What is Internet notes in Hindi

Introduction to Internet in Hindi

कम्प्यूटर नेटवर्क के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Computer Networks and its Types

इंटरनेट शब्द का विस्तृत रूपInterconnected Network  होता है। यह दुनिया भर के बहुत सारे कम्प्यूटरों एवं क्म्प्यूटर नेटवर्को को जोड़कर बनाया गया कम्प्यूटरों का एक विश्वव्यापी सबसे विशाल नेटवर्क है। इसी कारण इसेनेटवर्को का नेटवर्क (Network of Networks) भी कहते है।इन्टरनेट का अविष्कार दुनिया भर के लोगो के मध्य आपसी संचार ( Communication) अर्थात् सूचनाओं एवं संदेशों के आदान-प्रदान के लिए किया गया है।

इसकी सहायता से एक व्यक्ति जिसके कम्प्यूटर पर इन्टरनेट कनेक्शन उपलब्ध है, दुनिया के किसी भी कोने में स्थित दूसरे व्यक्ति जिसके कम्प्यूटर पर भी इन्टरनेट कनेक्शन उपलब्ध है संपर्क कर सकता है और text, image, audio, video आदि के रूप में सूचनाओं एवं संदेशों का आदान-प्रदान कर सकता है। आज इन्टरनेट के माध्यम से सभी प्रकार की सूचनाओं को विश्व के किसी भी  कोने से किसी भी कोने में केवल कुछ सेकण्ड्स में ही भेजा जा सकता है। इण्टरनेट के कारण आज विश्व एक छोटे से ग्राम की भाँति बन गया है।हम घर बैठे ही पूरे विश्व की खबर रख सकते है। इसी कारण ही आज के विश्व को एक Global Village कहा जाता है तथा आज के युग को Age of Information या Age of Computers की संज्ञा दी जाती है।

What is Internet notes in Hindi

Data Communication क्या होता है इसके बारे में जानने के लिए देखें—Data Communication

WWW

WWW का पूरा नाम World Wide Web है। इसे W3या WEB भी कहा जाता है।यह इन्टरनेट का सबसे लोकप्रिय एवं सबसे बड़ा सर्विस है। इसका विकास सन् 1990 के दशक तक टीम बर्नर्स ली ने किया था। WWW   बहुत सारेवेब सर्वर्स का एक collection होता है जिसके प्रत्येक सर्वर में information load   होता है जो text, image, audio, video आदि के रूप में हो सकता है। कोई भी व्यक्ति जिसके पास इन्टरनेट कनेक्शन उपलब्ध है वह WWW से अपनी जरूरत की सूचनाओं को access करकेदेख,पढ़ तथा सुन सकता है और आवश्यकता पड़ने पर अपने कम्प्यूटर में डाउनलोड भी कर सकता है।

E-Mail

E-Mail का पूरा नाम Electronic Mail होता है। यह कम्प्यूटर के द्वारा भेजी जा सकने वाली इलेक्ट्रॉनिक डाक सेवा है। यह इक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया है जिसकी सहायता से बड़ी मात्रा में सूचनाओं को प्रकाश की गति से भेजा एवं प्राप्त किया जा सकता है। इसकी सहायता से हम text, image, audio, video आदि सभी प्रकार की सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते है। E-Mail का विकास सर्वप्रथम अमेरिकी वैज्ञानिक आर.टोमलिंसन ने 1971 में किया था। आज बहुत से ऐसे कम्पनियाँ  है जो हमें इन्टरनेट पर E-Mail सेवा प्रदान करते है इनमें से Google, Yahoo, Rediff का नाम सर्वाधिक प्रचलितहै। Google कम्पनी द्वारा प्रदान किए जाने वाले E-Mail सेवा को Gmail कहा जाता है। यह एक निःशुल्क E-Mail सेवा है जिसका उपयोग दुनिया का कोई भी व्यक्ति कर सकता है। इस सेवा का उपयोग करने के लिए हमें सबसे पहले www.gmail.comपर जाकर अपना एक एकाउंट बनाना पड़ता है। एकाउंट बनाने की प्रक्रिया में हम www.gmail.com द्वारा हमारे बारे मांगी गई आवश्यक सूचना जैसे— नाम, जन्मदिन, मोबाईल नम्बर, मेल/फीमेल आदि देते है तथा कम्पनी के terms एवं conditions को स्वीकार कर अपने एकाउंट के लिए username और password का निर्धारण करते है।एक बार सफलतापूर्वक एकाउंट बना लेने के बाद हम कभी भी www.gmail.com पर जाकरusername और password की सहायता सेGmail सेवा का उपयोग करते हुए निःशुल्कE-Mail   कर सकते है।

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Types of Internet Connection in Hindi

Notes on Various Types of Internet Connections in Hindi

अपने कम्प्यूटर पर इंटरनेट कनेक्शन प्राप्त करने के लिए हमें किसी ISP के यहाँ अपना Account खोलवाने की जरूरत पड़ती है। ISP अर्थात् Internet Service Provider वह कम्पनी होता है जो लोगों को उनके कम्प्यूटर पर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराता है। इसके लिए टेलीफोन लाईन का प्रयोग संचार माध्यम के रूप में किया जाता है। इसमें Modem को एक ओर से ISP के सर्वर से टेलीफोन लाईन के द्वारा कनेक्ट किया जाता है और दूसरी ओर से इसे हमारे कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है। विभिन्न प्रकार के Connecting Devices के बारे में जानने के लिए यह पोस्ट देखें—Connecting Devices (Networking & Internetworking). इंटरनेट कनेक्शन निम्नलिखित प्रकार के होते है—

  1. Dial-Up Connection
  2. ISDN Connection
  3. Leased Line Connection
  4. Braodband Connection

Dial Up Connection

Dial Up Connection में हमें ISP के द्वारा एक Telephone Number प्रदान किया जाता है। फिर जब भी हमें अपने कम्प्यूटर पर इंटरनेट चलाना होता है तो हम अपने कम्प्यूटर से उस Number पर Dial करते है। इससे हमारे कम्प्यूटर और ISP Server के मध्य एक Connection स्थापित हो जाता है और हम इंटरनेट का उपयोग कर पाते है। किन्तु किसी Phone Call की तरह ही यह Connection भी अस्थायी होता है और Request व Response के पूरा होते ही अपने आप समाप्त हो जाता है। यदि हमें फिर से इंटरनेट का उपयोग करना होता है तो पुनः Number पर Dial करने की जरूरत पड़ती है। Dial Up Connection में प्रयुक्त Modem की गति समान्यतः 56 Kbps की होती है। इसमें हम इंटरनेट का प्रयोग करते समय फोन पर बात नहीं कर सकते है। Data Communication के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Data Communication

