर वांछित आउटपुट प्राप्त करना Multiple Steps में होने वाली प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया प्रोग्राम के Source Code के लेखन से प्रारंभ होती है। इस दौरान Source Code विभिन्न चरणों जैसे— Compilation, Linking, Loading और Execution से होकर गुजरता है। Compiler का कार्य प्रोग्राम के Source Code को बाईनरी में परिवर्तित करना होता है इसके बाद Linker और Loader की बारी आती है।

Linker एक ऐसा प्रोग्राम है जो कम्पाइलर के द्वारा बनाए गए सभी आबजेक्ट को असेम्बल करके इन्हें एक executable फाईल में परिवर्तित करता है। यह प्रोग्राम के objects व libraries दोनों को लिंक करके एक executable फाईल बनाता है। Executable फाईल ही वास्तविक साफ्टवेयर होता है जिसे कम्प्यूटर समझता है और रन करता है।

Utility Programs क्या होते है इनका प्रयोग करने की आवश्यकता क्यो होती है जानने के लिए देखें—Utility Software: Service Programs

Loader एक ऐसा प्रोग्राम है जो लिंकर के द्वारा बनाए गए executable फाईल या साफ्टवेयर को रन करने के लिए कम्प्यूटर की मेमोरी में लोड करता है। लोड करते समय यह साफ्टवेयर के निर्देशों के लिए मेमोरी एड्रेस प्रदान करता है। मेमोरी में लोड होने के बाद ही प्रोसेसर साफ्टवेयर के निर्देशों को execute कर पाता है। सामान्यतः Loader आपरेटिंग सिस्टम का ही भाग होता है।

Linker and Loader notes in Hindi
Fig. Linking and Loading Process

I-Facts (Interesting facts on Linker and Loader in Hindi)

  1. लिंकर सामान्यतः दो प्रकार का होता है—Linkage Editor और Dynamic Linker.
  2. Linkage Editor एक ऐसा लिंकर होता है जो प्रोग्राम की लोडिंग से पहले Objects व Libraries को लिंक करके Relocatable या Executable File उत्पन्न करता है जबकि Dynamic Linker इसी कार्य को प्राग्राम की लोडिंग के समय Run Time में करता है।
  3. वर्तमान में Program Loading के लिए तीन Approach Absolute Loading, Relocatable Loading और Run Time Loading का प्रयोग किया जाता है।
  4. Absolute Loading में Program को सदैव एक ही मेमोरी लोकेशन में लोड किया जाता है। Relocatable Loading में प्रोग्राम के लिए Actual Address न उत्पन्न कर Relative Address उत्पन्न करता है। Dynamic Loading में प्रोग्राम के Execution के समय Run Time में इसके लिए Absolute Address उत्पन्न किया जाता है।
  5. Debugger क्या होता है इसका प्रयोग क्यो किया जाता है जाननेे के लिए देखें—Debugger: A Debugging Tool
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Difference between Compiler and Interpreter in Hindi

What are some Important Difference between Compiler and Interpreter in Hindi

Compiler एक ऐसा प्रोग्राम हैं जो High Level Language में लिखे गए Program (Source Code) को Machine Language (Binary Code) में Translate करने का कार्य करता है। यह एक बार में ही प्रोग्राम के सभी Statements को Translate करता है और किसी प्रकार की गलती होने पर Error Message प्रदर्शित करता है।

Compiler के बारे में अधिक पढ़ने के लिए यह लेख देेखें—Compiler: A Language Translator Program

Interpreter एक प्रोग्राम हैं जो Compiler की तरह ही High Level Language में लिखे गए Program (Source Code) को Machine Language (Binary Code) में Translate करने का कार्य करता है। किन्तु यह एक बार में एक Statement को Machine Language में Translate करके सीधे रन करता है और किसी प्रकार की गलती होने पर Error Message प्रदर्शित करता है जिसे जब तक सुधारा न जाए Translation का कार्य आगे नहीं बढ़ता है।

