MS DOS Booting Process notes in Hindi

Explain Booting Process of MS DOS in Hindi

कम्प्यूटर को Start एवं Restart करना Booting कहलाता है। बंद पड़े कम्प्यूटर को स्टार्ट करना Cold Booting तथा पहले से चालू कम्प्यूटर को रिस्टार्ट करना Warm Booting कहलाता है। जब हम कम्प्यूटर का पावर बटन आन करते है तो ROM Memory में स्टोर प्रोग्राम BIOS (Basic Input Output System) अपने आप Execute (Run) हो जाता है। यह प्रोग्राम सभी Devices को Check करता है जिसे POST (Power On Self Test) कहते है।

MS-DOS आपरेटिंग सिस्टम के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Microsoft Disk Operating System (MS DOS)

यदि सभी डिवाईस ठीक तरह से कार्य कर रहे होते है तो यह  MS-DOS को External Storage Device (Hard Disk) से Internal Memory Device (RAM) में लोड करता है। इस प्रक्रिया को Booting Process कहा जाता है। सफलातापूर्वक Booting हो जाने के बाद हमें DOS Command Prompt ( C:\> ) दिखायी देता है और हमारा कम्प्यूटर कार्य करने के लिए तैयार हो जाता है। MS-DOS के Booting Process को निम्नलिखित Steps से समझा जा सकता है—

  1. BIOS Initialization: इस चरण में BIOS Firmware कम्प्यूटर सिस्टम से जुड़े हार्डवेयर डिवाइसों की पहचान करता है और उन्हें प्रारंभ करता है।
  2. POST: इस चरण में BIOS आपरेटिंग सिस्टम के लोडिंग के लिए Disk की पहचान करता है तथा Boot Sector में स्थित MBR को पढ़ता है।
  3. MBR Program Data Area में स्टोर दो फाईलों IO.SYS व MSDOS.SYS को ढूँढ़कर इसे मेमोरी में लोड करता है इसके बाद कम्प्यूटर के द्वारा CONFIG.SYS फाईल को लोड किया जाता है।
  4. Booting के अंतिम चरण में COMMAND.COM नामक फाईल को मेमोरी में लोड किया जाता है जिसमें DOS के सभी Internal Commands स्टोर होते है। इसके बाद AUTOEXEC.BAT फाईल स्वतः ही Execute हो जाता है और हमारा कम्प्यूटर पूरी तरह से चालू हो जाता है।
Booting Process notes in Hindi
Fig. Booting Process

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS Booting Process in Hindi)

  1. POST – Power On Self Test, BIOS – Basic Input Output System, MBR – Master Boot Records
  2. Boot Sequence: यह उन Operations का समूह होता है जिन्हें कम्प्यूटर तब Perform करता है जब कम्प्यूटर स्टार्ट होता है।
  3. Bootstrap Loader: यह आपरेटिंग सिस्टम को स्टार्ट करने के लिए आवश्यक अन्य साफ्टवेयर को मेमोरी में लोड करता है।
  4. Master Boot Record (MBR): Hard Disk के सबसे पहले Sector में स्टोर सूचना होता है जो बताता है कि आपरेटिंग सिस्टम डिस्क में कहाँ स्थित है और इसे किस तरह मेमोरी में लोड किया जा सकता है। Master Boot Record को Master Partition Table भी कहा जाता है।
  5. Warm Reboot के लिए Keyboard Shortcut Ctrl+Alt+Del का प्रयोग किया जाता है।
  6. Cold Booting में कम्प्यूटर के हार्डवेयर पार्ट्स ठंडे होते है जबकि Warm Booting में कम्प्यूटर पहले से ही चालू होता है अतः इसके हार्डवेयर पार्ट्स गरम होते है इसीलिए इसका नाम Warm Booting है।
  7. आपरेटिंग सिस्टम क्या होता है इसके बारे में अधिक जानने के लिए देखें—OS: Operating System Software
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Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

What is MS DOS in Hindi

MS-Windows क्या होता है Windows और DOS में क्या अंतर होता है जानने के लिए देखें—Introduction to MS-Windows

