Computer Number System notes in Hindi

Introduction to Decimal, Binary, Octal and Hexadecimal Number Systems in Hindi

कम्प्यूटर में एंट्री किए जाने वाले संख्यात्मक डेटा (Numerical Data) को दर्शाने व उस पर प्रोसेसिंग करने के लिए नम्बर सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। संख्यात्मक डेटा के अंतर्गत टेस्ट के प्राप्तांक, रूपए-पैसे आदि आते है। हम संख्यात्मक डेटा पर गणना के लिए Decimal Number System का प्रयोग करते हैं किन्तु कम्प्यूटर Binary Number System में कार्य करता है। इसलिए कम्प्यूटर हमारे द्वारा एंट्री किए गए सभी संख्यात्मक डेटा को पहले बाईनरी में परिवर्तित करता है फिर अपने मेमोरी में स्टोर कर उस पर प्रोसेसिंग करता है। मुख्यतः नम्बर सिस्टम निम्नलिखित प्रकार के होते है—

Computer Coding System क्या होता है जानने के लिए देखें यह पोस्ट—Computer Coding Systems

  1. Decimal Number System 
  2. Binary Number System 
  3. Octal Number System
  4. Hexadecimal Number System

Decimal Number System

डेसिमल नम्बर सिस्टम हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाला नम्बर सिस्टम है। इस नम्बर सिस्टम का उपयोग गणित, व्यापार आदि सभी जगह किया जाता है। इस नम्बर सिस्टम में 0 से 9 तक के कुल दस अंको का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इस नम्बर सिस्टम का आधार 10 होता है। डेसिमल नम्बर सिस्टम में संख्या का मूल्य अंको के स्थानीय मान पर निर्भर करता है तथा अंको का स्थानीय मान ईकाई, दहाई, सैकड़ा, हजार आदि के क्रम में निकाला जाता है। उदाहरण के लिए डेसिमल नम्बर (4975)10 का मूल्य निम्नलिखित प्रकार से निकालते है—

अंक                          स्थानीय मान           
 5              -            5*1=5
 7              -            7*10=70
 9              -            9*100=900
 4              -            4*1000=4000
  
 अतः संख्या = 5+70+900+4000 = (4975)10 

Binary Number System

बाईनरी नम्बर सिस्टम कम्प्यूटर में उपयोग होने वाला नम्बर सिस्टम है। इस नम्बर सिस्टम का उपयोग कम्प्यूटर अपने सभी प्रकार के प्रोसेसिंग कार्यो के लिए करता है। इस नम्बर सिस्टम में 0 व 1 केवल दो अंको का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इस नम्बर सिस्टम का आधार 2 होता है। यहाँ वास्तव में 0 व 1 कम्प्यूटर के डिजिटल सर्किट में दो वोल्टेज लेवल को दर्शाते है। 0 low voltage (0 volt) तथा 1 high voltage (5 volt) को दर्शाता है। 0 को false तथा 1 को true भी कहते है। उदाहरण के लिए बाईनरी नम्बर (10011)2 का मान दशमलव संख्या पद्धति में (19)10 होगा।

आधुनिक युग में कम्प्यूटर के विभिन्न उपयोग क्या-क्या है जानने के लिए पढ़े यह पोस्ट—Applications and Uses of Computer

Introduction to Decimal Binary Octal and Hexadecimal Number Systems in Hindi

Octal Number System

Octal Number System में 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 इन आठ अंको का प्रयोग संख्याओं को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। इसीलिए इस संख्या पद्धति का आधार 8 होता है। इस नम्बर सिस्टम का विकास प्रोग्रामरो के कार्य को आसान बनाने के लिए किया गया है क्योकि इसे बाईनरी के मुकाबले सरलता से समझा जा सकता है। इसका प्रयोग कई कम्प्यूटर निर्माताओं के द्वारा हार्डवेयर और साफ्टवेयर में किया जाता है। उदाहरण के लिए संख्या (3426)8 एक Octal संख्या को निरूपित करता है जिसका दशमलव पद्धति में मान (1814)10 है।

Hexadecimal Number System

किसी नम्बर सिस्टम में संख्याओं को व्यक्त करने के लिए कितने अंको की जरूरत होती है यह उस नम्बर सिस्टम में अंको की कुल संख्या पर निर्भर करता है। अर्थात् जिस नम्बर सिस्टम में जितने कम अंक होगें संख्याओं को लिखने के लिए उतने ही अधिक अंको की जरूरत पड़ेगी। उदाहरण के लिए बाईनरी नम्बर सिस्टम में संख्याओं को व्यक्त करने के लिए डेसिमल नम्बर सिस्टम के मुकाबले अधिक अंको की जरूरत पड़ती है। इसके साथ ही बाईनरी सिस्टम को समझना थोड़ा कठीन भी होता है। अतः संख्याओं को लिखने के लिए एक और सिस्टम Hexadecimal का प्रयोग किया जाता है। Hexadecimal में संख्याओं को प्रदर्शित करने के लिए 0 से 9 तक के अंको तथा A से F तक के अक्षरों का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार इसमें कुल सोलह अंक होते है इसलिए इसका आधार 16 होता है। उदाहरण के लिए संख्या (5C7F)16 एक Hexadecimal संख्या को निरूपित करता है जिसका दशमलव पद्धति में मान (23679)10 है।

I-Facts (Interesting facts about Numbers Systems)

  1. Number systems को बड़े अर्थो में दो प्रकारो में विभाजित किया जाता है—Positional Number System और Non-Positional Number System
  2. Decimal, Binary, Octal और Hexadecimal ये सभी Positional Number System के अंतर्गत आते है जिसमें अंको का मूल्य उनके Position पर निर्भर करता है।
  3. Non-Positional Number System में संख्याओं को दर्शाने के लिए अंको का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसमें एक ही चित्र या आकृति को दोहराकर अंको को निरूपित किया जाता है। इसका प्रयोग बच्चो को गिनती सीखाने के लिए किया जाता है।
  4. ऐसा कहा जाता है कि Binary Number System का विकास जर्मन गणितज्ञ Gottfried Wilhelm Leibniz ने किया था।
  5. कम्प्यूटर में Port क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है जानने के लिए देखें—Computer Ports and Connectors
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