Types of Computer Virus in Hindi

Types of Computer Virus in Hindi

Virus एक ऐसा प्रोग्राम है जिसे हमारे कम्प्यूटर को नुकसान पहुँचाने के लिए बनाया जाता है। प्रत्येक वायरस प्रोग्राम कम्प्यूटर को अलग-अलग तरह से नुकसान पहुँचाते है। कोई डेटा को नुकसान पहुँचाता है तो कोई साफ्टवेयर को नुकसान पहुँचाता है तो कोई हार्ड डिस्क को भरने का काम करता है। अतः कम्प्यूटर को नुकसान पहुंचाने के तरीके के आधार पर Virus निम्नलिखित प्रकार के होते हैं— (कम्प्यूटर वायरस के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Computer Virus its Mechanism and Effects)

Types of Computer Virus in Hindi

Boot Sector Virus

Boot Sector Virus हमारे Hard Disk के C Drive के Boot Sector में रहता है। जब हम अपने कम्प्यूटर को Start करते हैं तो यह Operating System को Boot Sector से RAM में Load होने नहीं देता हैं। अंततः हमारा Computer Start नहीं हो पाता हैं। यह Virus Master Boot Record, FAT और Partition Table को नुकसान पहुंचाता हैं। उदाहरण— C-Brain, Form, Disk Killer, Michelangelo, Stone virus etc.

Partition Table Virus

यह वायरस Hard Disk के Partition Table को नुकसान पहुंचाता है । यह Master Boot Record को प्रभावित करता है। साथ ही RAM और I/O Operations की क्षमता को कम कर देता है। उदाहरण—Happy Birthday Joshi etc.

File Virus

इस प्रकार के Virus Executable File या Software के साथ अपने को Copy कर लेते हैं । जब हम इन Software को Run करते है तो ये इसके साथ ही Run होकर पूरे System में फैल जाते हैं और System को नुकसान पहुंचाते हैं । File Virus को Parasitic Virus या Program Virus भी कहा जाता है। उदाहरण— Sunday, Cascade, Invader, Flip, and Tequila etc.

Stealth Virus

Stealth Virus एक ऐसा Virus होता है जो स्वयं को Anti Virus के द्वारा पकड़े जाने से हर संभव छिपाने का प्रयास करता है। इसके लिए यह अपने नाम को बार – बार परिवर्तित करता है और Disk के एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं । Frodo, Joshi, Whale etc.

Polymorphic Virus

Polymorphic का अर्थ अनेक रूपों वाला या बहरूपिया होता हैं । इस प्रकार Polymorphic Virus ऐसा Virus होता है जो कम्प्यूटर को हर बार अलग तरह से नुकसान पहुंचाता हैं। इसीलिए इस Virus का पता लगाना बहुत मुश्किल काम होता हैं। उदाहरण— Involuntary, Stimulate, Cascade, Phoenix, Evil, Proud, Virus 101 etc.

Macro Virus

Macro Virus एक ऐसा Virus होता है जिसे किसी Applications के अंदर उपलब्ध Macro Programming में लिखा जाता है। इसीलिए यह Virus उन Applications जैसे – Word, Excel, Powerpoint, Access आदि के Data को नुकसान पहुंचाता है जिसमें यह होता हैं। उदाहरण— DMV, Nuclear, Word Concept, Melissa Worm etc.

I-Facts (Interesting facts about various types of Computer Virus)

  1. Dropper: यह एक ऐसा प्रोग्राम है जो स्वयं तो वायरस नहीं होता किन्तु जब यह कम्प्यूटर में रन होता है तो इसमें वायरस को Install कर देता है। अतः यह वायरस के लिए Carrier का कार्य करता है।
  2. Backdoor: इसे Trapdoor भी कहा जाता है। यह एक ऐसा Utility है जिसकी सहायता से नेटवर्क के माध्यम से दूरस्थ कम्प्यूटर को Access किया जा सकता है। इसका प्रयोग सामान्यतः Authorized Administrator के द्वारा किया जाता है किन्तु इसकी सहायता से Attacker भी हमारे कम्प्यूटर को Access कर सकते है।
  3. Rootkit: यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है जिसे हमारे कम्प्यूटर पर Low Level Access प्राप्त करने के लिए बनाया जाता है। यह किसी तरह सिस्टम में अपने उपस्थिति को छुपाए रखता है और प्रत्येक बार सिस्टम के बूट होने पर सक्रिय हो जाता है।
  4. वायरस किन किन तरीकों से हमारे सिस्टम में फैलता है जानने के लिएि देखें—How Virus Spread?
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Detection and Prevention of Computer Virus in Hindi