Microsoft Disk Operating System (MS-DOS) एक आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है Microsoft कम्पनी के द्वारा बनाया गया है। यह CLI अर्थात् Command Line Interface पर आधारित आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है जिसमें सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है। इसे Disk Operating System इसलिए कहा जाता है क्योकिं यह कम्प्यूटर के Hard Disk को नियंत्रित करता है और अधिकतर Disk से संबंधित Input/Output का कार्य करता है। MS-DOS हमारे Hard Disk को मुख्यतः निम्नलिखित दो भागों में विभाजित करता है—System Area और Data Area.

Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

System Area वह भाग होता है जिसमें हमारे डिस्क के नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएँ होती है तथा Data Area वह भाग होता है जहाँ यूजर का डेटा स्टोर होता है। System Area आगे तीन भागों Boot Record, File Allocation Table (FAT) व Root Directory में विभाजित होता है। Boot Record Disk का सबसे पहला भाग होता है जहा DOS को चालू करने सें संबंधित जानकारी स्टोर होता है। File Allocation Table (FAT) में हार्ड डिस्क के Data Area को नियंत्रण करने से संबंधित जानकारी संग्रहीत रहता है। Root Directory कम्प्यूटर सिस्टम का सबसे प्रमुख File Directory होता है जिसे Backslash ( \ ) से सूचित किया जाता है।

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS in Hindi)

  1. Interface के आधार पर Operating System मुख्यतः दो प्रकार के होते है—CLI और GUI.
  2. CLI – Command Line Interface आपरेटिंग सिस्टम में सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है।
  3. GUI – Graphical User Interface आपरेटिंग सिस्टम में कार्य करने के लिए Graphics और Mouse का प्रयोग किया जाता है।
  4. DOS को CUI (Character User Interface) आपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है।
  5. Microsoft से पहले International Business Machines (IBM) ने Personal Computer Disk Operating System (PC-DOS) नाम से सन् 1981 में एक आपरेटिंग सिस्टम बनाया था।
  6. MS-DOS का पहले Version सन् 1981 में रिलिज किया गया था जिसका नाम MS-DOS 1.0 था। इसका अंतिम Version MS-DOS 6.22 था जिसे सन् 1994 में रिलिज किया गया था। इसके बाद से DOS को Windows के साथ Accessories में Command Prompt के नाम से जोड़ दिया गया।
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Characteristics and Features of Word Processor MS-Word in Hindi

Characteristics and Features of Word Processor MS-Word in Hindi

MS-Word एक Word Processor साफ्टवेयर है। यह दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ वर्ड प्रोसेसर है। इसकी कुछ महत्वपू्र्ण विशेषताएँ निम्नलिखित है—

Characteristics and Features of Word Processor MS-Word in Hindi

Word Processor MS-Word के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Word Processor MS-Word

Typing, Printing and Saving

वर्ड प्रोसेसर हमें किसी भी टैक्स्ट डाक्यूमेंट को टाईप व प्रिंट करने की सुविधा प्रदान करता है। इसकी सहायता से हम अपने डाक्यूमेंट को भविष्य में उपयोग के लिए सेव करके भी रख सकते है।

Text Editing

इसमें टैक्स्ट एडिटिंग की सुविधा होती है अर्थात् टाईप किया गया टैक्स्ट यदि गलत हुआ तो उसे मिटाकर पुनः सही टैक्स्ट टाईप कर सकते है। साथ ही कोई डाक्यूमेंट से कोई लाईन हटाना है या नया लाईन जोड़ना है तो यह भी कर सकते है।

Text Formatting

इसमें टैक्स्ट फार्मेंटिंग की सुविधा होती है अर्थात् टैक्स्ट में विभिन्न प्रभाव जैसे—बोल्ड, इटालिक, अंडरलाईन, फांट, फांट साईज, फांट कलर, सबस्क्रिप्ट, सुपरस्क्रिप्ट, स्ट्राईकथ्रू आदि दे सकते है।