ISDN Connection

ISDN का अर्थ Integrated Services Digital Network होता है। यह एक Digital Telephone सेवा होता है जिसकी सहायता से Audio, Video एवं Data को Digital Form में Transmit किया जाता है। इसमें हम एक ही Connection से Computer, Printer व Fax Machine को जोड़कर उनका प्रयोग कर सकते है। ISDN Connection में विशेष प्रकार के ISDN Adapter का प्रयोग किया जाता है जिसकी गति समान्यतः 128 Kbps की होती है। इसमें 64-64 Kbps के दो Channel होते है इसीलिए इसमें इंटरनेट का प्रयोग करते हुए फोन पर बात भी किया जा सकता है। Communication Modes के बारे में जानने के लिए देखें—Communication Modes and its Types

Leased Line Connection

Leased Line को Dedicated Line भी कहा जाता है। यह एक Private Line होता है जिसका प्रयोग केवल हमारे Data को ही लाने व ले जाने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग कम्पनीयों एवं संस्थाओं में Internet से जुड़ने, Phone Call करने, व अलग-अलग स्थानों पर लगे कम्प्यूटरों का आपस में जोड़ने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से Private Network जैसे—LAN आदि बनाए जाते है जिसमें Full Time Connectivity मिलती है। सामान्यतः Fiber Optic Cable का प्रयोग Leased Line के रूप में किया जाता है जिसमें Mbps की गति से Data व Voice का Transmission होता है। नेटवर्के टोपोलाजी के बारे में जानने के लिए देखें—Network Topologies and its Types

Broadband Connection

Broadband एक High Speed Internet Connection होता है। यह वर्तमान में सबसे प्रचलित Internet Connection है जिसका प्रयोग घर, स्कूल, कालेज, दुकान, आफिस सभी स्थानों पर किया जाता है। इसमें Data, Sound, Video, Fax आदि की सुविधा एक ही Line की सहायता से उपलब्ध करायी जाती है। इसकी गति Mbps की होती है और इसमें Full Time Connectivity प्राप्त होती है। वर्तमान में Broadband Connection भी कई प्रकार की उपलब्ध है जैसे—DSL, Fiber Optic, Cable Modem, Cable TV, Wireless, Satellite, BPL आदि। इन सबमें DSL सबसे प्रचलित Broadband Connection है। DSL का अर्थ Digital Subscriber Line होता है जो Mbps की गति वाला High Speed Braodband Connection है। DSL भी अलग-अलग स्थानों की जरूरत के अनुसार प्रकार के होते है जैसे—SDSL, ADSL, HDSL, VDSL आदि। इन सभी में इंटरनेट की Speed व Bandwidth अलग-अलग होती है। नेटवर्किंग प्रोटोकाल के बारे में जानने के लिए देखें—Protocols and TCP/IP Suite

Types of Internet Connection in Hindi
Fig. Internet Connection

I-Facts (Interesting facts about various types of Internet Connections)

  1. इंटरनेट या किसी नेटवर्क में डेटा ट्राँस्फर की गति को Bps (Bits per second) में मापा जाता है। इसे Baud भी कहा जाता है।
  2. Mbps: Mega bits per second का संक्षिप्त रूप है जो 10 लाख bits प्रति सेकण्ड डेटा ट्राँस्फर को बताता है।
  3. ADSL – Asymmetric Digital Subscriber Line का संक्षिप्त रूप है। इस प्रकार के Connection में Uploading और Downloading दोनो की गति अलग-अलग होती है।
  4. SDSL – Symmetric Digital Subscriber Line का संक्षिप्त रूप है। इस प्रकार के Connection में Uploading और Downloading दोनो की गति एक समान होती है।
  5. विभिन्न प्रकार के कम्प्यूटर नेटवर्को के बारे में जानने के लिए देखें—Computer Networks and its Types
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Connecting: Networking and Internetworking Devices notes in Hindi

Connecting: Networking and Internetworking Devices notes in Hindi

Connecting Device वे Device होते है जिनका प्रयोग दो अलग-अलग कम्प्यूटरों तथा नेटवर्कों को आपस में Connect करने के लिए किया जाता है। दो अलग-अलग कम्प्यूटरों को आपस में Connect करना Networking कहलाता है तथा दो अलग-अलग नेटवर्कों को आपस में Connect करना Internetworking कहलाता है। इन सभी कार्यो के लिए निम्नलिखित Connecting Devices का प्रयोग किया जाता है—

Connecting Networking and Internetworking Devices notes in Hindi

Network Interface Card (NIC)

NIC एक ऐसा Device होता है जो हमारे कम्प्यूटर को नेटवर्क से जोड़ने का कार्य करता है। यह हमारे कम्प्यूटर के मदरबोर्ड में पूर्व निर्मित होता है। कम्प्यूटर व नेटवर्क के मध्य डेटा भेजने या प्राप्त करने का कार्य NIC की सहायता से ही होता है। प्रत्येक NIC Card का एक Unique Address होता है जिसे MAC Address कहते है। इस Address को कार्ड के निर्माता कम्पनी द्वारा उसके निर्माण के समय दिया जाता है जो उस Device को नेटवर्क में अद्वितीय रूप से पहचानने के काम आता है। NIC को Network Adapter, LAN Adapter या Physical Network Interface भी कहा जाता है। नेटवर्किंग के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Computer Networks and its Types

Network Operating System (NOS)

NOS एक ऐसा Operating System है जो LAN से कम्प्यूटरों एवं अन्य डिवाईसों को जोड़ने का कार्य करता है। LANtastic, Banyan VINES, NetWare, LAN Manager, Open VMS, Windows NT, Windows Server आदि इसके उदाहरण है। इस प्रकार के आपरेटिंग सिस्टम में नेटवर्किंग से संबंधित सारे फिचर्स होते है। इनकी सहायता से हम फाईल, प्रिंटर, डेटाबेस, एप्लीकेशन आदि को Share कर सकते है। साथ ही इसमें नेटवर्क की सुरक्षा से संबंधित फीचर्स भी होते है।