Detection and Prevention of Computer Virus in Hindi

हमारे कम्प्यूटर को Virus से बचाने के लिए जिस प्रोग्राम का प्रयोग किया जाता है उसे Antivirus कहते हैं। Antivirus का कार्य कम्प्यूटर में Virus को आने से रोकना होता है। साथ ही यह हमारे कम्प्यूटर के पहले से Virus संक्रमित होने पर उसमें उपस्थित Virus का पता लगाकर उन्हें समाप्त करता है। कुछ प्रसिद्ध Antivirus Programs निम्नलिखित है– Quick Heal, Norton, Net protector, Avast, Kaspersky, Malwarebytes, AVL, AVG, Dr. Web, Windows Defender, Trend Micro, Avira, ESET, Webroot, F-Sesure, Panda, Bullguard etc. कम्प्यूटर वायरस के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Computer Virus its Mechanism and Effects

Detection and Prevention of Computer Virus Antivirus Program  in Hindi

Antivirus Program में बहुत सारे Tools होते हैं जिनके प्रयोग से हम अपने कम्प्यूटर को सुरक्षित रख सकते हैं। सामान्यतः सभी Antivirus Program के साथ Check Summer, Scanner व Remover होता हैं। जब कोई Virus हमारे कम्प्यूटर में प्रवेश करता है तो वह अनिवार्य रूप सा Executable Files (Software) में परिवर्तन करता है। Check Summer Executable Files में हुए इन्हीं परिवर्तनों का पता लगाकर User को सूचित करता है। Scanner हमारे कम्प्यूटर के Memory एवं Executable Files में Virus की उपस्थिति का पता लगाते है और हमें बताते हैं कि हमारा Computer Virus से संक्रमित है या नहीं? Remover हमारे Computer के Virus से संक्रमित होने पर इन्हें हटाने या समाप्त करने का कार्य करते हैं। विभिन्न प्रकार के कम्प्यूटर वायरस के बारे में जानने के लिए देखें—Types of Virus

I-Facts (Interesting facts and tips about Detection and Prevention of Computer Virus)

अपने कम्प्यूटर सिस्टम को वायरस से बचाने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों का हमें सदैव ध्यान रखना चाहिए—

  1. आपरेटिंग सिस्टम व अन्य सभी साफ्टवेयर को सदैव अपडेट रखना चाहिए।
  2. Firewall का प्रयोग करना चाहिए।
  3. Antivirus साफ्टवेयर का प्रयोग करना चाहिए।
  4. Pirated साफ्टवेयर को अपने कम्प्यूटर में Install नहीं करना चाहिए।
  5. कोई भी साफ्टवेयर हमेशा उसके Official Website से ही डाउनलोड करके प्रयोग करना चाहिए।
  6. Internet व Web का प्रयोग करते समय अविश्वसनीय वेबसाइट को नहीं खोलना चाहिए व अनजान लिंक पर क्लिक भी नहीं करना चाहिए।
  7. आपरेटिंग सिस्टम व एंटी वायरस साफ्टवेयर के द्वारा दिए जाने वाले Security Warnings को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  8. कम्प्यूटर वायरस कैसे फैलता है जानने के लिए देखें—How Virus Spread?
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How Computer Virus Spread in Hindi

Three Most Common Ways of Spreading Viruses in our Computer in Hindi

Virus एक छोटा प्रोग्राम होता है जिसे हमारे कम्प्यूटर को नुकसान पहुँचाने के लिए बनाया जाता है। जब कोई Virus हमारे कम्प्यूटर में प्रवेश करता है तो वह स्वयं को लगातार दोहराते हुए सभी Software, File, Folder में अपने को Copy कर लेता है। इस प्रकार यह पूरे system में फैलकर इसे संक्रमित कर कम्प्यूटर को नुकसान पहुँचाता है। वायरस हमारे कम्प्यूटर सिस्टम में सामान्यतः निम्नलिखित तीन तरीके से प्रवेश करता है—(कम्प्यूटर वायरस के बारे में अधिक जानने के लिए यह पोस्ट देखें—Computer Virus its Mechanism and Effects)

How Computer Virus Spread in Hindi

Using Pirated Software

जब कोई Software गैरकानूनी ढंग से प्राप्त किया जाता है तो इसे Pirated या चोरी की गई Software कहते हैं। Pirated Software प्रायः Virus से संक्रमित रहते हैं। जब हम Pirated Software को अपने कम्प्यूटर में Install करते हैं तो इसके Virus भी हमारे कम्प्यूटर में आ जाते हैं।

Through Removable Storage

Removable Storage Device जैसे – Pen Drive का प्रयोग एक Computer से दूसरे Computer में डेटा को ले जाने के लिए किया जाता है। जब हम किसी Virus संक्रमित Computer से Pen Drive के द्वारा डेटा को Copy करके अपने कम्प्यूटर में लाते हैं तो Virus भी इसके साथ ही Copy होकर आ जाता हैं।

Through Internet

आज Internet Virus फैलाने का सबसे बड़ा साधन बन गया है। इंटरनेट पर बहुत सी ऐसी Websites हैं जिन्हें खोलने या इनसे कुछ डाउनलोड करने पर Virus आता है। साथ ही इंटरनेट से हम जो Email प्राप्त करते हैं उसके साथ भी Virus आता हैं।