Page Formatting

वर्ड प्रोसेसर में हम पेज की फार्मेटिंग अर्थात् पेज मार्जिन, पेज साईज, पेज कलर, पेज बार्डर, पेज हेडर, पेज फूटर, पेज नंबरिंग, वाटरमार्क आदि सेट कर सकते है।

Table

हमें कई बार ऐसे डाक्यूमेंट बनाने की जरूरत पड़ती है जिसमें रो और कालम में डेटा एंट्री करना होता है। इसके लिए हम वर्ड प्रोसेसर के टेबल टूल का प्रयोग करके आसानी से टेबल बनाकर डेटा एंट्री कर सकते है।

Illustrations

यदि हमें अपने डाक्यूमेंट में पिक्चर या फोटो की लाने की जरूरत पड़ी तो हम इसे भी आसानी से पिक्चर एवं क्लीपआर्ट का प्रयोग करके ला सकते है। साथ ही किसी जानकारी को चित्र बनाकर बताना हो तो शेप और स्मार्टआर्ट का प्रयोग कर सकते है।

Spelling and Grammar

वर्ड प्रोसेसर हमारे द्वारा टाईप करके बनाए जा रहे डाक्यूमेंट में स्पेलिंग और ग्रामर की गलतियों को भी ढूँढ़ने का कार्य करता है। यदि हम ग्रामर की गलती करते है तो हरे रंग में व स्पेलिंग की गलती करते है तो लाल रंग में अंडरलाईन करता है।

References

वर्ड प्रोसेसर में हम कोई बड़ा डाक्यूमेंट जैसे—पुस्तक भी आसानी से बना सकते है। इसके लिए आवश्यक टूल जैसे—Table of Contents, Index, Footnotes, Endnotes आदि वर्ड प्रोसेसर में उपलब्ध होते है।

Mail Merge

कई बार हमें एक ही डाक्यूमेंट को बहुत सारे व्यक्तियों के लिए बनाने की जरूरत पड़ती है। इसमें डाक्यूमेंट का कन्टेन्ट तो वही रहता है किन्तु व्यक्तियों के नाम, पता, मोबाईल, ईमेल आदि परिवर्तित हो जाता है। यह कार्य मेल मर्ज की सहायता से आसानी से किया जा सकता है।

Protection

वर्ड प्रोसेसर में हम बनाए गए डाक्यूमेंट में पासवर्ड डालकर उसे सुरक्षित रख सकते है। यह उस समय बहुत उपयोगी होता है जब डाक्यूमेंट बहुत सीक्रेट हो और उसे ई-मेल करके कहीं भेजना हो।

I-Facts (Interesting facts and Features of MS-Word Word Processor)

  1. Theme: Theme वर्ड प्रोसेसर में उललब्ध एक ऐसी सुविधा है जिसकी सहायता से हम एक ही बार में अपने पूरे Document को अच्छी तरह से फार्मेट कर सकते है। इसमें Document के अलग-अलग भागों जैसे— Heading, Paragraph आदि के लिए पूर्व परिभाषित Styles होते है जो इसका चयन करने पर एक बार में ही पूरे Document में Apply हो जाते है।
  2. Thesaurus: Thesaurus का सामान्यः अर्थ शब्दकोश होता है। इसकी सहायता से हम वर्ड में Type किए गए किसी शब्द को सलेक्ट कर उसके विभिन्न Synonyms को देख सकते है। यह विकल्प Review Menu में Proofing Group के अंतर्गत आता है।
  3. Macros: Macros का प्रयोग तब किया जाता है जब किसी कार्य को बार-बार करने की जरूरत पड़ रही है। किसी कार्य को बार-बार करने के बजाय हम Macros की सहायता से उस कार्य के लिए एक Keyboard Shortcut Assign कर सकते है। इससे Keyboard Shortcut को दबाते ही वह कार्य एक बार में हो जाता है।
  4. MS – Office या Software Suite क्या है जानने के लिए देखें—Introduction to Microsoft Office
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