Modem

Modem शब्द दो शब्दों Modulator और Demodulator से मिलकर बना है। यह एक ऐसा Device है जो Analog Signal को Digital Signal में तथा Digital Signal को Analog Signal में परिवर्तित करने का कार्य करता है। हमारे कम्प्यूटर में जो भी डेटा स्टोर होता है वह सब Digital Form में होता है। किन्तु Digital Data किसी Analog Media में Transmit नहीं हो सकते है। इसीलिए इन्हें Sender कम्प्यूटर के साथ उपलब्ध Modem के द्वारा Analog Signal में परिवर्तित करके Transmit किया जाता है। यह क्रिया Modulation कहलाता है। बाद में Receiver कम्प्यूटर के साथ उपलब्ध Modem पुनः इसे Digital Signal में परिवर्तित कम्प्यूटर को भेजता है। यह क्रिया Demodulation कहलाता है।

Hub

Hub एक ऐसा Device है जो किसी नेटवर्क के सभी कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। यह Star Network में Central Controller का कार्य करता है। इसमें बहुत सारे Ports होते है जिससे सभी कम्प्यूटरों को केबल के द्वारा जोड़ दिया जाता है। Hub अपने पास आने वाले सभी Data Packets को बिना किसी परिवर्तन के अपने से जुड़े सभी Devices को Forward कर देता है। Hub भी Passive और Active दो प्रकार के होते है। Passive Hub सभी Data Packets को बिना किसी प्रोसेसिंग के Forward करता है जबकि Active Hub में Data Packets को प्रोसेसिंग करने की भी क्षमता होती है। Active Hub को सामान्यतः Repeater भी कहा जाता है।

Repeater

Repeater एक ऐसा Device है जो किसी नेटवर्क के अलग-अलग भागों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। यह भी Hub की तरह ही होता है किन्तु इसका प्रयोग तब किया जाता है जब नेटवर्क का आकार बड़ा हो जाता है। ऐसी स्थिति में Signals नेटवर्क में प्रयुक्त Media से होकर जाते-जाते बीच में ही कमजोर होने लगते है और उनमें परिवर्तन होने लगता है। इससे बचने के लिए बड़े नेटवर्क को छोट-छोटे भागों में विभाजित कर उन्हें आपस में Repeater की सहायता से जोड़ दिया जाता है। Repeater Signals को प्राप्त कर उन्हें पुनः वास्तविक एवं शक्तिशाली रूप में उत्पन्न करके आगे Forward करता है। इसीलिए Repeater को Regenerator भी कहा जाता है।

Switch

Switch Hub की तरह ही एक ऐसा Device है जो किसी नेटवर्क के सभी कम्प्यूटरों को अपस में जोड़ने का कार्य करता है। Hub की तरह इसमें भी बहुत सारे Ports होते है जिससे सभी कम्प्यूटरों को केबल के द्वारा जोड़ दिया जाता है। किन्तु Switch और Hub के कार्य करने के तरीके में अंतर होता है। Hub अपने पास आने वाले Data Packets को अपने से जुड़े सभी Devices को Forward करता है वही Switch अपने पास आने वाले Data Packets केवल उन Devices को Forward करता है जिनको इसकी जरूरत होती है। इसके लिए Switch अपने से जुड़े सभी Devices के MAC Address का प्रयोग करता है। Switch का प्रयोग करने से नेटवर्क में Data Transfer की गति बढ़ती है और इसके Performance में भी सुधार होता है। Personal Computer के विभिन्न Hardware Parts को जानने के लिए देखें—Parts of Personal Computer (PC)

Bridge

Bridge Repeater की तरह ही एक ऐसा Device है जो किसी नेटवर्क के अलग-अलग भागों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। साथ ही यह एक समान प्रोटोकाल का प्रयोग कर रहे दो अलग-अलग नेटवर्कों को भी आपस में जोड़ सकता है। किन्तु Repeater और Bridge के कार्य करने के तरीके में अंतर होता है। Repeater अपने पास आने वाले Data Packets को पुनः उत्पन्न करके नेटवर्क के सभी भागो में Forward करता है वही Bridge अपने पास आने वाले Data Packets उनके MAC Address के अनुसार नेटवर्क के केवल उन्हीं भागों में  Forward करता है जिनको इसकी जरूरत होती है। इस प्रकार Bridge किसी बड़े नेटवर्क में Data Transfer Rate, Performance और Security में भी सुधार लाता है।

Router

Router एक ऐसा Device है जो एक समान प्रोटोकाल का प्रयोग कर रहे दो अलग-अलग नेटवर्कों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। Repeater और Bridge बहुत ही साधारण डिवाईस होते है जबकि Router एक बहुत ही जटिल डिवाईस होता है। यह विभिन्न नेटवर्कों के कम्प्यूटरों के हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर अलग-अलग होने पर भी उन्हें जोड़ने की क्षमता रखता है। यह Sender की ओर से अपने पास आने वाले सभी Data Packets को उनके IP Address के अनुसार एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में Forward करते रहता है जब तक कि ये Receiver तक नहीं पहुँच जाते है। Router Data Packets को Sender से Receiver तक पहुँचाने के लिए उपलब्ध सभी रास्तों में से सबसे छोटे रास्ते का चुनाव करता है। साथ ही यह बेकार के Data Packets को नष्ट करने तथा Data Traffic को मैनैज करने का भी कार्य करता है।

Gateway

Gateway एक ऐसा Device है जो अलग-अलग प्रकार के प्रोटोकाल का प्रयोग कर रहे दो अलग-अलग नेटवर्कों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। यह भी Router की तरह विभिन्न नेटवर्कों के कम्प्यूटरों के हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर अलग-अलग होने पर उन्हें जोड़ने की क्षमता रखता है। किन्तु यह सभी प्रकार के Connecting Devices में सबसे जटिल डिवाईस होता है। क्योंकि यह अलग-अलग प्रोटोकाल का प्रयोग करने वाले नेटवर्कों के प्रोटोकाल को Convert करने की क्षमता रखता है। इसीलिए Gateway को प्रोटोकाल Converter भी कहा जाता है। सामान्यतः कुछ Router, Firewall व Proxy Server ही इतने शक्तिशाली होते है कि वे Gateway का कार्य करते है। Gateway किसी नेटवर्क का Gate होता है। नेटवर्क से जो भी Data Packet बाहर की ओर जाता है या जो भी Data Packet अंदर की ओर आता है उन्हें Gateway से होकर गुजरना पड़ता है। Gateway आने-जाने वाले सभी Data Packets को Check करता है और उनमें कुछ गड़बड़ी होने पर उन्हें Block करने की भी क्षमता रखता है। कम्प्यूटर में साफ्टवेयर क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है जानने के लिए देखें—Software and its Types