I-Facts (Interesting facts about Spreading of Computer Viruses)

  1. कम्प्यूटर वायरस एक साफ्टवेयर प्रोग्राम होता है जो स्वयं को बार-बार कापी करके पूरे कम्प्यूटर में फैला लेता है व इसमें उपस्थित साफ्टवेयर और डेटा को नुकसान पहुँचाता है किन्तु यह कम्प्यूटर के हार्डवेयर को भौतिक रूप से नुकसान नहीं पहुँचा पाता है।
  2. कम्प्यूटर वायरस किसी Write Protect Memory व Compressed Zip File को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचा पाता है क्योंकि वह स्वयं को इनमें कापी करके फैला नहीं सकता है।
  3. वायरस के विभिन्न प्रकारो को जानने के लिए देखें—Types of Virus
  4. वायरस से सुरक्षा कैसे की जाती है जानने के लिए देखें—Detection and Prevention of Virus
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Computer Virus Its Mechanism and Effects in Hindi

What is Computer Virus?

Virus एक छोटा प्रोग्राम होता है जिसे हमारे कम्प्यूटर को नुकसान पहुँचाने के लिए बनाया जाता है। इसे malware भी कहा जाता है। जब कोई Virus हमारे कम्प्यूटर में प्रवेश करता है तो वह स्वयं को लगातार दोहराते हुए सभी Software, File, Folder में अपने को Copy कर लेता है। इस प्रकार यह पूरे system में फैलकर इसे संक्रमित कर कम्प्यूटर को नुकसान पहुँचाता है। कुछ प्रसिद्ध Virus प्रोग्राम निम्नलिखित है— C-Brain, Happy Birthday Joshi, Michelangelo, Disk Washer etc. वायरस के विभिन्न प्रकारो को जानने के लिए देखें—Types of Virus

Computer Virus Its Mechanism and Effects in Hindi
Fig. PC Affected by Virus

How Virus Works? Mechanism of Virus?

किसी भी प्रोग्राम को अपना कार्य करने के लिए Run (Execute) होना आवश्यक होता है। और कोई प्रोग्राम तब Run होता है जब हम उसे Run होने का निर्देश देते हैं। चूँकि Virus भी एक प्रोग्राम है अतः उसे भी अपना कार्य करने के लिए Run होना आवश्यक होता है और जाने – अनजाने हम ही Virus को Run होने का निर्देश देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि Virus स्वयं को कम्प्यूटर में Install बाकी सभी Software, File, Folder में Copy कर लेता हैं। जब हम उनको Run करते हैं तो उसके साथ Virus भी Run होकर पूरे सिस्टम में फैल जाता है और इसे संक्रमित कर कम्प्यूटर को नुकसान पहुंचाता हैं। वायरस किन-किन विधियों से फैलता है जानने के लिए देखें—How Virus Spread?

Harmful Effects of Virus

एक बार Computer Virus हमारे कम्प्यूटर में प्रवेश कर जाए तो यह निम्नलिखित प्रकार से हमारे कम्प्यूटर को प्रभावित करता है–

  1. कम्पयूटर की Speed कम कर देना।
  2. कम्प्यूटर को Hang करना।
  3. किसी Software को Run होने से रोकना।
  4. फाइल व फोल्डर को खुलने न देना।
  5. फाइल व फोल्डर का Size बड़ा कर देना।
  6. फाइल व फोल्डर को Delete कर देना।
  7. फाईल का टाईप परिवर्तित कर देना।
  8. फाईल के अंदर का डेटा परिवर्तित कर देना।
  9. स्क्रीन पर बेकार की सूचनाएँ प्रदर्शित करता है।
  10. हार्ड डिस्क को फार्मेट कर देना।
  11. की – बोर्ड के Keys का कार्य बदल देना।
  12. Computer को Start होने से रोकना।
  13. कम्प्यूटर को बार – बार Restart करना।

I-Facts (Interesting facts about Compute Virus)

  1. Virus का पूरा नाम Vital Information Resources Under Seize होता है।
  2. Happy Birthday Joshi को भारत में देखा जाने वाला पहला वायरस प्रोग्राम माना जाता है जो 1990 के वर्ष में देखा गया था।
  3. C-Brain वायरस जो एक Boot Sector Virus था इसे दुनिया का सबसे पहला वायरस प्रोग्राम माना जाता है। इसने सन् 1986 के वर्ष में विश्व भर में कम्प्यूटरों को काफी नुकसान पहुँचाया था। इसके लेखक बासित तथा अमजद नामक दो पाकिस्तानी भाईयो को माना जाता है।
  4. वायरस से कम्प्यूटर सिस्टम की सुरक्षा कैसे की जाती है जानने के लिए देखें—Detection and Prevention of Virus
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