System Files of MS DOS in Hindi

What are Some Important System Files of MS DOS in Hindi

MS-DOS के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Microsoft Disk Operating System (MS DOS)

Microsoft Disk Operating System (MS DOS) एक आपरेटिंग सिस्टम साप्टवेयर है इसका निर्माण बहुत सारे Files या Programs से मिलकर हुआ है जिन्हें System Files कहते है। अलग-अलग सिस्टम फाईलें सिस्टम से संबंधित अलग-अलग जरूरतो को पूरा करती है। MS DOS की कुछ महत्वपूर्ण सिस्टम फाइलें निम्नलिखित है—

System Files of MS DOS in Hindi

IO.SYS and MSDOS.SYS

इन दोनों फाईलो का कार्य कम्प्यूटर सिस्टम में Input/Output Devices और Operating System के मध्य संपर्क स्थापित करना होता है। ये दोनों Hidden Files होती है जो बूटिंग के दौरान स्वतः मेमोरी में लोड हो जाती है। इन्हें DOS Kernel भी कहा जाता है।

COMMAND.COM

यह फाईल User और Computer के मध्य संपर्क स्थापित करता है। इसमें MS DOS के विभिन्न Internal Commamds स्टोर होते है जिन्हें हम DOS Prompt पर क्रियान्वित कर सकते है। यह भी बूटिंग के दौरान स्वतः ही मेमोरी में लोड हो जाता है। इसे Command Interpreter, Console Command Processor या Shell भी कहा जाता है।

AUTOEXEC.BAT

AUTOEXEC.BAT एक Batch File है जिसमें लिखे Commands बूटिंग के दौरान स्वतः क्रियान्वित हो जाता है। इसीलिए इस File का नाम AUTOEXEC अर्थात् Auto Executable रखा गया है। इसमें DOS के लिए प्रारंभिक निर्देश DOS Commands के रूप में होते है।

CONFIG.SYS

यह एक ऐसा फाईल है जिसमें कम्प्यूटर से जुड़े विभिन्न हार्डवेयरों जैसे—Keyboard, Mouse, Printer, Memory आदि का Configuration (Setting) स्टोर रहता है। इसका उपयोग DOS और अन्य Applications के द्वारा किया जाता है। CONFIG.SYS फाईल AUTOEXEC.BAT फाईल के बाद क्रियान्वित होता है। यह कम्प्यूटर के Root Directory में स्टोर होता है।

I-Facts (Interesting facts about MS DOS System Files in Hindi)

  1. MS-DOS में बूटिंग पूरा होने पर जो स्क्रीन में दिखाई देता है उसे DOS Prompt या System Prompt कहते है। यह पहले A:\> के रूप में दिखता था किन्तु अब C:\> के रूप में दिखाई देता है।
  2. DOS में दो तरह की फाईलें होती है—Data File और Program File. डेटा फाईल डेटा या सूचनाओं का संग्रह होता है जबकि प्रोग्राम फाईल निर्देशों का संग्रह होता है।
  3. DOS में फाईल का नाम दो भागों से मिलकर बना होता है—Primary Name और Extension Name. प्रायमरी नाम 8 अक्षरों का होता है जबकि एक्सटेंशन नाम 3 अक्षरों का होता है। इन दोनों नामों के मध्य Dot ( . ) का प्रयोग किया जाता है।
  4. DOS में Folder को Directory कहा जाता है। Directory फाईलों का संग्रह होता है। इसे हार्ड डिस्क के एक Named Section के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  5. Windows आपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानने के लिए देखें—Introduction to MS-Windows
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MS DOS Booting Process notes in Hindi

Explain Booting Process of MS DOS in Hindi

कम्प्यूटर को Start एवं Restart करना Booting कहलाता है। बंद पड़े कम्प्यूटर को स्टार्ट करना Cold Booting तथा पहले से चालू कम्प्यूटर को रिस्टार्ट करना Warm Booting कहलाता है। जब हम कम्प्यूटर का पावर बटन आन करते है तो ROM Memory में स्टोर प्रोग्राम BIOS (Basic Input Output System) अपने आप Execute (Run) हो जाता है। यह प्रोग्राम सभी Devices को Check करता है जिसे POST (Power On Self Test) कहते है।

MS-DOS आपरेटिंग सिस्टम के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Microsoft Disk Operating System (MS DOS)

यदि सभी डिवाईस ठीक तरह से कार्य कर रहे होते है तो यह  MS-DOS को External Storage Device (Hard Disk) से Internal Memory Device (RAM) में लोड करता है। इस प्रक्रिया को Booting Process कहा जाता है। सफलातापूर्वक Booting हो जाने के बाद हमें DOS Command Prompt ( C:\> ) दिखायी देता है और हमारा कम्प्यूटर कार्य करने के लिए तैयार हो जाता है। MS-DOS के Booting Process को निम्नलिखित Steps से समझा जा सकता है—