I-Facts (Interesting facts about Networking and Internetworking)

  1. सामान्यतः Repeater व Bridge नेटवर्किंग डिवाईस कहलाते है जबकि Router व Gateway इंटरनेटवर्किंग डिवाईस कहलाते है।
  2. Node: कम्प्यूटर नेटवर्क में Node एक Redistribution Device या Terminal Device होता है जो सूचनाओं को नेटवर्क में Send, Receive या Forward करने की क्षमता रखता है। यह दो प्रकार का होता है—DCE और DTE.
  3. DCE – DCE को Data Communication Equipment कहा जाता है। यह एक ऐसा Device होता है जो अपने पास आने वाले Data को नेटवर्क में आगे भेजने का कार्य करता है। उदाहरण—Modem, Router, Hub, Bridge, Switch आदि।
  4. DTE – DTE को Data Terminal Equipment कहा जाता है। ये ऐसे डिवाईस है जो नेटवर्क में भेजे जा रहे डेटा के लिए Source या Target होते है। अर्थात् ये डेटा को भेजते या प्राप्त करते है। उदाहरण—Computer, Server, Workstation, Printer,  Mobile, Telephone, Fax Machine आदि।
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Communication Protocols TCP IP in Hindi

What is Communication Protocols TCP IP in Hindi

Protocol नियमों एवं प्रक्रियाओं के समूह को कहते है जिन्हें सफलतापूर्वक Communication करने के लिए प्रत्येक Device को Follow करना पड़ता है। Protocols का कार्य नेटवर्क से जुड़े सभी प्रकार के Devices के मध्य संचार को स्थापित करना तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान को नियंत्रित करना होता है। इसके लिए सामान्यतः TCP/IP का प्रयोग किया जाता है जो सूचनाओं को एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में पैकेट के रूप में भेजने के लिए एक स्टैण्डर्ड Protocol होता है। Communication Modes के बारे में जानने के लिए देखें—Communication Modes and its Types

Transmission Control Protocol / Internet Protocol (TCP/IP)

किसी नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण Protocol TCP/IP होता है जो अपने आप में बहुत सारे Protocol से मिलकर बना होता है इसीलिए इसे TCP/IP Protocol Suite या TCP/IP Reference Model भी कहा जाता है। इस Model निम्नलिखित चार Layers शामिल होते है—

  1. Application Layer
  2. Transport Layer
  3. Internet Layer
  4. Network Access Layer

Application Layer

Application Layer TCP/IP Suite का सबसे पहला Layer होता है। इसका कार्य यूजर को Communication के लिए Interface उपलब्ध कराना होता है। इसमें यूजर अपने विभिन्न Applications जैसे—Brower, FTP, Email आदि के साथ कार्य करता है। इसमें HTTP, FTP, SMTP, IMAP, POP3 आदि Protocols होते है।

Transport Layer

Transport Layer का कार्य नेटवर्क के विभिन्न Hosts के मध्य Communication को निर्धारित करना होता है। इस Layer में TCP व UDP प्रोटोकाल होते है जो भेजे जाने वाले बड़े सूचना को Application Layer से प्राप्त कर छोटे-छोटे टुकड़ो में विभाजित कर Internet Layer में भेजते है। इसमें TCP अधिक Reliable एवं Connection Oriented Protocol होता है किन्तु UDP की तुलना में धीमी गति से कार्य करता है।

Internet Layer

Internet Layer का कार्य अलग-अलग Networks या Hosts को Communication के लिए आपस में Connect करना होता है। इस Layer में IP प्रोटोकाल होता है जो Transport Layer से छोटे-छोटे टुकड़ो के रूप में सूचना को प्राप्त कर Packetization, Addressing एवं Routing का कार्य करता है। एक बार सभी Data Packets के Receiver के पास पहुँच जाने के बाद इन Layers के द्वारा पुनः उन्हें व्यवस्थित कर वास्तविक सूचना में परिवर्तित करके Application Layer को भेज दिया जाता है। IP एक Unreliable एवं Connectionless Protocol होता है।

Network Access Layer

Network Access Layer में कोई नेटवर्किंग डिवाईस होता है जो विभिन्न Nodes को सर्वर से Connect करने का कार्य करता है। यह हमारे कम्प्यूटर को सर्वर कम्प्यूटर या किसी अन्य कम्प्यूटर से Data Packets को Send व Receive करने की सुविधा प्रदान करता है। Network Access Layer के रूप में NIC, Ethernet, Wi-Fi, Bluetooth, DSL आदि डिवाईस कार्य करते है।

TCP IP Protocol Suite in Hindi
Fig. TCP IP Protocol Suite

I-Facts (Interesting facts about Communication Protocols and TCP IP Suite)

  1. FTP – File Transfer Protocol
  2. TFTP – Trivial File Transfer Protocol
  3. HTTP – Hyper Text Transfer Protocol
  4. SMTP – Simple Mail Transfer Protocol
  5. IMAP – Internet Message Access Protocol
  6. POP – Post Office Protocol
  7. UDP – User Datagram Protocol
  8. TCP – Transmission Control Protocol
  9. IP – Internet Protocol
  10. Email – Electronic Mail
  11. NIC – Network Interface Card
  12. DSL – Digital Subscriber Line
  13. विभिन्न प्रकार के Networking और Internetworking डिवाईसों और उनके कार्यो के बारे में जानने के लिए देखें—Connecting Devices (Networking & Internetworking)
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Network Topologies in Hindi

What is Network Topology in Hindi

Topology किसी नेटवर्क की आकृति या संरचना को कहते है। किसी नेटवर्क में विभिन्न प्रकार के Device जुड़े हो सकते है जिन्हें Node कहते है। ये सभी Node किस प्रकार एक दूसरे से जुड़कर Communication करते है यह उस नेटवर्क की Topology ही निर्धारित करती है। Topology निम्नलिखित पाँच प्रकार की होती है— ( कम्प्यूटर नेटवर्क के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Computer Networks and its Types)