Interpreter के बारे में अधिक पढ़ने के लिए यह लेख देेखें—Interpreter: A Language Translator Program

इस प्रकार हमने पढ़ा कि Compiler और Interpreter दोनों का प्रयोग High Level Language में लिखे गए प्रोग्राम के कोड को मशीनी भाषा में अनुवाद करने के लिए किया जाता है। किन्तु इनके कार्य करने के तरीके में बहुत अंतर होता है। साथ ही किसी भाषा के लिए Compiler तो किसी भाषा के लिए Interpreter अधिक उपयुक्त होता है। हम इन दोनों की तुलना निम्नलिखित टेबल के माध्यम से कर सकते है—

I-Facts (Interesting facts about Compilation and Interpretation Process in Hindi)

  1. Compilation Process: Source Code -> Preprocessing -> Compilation -> Linking -> Executable Code -> Loading -> Execution -> Output
  2. Interpretation Process: Source Code -> Parser -> Output
  3. Translation Process के दौरान मुख्यतः निम्नलिखित तीन प्रकार की गलतिया (Errors or Bugs) होती है— Syntax Errors, Execution Errors, Logical Errors.
  4. इसमें से Syntax Errors का पता लगाना सबसे आसान होता है जबकि Logical Errors को ढूँढ़ना सबसे कठीन होता है।
  5. Assembler के बारे में पढ़ने के लिए यह लेख देखें—Assembler: An Assembly Language Translator Program
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Assembler Program notes in Hindi

Assembler Program notes in Hindi

Compiler के बारे में जानने के लिए देखें—Compiler: A Language Translator Program

Assembler एक ऐसा प्रोग्राम है जो Assembly language में लिखे प्रोग्राम को Machine Language में Translate करता है। असेम्बली भाषा में लिखे गए सोर्स कोड को Mnemonic Code कहते है। जैसे- ADD, LDA, STA आदि इसके उदाहरण है। इस प्रकार हम असेम्बलर को एक ऐसा प्रोग्राम भी कह सकते है जो इन निमोनिक कोड को बाईनरी में परिवर्तित करता है। यह Compiler की तरह ही कार्य करता है इसके दो प्रकार के होते है—One Pass Assembler और Two Pass Assembler.

Interpreter के बारे में जानने के लिए देखें—Interpreter: A Language Translator Program

वन पास असेम्बलर एक ही पास में सभी Symbols और Lables को कलेक्ट करके उन्हें असेम्बल करता है। जबकि टू पास असेम्बलर इसी कार्य को दो पास में करता है। यह पहली पास में केवल Symbols और Lables को कलेक्ट करता है और दूसरी पास में उन्हें असेम्बल करता है। इसके अतिरिक्त वन पास असेम्बलर Mnemonics व Pseudocode को स्टोर करने के लिए केवल एक ही टेबल Machine Opcode Table (MOT) का प्रयोग करता है जबकि टू पास असेम्बलर इन दोनों को स्टोर करने के लिए क्रमशः दो टेबल Machine Opcode Table (MOT) व Pseudo Opcode Table (POT) का प्रयोग करता है।

Assembler Program notes in Hindi
Fig. Difference between One Pass and Two Pass Assembler

I-Facts (Interesting facts related to Assembler and Assembly Language in Hindi)

  1. Assembler केवल Assembly भाषा में लिखे गए प्रोग्रामों को Machine भाषा में परिवर्तित करता है।
  2. MOT – Machine Opcode Table तथा POT – Pseudo Opcode Table का संक्षिप्त रूप है।
  3. Assembly Language में लिखे गए प्रोग्राम Machine Language में लिखे गए प्रोग्रामों के बाद सबसे तीव्र गति से क्रियान्वित होने वाले प्रोग्राम होते है।
  4. C व C++ Language में लिखे गए प्रोग्राम Assembly Language के मुकाबले धीमी गति से क्रियान्वित होते है।
  5. Compiler और Interpreter की तुलना करने के लिए देखें—Compiler vs Interpreter
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