  1. BIOS Initialization: इस चरण में BIOS Firmware कम्प्यूटर सिस्टम से जुड़े हार्डवेयर डिवाइसों की पहचान करता है और उन्हें प्रारंभ करता है।
  2. POST: इस चरण में BIOS आपरेटिंग सिस्टम के लोडिंग के लिए Disk की पहचान करता है तथा Boot Sector में स्थित MBR को पढ़ता है।
  3. MBR Program Data Area में स्टोर दो फाईलों IO.SYS व MSDOS.SYS को ढूँढ़कर इसे मेमोरी में लोड करता है इसके बाद कम्प्यूटर के द्वारा CONFIG.SYS फाईल को लोड किया जाता है।
  4. Booting के अंतिम चरण में COMMAND.COM नामक फाईल को मेमोरी में लोड किया जाता है जिसमें DOS के सभी Internal Commands स्टोर होते है। इसके बाद AUTOEXEC.BAT फाईल स्वतः ही Execute हो जाता है और हमारा कम्प्यूटर पूरी तरह से चालू हो जाता है।
Booting Process notes in Hindi
Fig. Booting Process

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS Booting Process in Hindi)

  1. POST – Power On Self Test, BIOS – Basic Input Output System, MBR – Master Boot Records
  2. Boot Sequence: यह उन Operations का समूह होता है जिन्हें कम्प्यूटर तब Perform करता है जब कम्प्यूटर स्टार्ट होता है।
  3. Bootstrap Loader: यह आपरेटिंग सिस्टम को स्टार्ट करने के लिए आवश्यक अन्य साफ्टवेयर को मेमोरी में लोड करता है।
  4. Master Boot Record (MBR): Hard Disk के सबसे पहले Sector में स्टोर सूचना होता है जो बताता है कि आपरेटिंग सिस्टम डिस्क में कहाँ स्थित है और इसे किस तरह मेमोरी में लोड किया जा सकता है। Master Boot Record को Master Partition Table भी कहा जाता है।
  5. Warm Reboot के लिए Keyboard Shortcut Ctrl+Alt+Del का प्रयोग किया जाता है।
  6. Cold Booting में कम्प्यूटर के हार्डवेयर पार्ट्स ठंडे होते है जबकि Warm Booting में कम्प्यूटर पहले से ही चालू होता है अतः इसके हार्डवेयर पार्ट्स गरम होते है इसीलिए इसका नाम Warm Booting है।
  7. आपरेटिंग सिस्टम क्या होता है इसके बारे में अधिक जानने के लिए देखें—OS: Operating System Software
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Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

What is MS DOS in Hindi

MS-Windows क्या होता है Windows और DOS में क्या अंतर होता है जानने के लिए देखें—Introduction to MS-Windows

Microsoft Disk Operating System (MS-DOS) एक आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है Microsoft कम्पनी के द्वारा बनाया गया है। यह CLI अर्थात् Command Line Interface पर आधारित आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है जिसमें सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है। इसे Disk Operating System इसलिए कहा जाता है क्योकिं यह कम्प्यूटर के Hard Disk को नियंत्रित करता है और अधिकतर Disk से संबंधित Input/Output का कार्य करता है। MS-DOS हमारे Hard Disk को मुख्यतः निम्नलिखित दो भागों में विभाजित करता है—System Area और Data Area.

Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

System Area वह भाग होता है जिसमें हमारे डिस्क के नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएँ होती है तथा Data Area वह भाग होता है जहाँ यूजर का डेटा स्टोर होता है। System Area आगे तीन भागों Boot Record, File Allocation Table (FAT) व Root Directory में विभाजित होता है। Boot Record Disk का सबसे पहला भाग होता है जहा DOS को चालू करने सें संबंधित जानकारी स्टोर होता है। File Allocation Table (FAT) में हार्ड डिस्क के Data Area को नियंत्रण करने से संबंधित जानकारी संग्रहीत रहता है। Root Directory कम्प्यूटर सिस्टम का सबसे प्रमुख File Directory होता है जिसे Backslash ( \ ) से सूचित किया जाता है।

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS in Hindi)

  1. Interface के आधार पर Operating System मुख्यतः दो प्रकार के होते है—CLI और GUI.
  2. CLI – Command Line Interface आपरेटिंग सिस्टम में सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है।
  3. GUI – Graphical User Interface आपरेटिंग सिस्टम में कार्य करने के लिए Graphics और Mouse का प्रयोग किया जाता है।
  4. DOS को CUI (Character User Interface) आपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है।
  5. Microsoft से पहले International Business Machines (IBM) ने Personal Computer Disk Operating System (PC-DOS) नाम से सन् 1981 में एक आपरेटिंग सिस्टम बनाया था।
  6. MS-DOS का पहले Version सन् 1981 में रिलिज किया गया था जिसका नाम MS-DOS 1.0 था। इसका अंतिम Version MS-DOS 6.22 था जिसे सन् 1994 में रिलिज किया गया था। इसके बाद से DOS को Windows के साथ Accessories में Command Prompt के नाम से जोड़ दिया गया।
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