  1. Star Topology
  2. Ring Topology
  3. Bus Topology
  4. Mesh Topology
  5. Tree Topology

Star Topology

Star Topology में सभी Node एक Star की आकृति में एक दूसरे से जुड़े होते है। इस प्रकार के नेटवर्क टोपोलाजी में एक Host या Controling कम्प्यूटर होता है जो नेटवर्क का सबसे प्रमुख कम्प्यूटर होता है। नेटवर्क के बाकी सभी Node इसी Host कम्प्यूटर से जुड़े होते है जो इन्हें Control करने का कार्य करता है। इसमें Sender से Receiver तक डेटा व सूचना सदैव Host कम्प्यूटर से होकर पहुँचता है। Star Topology वर्तमान में Networking के लिए बहुत प्रचलित Topology है।

STAR TOPOLOGY
Fig. STAR TOPOLOGY

Advantage of Star Topology

  1. किसी लोकल कम्प्यूटर के खराब हो जाने पर नेटवर्क पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  2. कम्प्यूटरों की संख्या बढ़ाए जाने पर Communication की गति कम नहीं होती।

Disadvantage of Star Topology

  1. Star Topology की मुख्य कमी यह है कि इसमें Host कम्प्यूटर के खराब हो जाने पर पूरा नेटवर्क फैल हो जाता है।
  2. इसमें पूरे नेटवर्क की क्षमता Host कम्प्यूटर पर निर्भर करता है।

Ring Topology

Ring Topology में सभी Node एक Ring की तरह गोलाकार आकृति में एक दूसरे से जुड़े होते है। इसीलिए इसे Circular Network भी कहा जाता है। इस प्रकार के नेटवर्क टोपोलाजी में कोई Host या Controling कम्प्यूटर नहीं होता है। इसमें Sender से Receiver तक डेटा व सूचना उनके बीच में आने वाले सभी कम्प्यूटरों से होकर पहुँचता है।

RING TOPOLOGY
Fig. RING TOPOLOGY

Advantages of Ring Topology

  1. इसमें यदि एक कम्प्यूटर कार्य करना बंद कर दे तो भी Communication दूसरी दिशा से होता रहता है।
  2. कोई Host या Controlling कम्प्यूटर नहीं होने के कारण Host कम्प्यूटर के खराब होने पर सारा नेटवर्क के Fail हो जाने का डर नहीं होता है।

Disadvantages of Ring Topology

  1. इसकी गति नेटवर्क में लगे कम्प्यूटरों की संख्या व क्षमता पर निर्भर करती है। कम्प्यूटरों की संख्या के अधिक होने एवं उनकी क्षमता कम होने से नेटवर्क की गति भी कम हो जाती है।
  2. इसके लिए विशेष प्रकार के साफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।

Bus Topology

Bus Topology में एक विशेष प्रकार के केबल का प्रयोग किया जाता है जिसे Backbone Cable कहते है। इसमें नेटवर्क के सारे Node इसी केबल से जुड़े होते है। केबल के प्रारंभ व अंत में एक विशेष प्रकार का डिवाईस लगा होता है जिसे Terminator कहते है। इसका कार्य Signals के नियंत्रित करना होता है। Bus Topology में Sender से Receiver तक डेटा व सूचना सदैव Backbone से होकर पहुँचता है।

BUS TOPOLOGY
Fig. BUS TOPOLOGY

Advantages of Bus Topology

  1. किसी लोकल कम्प्यूटर के खराब हो जाने पर नेटवर्क पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  2. इसका प्रयोग छोटे नेटवर्क में किया जाता है।

Disadvantages Bus Topology

  1. Backbone के खराब होने पर पूरा नेटवर्क फैल हो जाता है।
  2. नेटवर्क में नए कम्प्यूटर को जोड़ना बहुत कठिन होता है।

Mesh Topology

Mesh Topology में नेटवर्क का प्रत्येक Node एक जाल की तरह इसके बाकी सभी Node से जुड़े हुए होते है। इसमें कोई Host या Controling कम्प्यूटर नहीं होता है। Mesh Topology भी Fully Connected एवं Partially Connected दो प्रकार का होता है। Fully Connected Mesh Topology में प्रत्येक Node नेटवर्क के बाकी सभी Node से Connected होता जबकि Partially Connected Mesh Topology में कुछ Node नेटवर्क के बाकी सभी Node से Conneted नहीं होते है।

MESH TOPOLOGY
Fig. MESH TOPOLOGY

Advantages of Mesh Topology

  1. दो कम्प्यूटरों के मध्य डेटा व सूचना सीधे-सीधे ही ट्राँस्फर होती है।
  2. नेटवर्क का फैल होना लगभग असंभव होता है।

Disadvantages of Mesh Topology

  1. इसमें बहुत अधिक मात्रा में केबल की जरूरत पड़ती है।
  2. इसे Install व Configure करना बहुत कठिन कार्य होता है।

Tree Topology

Tree Topology में एक Root Node होता है एवं बाकी सभी Node एक वृक्ष की शाखाओं की आकृति में इससे जुड़े होते है। इसे Hierarchical Network भी कहा जाता है। इस नेटवर्क टोपोलाजी में Root Node ही Host या Controling कम्प्यूटर होता है जो नेटवर्क का सबसे प्रमुख कम्प्यूटर होता है। नेटवर्क के एक Branch से दूसरे Branch में डेटा व सूचना Root Node से होकर ही पहुँचता है।

TREE TOPOLOGY
Fig. TREE TOPOLOGY

Advantages of Tree Topology

  1. इसकी सहायता से बड़े नेटवर्क बनाए जाते है।
  2. इसमें गलतियों का पता लगाना आसान होता है।

Disadvantages of Tree Topology

  1. Root Node के फैल होने पर पूरा नेटवर्क फैल हो जाता है।
  2. इसका Maintenance करना बहुत कठिन कार्य होता है।

I-Facts (Interesting facts about Various Types of Network Topologies)

  1. Topology को किसी नेटवर्क में Links के Physical या Logical Arrangment के रूप में भी परिभाषित किया जाता है।
  2. Topology की सहायता से जुड़े विभिन्न डिवाईसों के मध्य दो तरह के संबंध होते है।
  3. Peer to Peer Relation: इसमें डिवाईस Link को बराबर-बराबर Share करते है। उदाहरण— Ring और Mesh Topology
  4. Primary Secondary Relation: इसमें एक प्रमुख डिवाईस होता है जिसके नियंत्रण में बाकी सभी डिवाईस कार्य करते है। उदाहरण— Star और Tree Topology
  5. Bus Topology को Broadcast Network भी कहा जाता है।
  6. संचार में प्रयोग किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के Networking Protocols के बारे में जानने के लिए देखें—Protocols and TCP/IP Suite
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Computer Networks notes in Hindi

Computer Networks notes in Hindi

नेटवर्क आपस में जुड़े हुए स्वतंत्र कम्प्यूटरों का समूह होता है जो एक-दूसरे के साथ डाटा एवं सूचनाओं का आदान-प्रदान करने में सक्षम होते है। कम्प्यूटरों के नेटवर्क को बनाने का मुख्य उद्देश्य इनके बीच Communication को स्थापित करना तथा सूचनाओं का आदान-प्रदान करना होता है। कम्प्यूटर नेटवर्क कई तरह के होते है जो किसी विशेष आवश्यकता की पूर्ति के लिए बनाए जाते है। कुछ प्रमुख कम्प्यूटर नेटवर्क निम्नलिखित है— ( Data Communication के बारे में जानने के लिए देखें—Data Communication )

  1. Local Area Network (LAN)
  2. Wide Area Network (WAN)
  3. Metropolitan Area Network (MAN)

Local Area Network (LAN)

Local Area Network (LAN) का प्रयोग लोकल एरिया को कवर करने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से यूनिवर्सिटी, कालेज, मेनुफैक्चरिंग प्लांट आदि में स्थित कम्प्यूटरों कनेक्ट किया जाता है। सामान्यतः यह नेटवर्क 5-10 किलोमीटर के एरिया में फैला होता है। इसमें कम्प्यूटरों को कनेक्ट करने के लिए किसी विशेष प्रकार के केबल का प्रयोग किया जाता है जिसे Ethernet केबल कहते है। इस प्रकार के नेटवर्क में डेटा ट्राँसफर रेट 10 Mbps से लेकर 100 Mbps तक होता है। नेटवर्क प्रोटोकाल क्या होता है जानने के लिए देखें—Protocols and TCP/IP Suite

Local Area Network LAN notes in Hindi
Fig. Local Area Network LAN

Wide Area Network (WAN)

Wide Area Network (WAN) का प्रयोग किसी बड़े जियोग्राफिकल एरिया को कवर करने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से एक शहर, राज्य, देश अथवा विदेशों में स्थित कम्प्यूटरों को भी एक साथ जोड़ा जा सकता है। यह नेटवर्क हजारों किलोमीटर के ऐरिया में फैला होता है। इंटरनेट WAN का एक उदाहरण है। इसके अलावा बैंको के ATM System भी WAN के ही उदाहरण है। सामान्यतः इस प्रकार के कनेक्शन को टेलीफोन लाईन के द्वारा प्रदान किया जाता है और इसके लिए Fiber Optic केबल का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के नेटवर्क में डेटा ट्राँसफर रेट 2 Mbps या इससे कम होती है। नेटवर्क टोपोलाजी क्या होता है जानने के लिए देखें—Network Topologies and its Types

Wide Area Network WAN notes in Hindi
Fig. Wide Area Network WAN

Metropolitan Area Network (MAN)

Metropolitan Area Network (MAN) एक विशेष प्रकार का नेटवर्क होता है जिसमें LAN एवं WAN दोनों की विशेषताएँ होती है। इसके द्वारा हम एक शहर या कुछ दूरी पर स्थित कार्यालयों के कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ते है। इसका प्रयोग 40-50 किलोमीटर के एरिया को कवर करने के लिए किया जाता है। सामान्यतः इसमें भी डेटा व सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए Fiber Optic केबल का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के नेटवर्क में डेटा ट्राँसफर रेट 5 Mbps से लेकर 10 Mbps तक होता है। Cable TV नेटवर्क MAN का एक उदाहरण है। इंटरनेट कनेक्शन के विभिन्न प्रकारो को जानने के लिए देखें—Types of Internet Connection

I-Facts (Interesting facts about Computer Networks)

  1. PAN: Personal Area Network किसी व्यक्ति द्वारा अपने घर या आफिस में लगे विभिन्न डिवाईसों को जोड़कर बनाए गए निजी नेटवर्क को कहते है। इसकी रेंज 10 से 100 मीटर तक की होती है।
  2. CAN: Campus Area Network किसी संस्था, स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, अस्पताल आदि में लगे कम्प्यूटरों का नेटवर्कि होता है। इसकी रेंज 1 से 5 किलोमीटर तक की होती है।
  3. VPN: Virtual Private Network एक ऐसा नेटवर्क है जो Private नेटवर्क को Public नेटवर्क तक फैलाता है और इस नेटवर्क से जुड़े हुए यूजर को Shared Public नेटवर्क से डेटा भेजने व प्राप्त करने की सुविधा देता है। इसमें पूरा संचार Encrypted रूप में होता है।
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Communication Transmission Media in Hindi

What is Communication or Transmission Media in Hindi

Communication Media वह माध्यम या मार्ग होता है जिसके द्वारा डेटा व सूचनाओं को Sender से Receiver तक ले जाया जाता है। इसे Transmission Media भी कहा जाता है। यह निम्नलिखित दो प्रकार का होता है— (Communication Modes के बारे में जानने के लिए देखें—Communication Modes and its Types)

Communication Media
Fig. Types of Communication Media

Guided Media

Guided Media को Wired Media भी कहा जाता है। इसमें Physical Cable का प्रयोग डेटा व सूचनाओं को Sender से Receiver तक ले जाने के लिए किया जाता है। Guided Media निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है—(Communication Protocols के बारे में जानने के लिए देखें—Protocols and TCP/IP Suite)

Twisted Pair Cable

Twisted Pair Cable ताँबे के दो तारों का बना होता है जो आपस में लिपटे हुए होते है। ये दोनो तार प्लास्टिक से Insulated होते है। दोनो तार को Twisted करने का फायदा यह होता है कि इससे Noise या Crosstalk का प्रभाव कम हो जाता है। Twisted Pair Cable Data Communication के लिए बहुत सस्ता होता है। इसका प्रयोग टेलीफोन लाईन, कुछ लोकल एरिया नेटवर्क आदि में किया जाता है। इसकी सहायता से 1-2 किलोमीटर के ऐरिया को कवर किया जाता है और इसमें डेटा ट्रांस्फर की गति 1-2 Mbps तक की होती है।

Coaxial Cable

Coaxial Cable में एक ठोस तांबे का तार होता है जो ठोस प्लास्टिक से Insulated होता है। इसके ऊपर धातु के जालीदार तार लिपटे होते है जो पुनः प्लास्टिक से Insulated होता है। इसमें ऊपर धातु का तार सिग्नल को शोर बचाने के लिए होता है। इसका प्रयोग लोकल एरिया नेटवर्क एवं केबल टीवी में किया जाता है। इसकी सहायता से 1-2 किलोमीटर के ऐरिया को कवर किया जाता है और इसमें डेटा ट्रांस्फर की गति 100 Mbps तक की होती है।

Fiber Optic Cable

Fiber Optic Cable कांच के हज़ारों पतले रेशे से निर्मित होता है। इसमें डेटा व सूचनाओं को प्रकाश के रूप में ट्रांस्फर किया जाता है। इसका प्रयोग हजारों किलोमीटर तक के एरिया को भी कवर किया जा सकता है तथा इसकी गति भी कई गुना अधिक होती है। इसीलिए वर्तमान में Data Transmission के लिए Fiber Optic Cable का प्रयोग सर्वाधिक किया जा रहा है। इसमें एक लेजर डिवाईस लगा होता है जो सिग्नल को 1000 Mbps की गति से Transmit करता है।

Transmission Media Guided Media
Fig. Twisted Pair Cable Coaxial Cable Fiber Optic Cable

Unguided Media

Unguided Media को Wireless Media भी कहा जाता है। इसमें Physical Cable की बजाए वातावरण का प्रयोग डेटा व सूचनाओं को Sender से Receiver तक ले जाने के लिए किया जाता है। Unguided Media भी निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है—(Communication Devices के बारे में जानने के लिए देखें—Connecting Devices (Networking & Internetworking))

Radio Waves

Radio Waves ऐसे Electromagnetic Waves होते है जिनकी आवृत्ति समान्यतः 3 KHz से 1 GHz तक की होती है। ये तरंगे सभी दिशाओं में विचरण करते हुए Sender से Receiver तक पहुँचती है। इसमें सिग्नल भेजने वाले Antenna एवं उसे प्राप्त करने वाले Antenna को एक सीध में रहने की आवश्यकता नहीं होती है। इसीलिए इनका प्रयोग Multicasting अर्थात् FM Radio, AM Radio, Television, Wireless Phone आदि में किया जाता है।

Micro Waves

Micro Waves ऐसे Electromagnetic Waves होते है जिनकी आवृत्ति समान्यतः 1 GHz से 300 GHz तक की होती है। ये तरंगे एक ही दिशा में गमन करते हुए Sender से Receiver तक पहुँचती है। इसमें सिग्नल भेजने वाले Antenna एवं उसे प्राप्त करने वाले Antenna दोनो का एक सीध में रहना बहुत जरूरी होता है। इसीलिए इनका प्रयोग Unicasting अर्थात् Microwave Oven, Cellular Phone, Satellite आदि में किया जाता है।

Infrared Waves

Infrared Waves ऐसे Electromagnetic Waves होते है जिनकी आवृत्ति समान्यतः 300 GHz से 400 THz तक की होती है। ये तरंगे बहुत ही कम दूरी के Communication के लिए प्रयोग में लायी जाती है। इनका प्रयोग TV, AC, Cooler आदि के Remote में, Wireless Keyboard, Mouse, Printer, Night Vision Camera आदि में किया जाता है।

I-Facts (Interesting facts about Communication Media)

  1. Bluetooth: यह छोटी दूरी के संचार के लिए बनाया गया एक Wireless Technology Standard है। इसकी सहायता से 100 मीटर तक के क्षेत्रफल में संचार स्थापित किया जा सकता है। इसमें संचार के लिए 2.4 GHz से 2.8 GHz तक के रेडियो तरंगो का प्रयोग किया जाता है। Bluetooth की सहयता से Wireless Personal Area Network (WPAN) बनाया जाता है।
  2. Wi-Fi: Wi-Fi भी Bluetooth के समान ही एक Wireless Technology Standard है जिसका प्रयोग 100 मीटर तक के क्षेत्रफल में संचार स्थापित करने के लिए किया जाता है। Wi-Fi की सहयता से Wireless Local Area Network (WLAN) बनाया जाता है।
  3. Radio: Bluetooth, Wi-Fi, Microwave, Satellite या अन्य Wireless Technology द्वारा Data का आदान-प्रदान करना Radio Communication कहलाता है।
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Communication Modes in Hindi

What is Communication Modes in Hindi

Communication Mode का अर्थ दो Device के मध्य Signal Flow की दिशा से होता है। Communication में एक Device Signal को भेजने वाला तथा दूसरा Device इसे प्राप्त करने वाला हो सकता है। साथ ही दोनों के दोनों Device भी Signal को भेजने व प्राप्त करने वाले हो सकते है। इसके अनुसार Communication Mode निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है— (Communication Media के बारे में जानने के लिए देखें—Communication Media and its Types)

  1. Simplex
  2. Half Duplex
  3. Full Duplex

Simplex

Simplex Communication Mode में डेटा व सिग्नल सदैव एक ही दिशा में Transmit होते है। इसीलिए इसे One-Way Communication भी कहा जाता है। इसमें सामान्यतः एक डिवाईस सिग्नल की भेजने वाला तथा एक या एक से अधिक डिवाईस इसे प्राप्त करने वाले होते है। उदाहरण—Radio, TV, Remote आदि।

Half Duplex

Half Duplex Communication Mode में डेटा व सिग्नल सदैव दोनों दिशा में Transmit होते है। इसे Alternative Two-Way Communication भी कहा जाता है। इसमें जब एक डिवाईस सिग्नल की भेज रहा होता है तो दूसरा डिवाईस उसे प्राप्त कर रहा होता है। इसी प्रकार जब दूसरा डिवाईस सिग्नल की भेज रहा होता है तो पहला डिवाईस उसे प्राप्त कर रहा होता है। किन्तु दोनों डिवाईस एक ही समय में सिग्नल का आदान-प्रदान नहीं कर सकते है। उदाहरण—Walkie-Talkie, Citizen’s Band आदि।

Full Duplex

Full Duplex Communication Mode में डेटा व सिग्नल दोनों दिशा में Transmit होते है। इसे Full Two-Way Communication भी कहा जाता है। इसमें दोनों डिवाईस एक ही समय में सिग्नल का आदान-प्रदान कर सकते है। इसमें Communication सबसे तेज गति से होता है इसीलिए इसका प्रयोग वर्तमान में सबसे ज्यादा किया जा रहा है। उदाहरण—Computer, Mobile, Landline आदि।

Communication Modes Simplex Half Duplex Full Duplex in Hindi
Fig. Communication Modes Simplex Half Duplex Full Duplex

I-Facts (Interesting facts about Communication Modes)

  1. Channel: Channel का अर्थ Radio Frequency या Communication Path होता है। यह एक Communication Media है जो Transmitter से Receiver तक का रास्ता उपलब्ध कराता है।
  2. Range: Range, Source और Destination के बीच उस अधिकतम दूरी को कहते है जहाँ तक सिग्नल अच्छी तरह से प्राप्त किया जा सकता है।
  3. Attenuation: संचार माध्यम के द्वारा सिग्नल का Transmission होते समय इसकी Strength में आयी कमी को Attenuation कहा जाता है।
  4. Noise: Noise उन अनावंछित सिग्नल को कहते है जो Communication System में Message Signal के Transmission को Disturb करता है।
  5. Computer Signals के बारे में जानने के लिए देखें—Signals and its Types
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Analog and Digital Modulation in Hindi

Introduction to Analog and Digital Modulations in Hindi

Communication एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें डेटा एवं सूचनाओं को Message Signal में परिवर्तित करके Sender से Receiver तक पहुँचाया जाता है। इस प्रक्रिया में जब Message Signal Transmission Media से होते हुए जाते है तो उनकी Strength कम होते जाती है। इससे डेटा व सूचनाएँ पूर्ण रूप से एवं पूर्ण शुद्धता के साथ Sender से Receiver तक नहीं पहुँच पाता है। इस समस्या से बचने के लिए Modulation का प्रयोग किया जाता है। Data Communication के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Data Communication

Modulation एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें Message Signal को High Strength के Carrier Signal के साथ Superimpose किया जाता है। इसमें Carrier Signal के Parameters को Message Signal के अनुसार परिवर्तित किया जाता है। इससे Message Signal की Strength बढ़ जाती है और वह अधिक दूरी तय करने में सक्षम हो जाता है। Signal के अनुसार Modulation निम्नलिखित दो प्रकार के होते है—

Types of Modulation in Hindi
Types of Modulation

Analog Modulation

Analog Modulation में Analog Signal का प्रयोग Carrier Signal के रूप में किया जाता है जो Message Signal को Modulate करता है। Parameter के अनुसार यह निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है—

Amplitude Modulation

Amplitude Modulation में Carrier Signal के Amplitude को Message Signal के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।

Frequency Modulation

Frequency Modulation में Carrier Signal के Frequency को Message Signal के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।

Phase Modulation

Phase Modulation में Carrier Signal के Phase को Message Signal के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।

Digital Modulation

Digital Modulation में Digital Signal का प्रयोग Carrier Signal के रूप में किया जाता है जो Message Signal को Modulate करता है। Parameter के अनुसार यह निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है—

Amplitude Shift Keying

Amplitude Shift Keying में Carrier Signal के Amplitude को Message Signal के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।

Frequency Shift Keying

Frequency Shift Keying में Carrier Signal के Frequency को Message Signal के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।

Phase Shift Keying

Phase Shift Keying में Carrier Signal के Phase को Message Signal के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।

I-Facts (Interesting facts about Amplitude, Frequency and Phase Modulations)

  1. दूरदर्शन के प्रसारण, TV, Satellite जैसे Broadcasting में Amplitude Modulation का प्रयोग किया जाता है।
  2. कम्प्यूटर नेटवर्क में Phase Modulation का प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त Digital Synthesizers में भी Phase Modulation का प्रयोग किया जाता है।
  3. रेडिया के प्रसारण में Frequency Modulation व Phase Modulation का प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त Telemetry, Radar, Music Synthesis आदि में भी Frequency Modulation का प्रयोग किया जाता है।
  4. विभिन्न प्रकार के Communication Signals के बारे में जानने के लिए देेखें—Signals and its Types
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Analog and Digital Signals in Hindi

Introduction to Analog and Digital Signals in Hindi

Communication के लिए डेटा व सूचनाओं को Electrical या Electromagnetic रूप में परिवर्तित करके भेजा जाता है जिसे Signal कहते है। इन Signals को किसी संचार माध्यम से होते हुए Sender से Receiver तक पहुँचाया जाता है। संचार माध्यमों के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट देखें—Communication Media and its Types. Signal निम्नलिखित दो प्रकार के होते है—

  1. Analog Signal
  2. Digital Signal

Analog Signal

ऐसा सिग्नल जिसका मान समय के साथ सतत् (Continue) परिवर्तित होते रहता है एनालाग सिग्नल कहलाता है। यह Voltage (Wave) के रूप में होता है। इसका मान दिए गए Range के अंदर होता है। Human Voice, Music, Video आदि एनालाग सिग्नल के उदाहरण है। एनालाग सिग्नल की मुख्य कमी यह है कि इसमें High Quality Transmission नहीं हो पाता है तथा गलतियों की संभावना अधिक होती है।

Analog Signal notes in Hindi
Analog Signal

Digital Signal

ऐसा सिग्नल जिसका मान समय के साथ असतत् (Discrete) होता है डिजिटल सिग्नल कहलाता है। यह Voltage (Pulse) के रूप में होता है। इसके केवल दो ही मान 0 व 1 होते है। कम्प्यूटर एवं अन्य डिजिटल डिवाईसो में स्टोर डेटा इसका उदाहरण है। डिजिटल सिग्नल का मुख्य लाभ यह है कि इसमें High Quality Transmission होता है तथा गलतियों की संभावना बहुत कम होती है।

Digital Signal notes in Hindi
Digital Signal

I-Facts (Interesting facts about Analog and Digital Signals)

  1. Transmitter: यह एक Electronic Device होता है जो सूक्ष्म AC Signal उत्पन्न कर Antenna को भेजता है।
  2. Antenna: Antenna यह एक Electrical Device होता है जो Electric Power (AC) को Radio Waves और Radio Waves को Electric Power (AC) में परिवर्तित करता है। इसे Aerial भी कहा जाता है।
  3. Receiver: यह एक Electronic Device होता है जो Antenna से AC Signal प्राप्त करके उसे मूल सूचना में परिवर्तित करता है।
  4. Amplifier: Amplifier एक Electronic Device होता है जो Signal के Strength को बढ़ाता है जिससे कि Signal अधिक दूरी तय कर पाता है।
  5. Data Communication Systems के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें—Data Communication
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