Utility Software Programs notes in Hindi

What are Utility Software Programs in Hindi

वे साफ्टवेयर जिनका प्रयोग कम्प्यूटर को Maintain करने, इसमें Errors का पता लगाकर इसे ठीक करने तथा इसकी Performance को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है यूटिलिटी साफ्टवेयर कहलाते है। इन्हें Service Programs भी कहा जाता है। बहुत सारे Common Utilities तो आपरेटिंग सिस्टम के साथ ही आते है जो निम्नलिखित है—

Utility Software Programs notes in Hindi

Linker और Loader क्या होते है किसी प्रोग्राम के विकास में इनकी क्या उपयोगिता होती है जानने के लिए देखें—Linker and Loader

Text Editor

Text Editor का प्रयोग Text File को बनाने के लिए किया जाता है। सामान्यतः ये टाईपिंग करने व प्रोग्राम के सोर्स कोड को लिखने के काम आते है। इनकी सहायता से हम किसी भी प्रोग्रामिंग भाषा जैसे—C, C++, HTML, CSS आदि के सोर्स कोड को लिख सकते है। Notepad एक प्रसिद्ध टैक्स्ट एडिटर है जो Windows आपरेटिंग सिस्टम के साथ आता है। इसके अलावा कुछ उन्नत टैक्स्ट एडिटर जैसे—Notepad++, Sublime Text आदि भी होते है जिनमें अलग-अलग प्रोग्रामिंग भाषाओं में कोडिंग करने के लिए बहुत से Features होते है।

File Manager

वे साफ्टवेयर जो कम्प्यूटर में फाईल और फोल्डर को मैनेज करने का कार्य करते है File Manager कहलाते है। इनका कार्य फाईल और फोल्डर बनाना तथा उनको Cut, Copy, Paste, Move आदि करने की सुविधा देना होता है। इनकी सहायता से हम कम्प्यूटर में उपस्थित फाईलों एवं फोल्डरों को देख सकते है तथा उन्हें Search व Sort भी कर सकते है। Windows Explorer एक फाईल मैनेजर है जो विन्डोज आपरेटिंग सिस्टम के साथ आता है।

System Monitor

System Monitor वे साफ्टवेयर है जो हमें हमारे कम्प्यूटर से जुड़े महत्वपूर्ण डिवाईसो जैसे—CPU, RAM, Hard Disk के वर्तमान Performance के बारे में जानकारी प्रदान करते है। उदाहरण के लिए ये बताते है कि CPU का कितना उपयोग हो रहा है, RAM या Disk में कितना स्पेस खाली है, नेटवर्क की स्थिति क्या है आदि। System Monitor हमें ये सभी जानकारी बिलकुल Real Time में प्रदान करते है। Resource Monitor एक सिस्टम मानिटर साफ्टवेयर है जो विन्डोज के साथ आता है।

Disk Cleaner

यह एक ऐसा साफ्टवेयर है जो हमारे कम्प्यूटर के हार्ड डिस्क से अनावश्यक फाईलो को डिलिट करता है। इससे कम्प्यूटर की गति और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इसकी सहायता से हम सभी अनावश्यक फाईलो, अस्थायी फाइलो, डाउनलोड किए गए प्रोग्रामो और रिसायकल बिन की फाईलो आदि को डिलिट कर सकते है। प्रतिमाह एक बार Disk Cleaner को रन करना कम्प्यूटर के लिए अच्छा Maintenance कार्य माना जाता है। इसके लिए हम Disk Cleanup जो कि विन्डोज के साथ आया हुआ Cleaner Utility है का प्रयोग कर सकते है।

Disk Defragmenter

यह एक ऐसा साफ्टवेयर है जो हार्ड डिस्क में अलग-अलग स्थान पर स्टोर फाईल के भागों (Fragments) को एकसाथ एक स्थान पर लाता है। इससे डिस्क स्पेस की बचत होती है और कम्प्यूटर की गति व कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इस प्रकार इसका कार्य Fragments को Defragment करना होता है इसीलिए इसे Defragmenter कहा जाता है। Disk Defragmenter एक Defragmenter Utility है जो विन्डोज के साथ आता है।

Diagnostic

ये वे साफ्टवेयर है जो हमारे कम्प्यूटर में Bugs (Errors) का पता लगाकर उसे ठीक करते है। ये हार्डवेयर व साफ्टवेयर दोनो में ही Bugs का पता लगा सकते है। इनकी सहायता से कोई  साप्टवेयर ठीक से नहीं काम कर रहा हो तो उसे ठीक किया जा सकता है। साथ ही RAM, Disk में कोई गलती है तो उसका भी पता लगाकर सुधारा जा सकता है। Windows Memory Diagnostic एक Diagnostic साफ्टवेयर है जो विन्डोज के साथ आता है।

Antivirus

Antivirus वे साफ्टवेयर है जो हमारे कम्प्यूटर को वायरस से सुरक्षा प्रदान करते है। वायरस ऐसा प्रोग्राम होता है जो हमारे कम्प्यूटर को नुकसान पहुचाता है। एन्टी वायरस हमारे कम्प्यूटर में वायरस को नहीं आने देते है और यदि सिस्टम में पहले से कोई वायरस है तो उसे खोजकर समाप्त करते है। Windows Defender विन्डोस के साथ आने वाला एन्टीवायरस है। इसके अलावा आजकल मार्केट में बहुत सारे एन्टी वायरस प्रोग्राम उपलब्ध है। उदाहरण के लिए Quick Heal, Kaspersky, Norton, Avast आदि जिनकी कीमत सामान्यतः 500 से 1000 तक की होती है।

I-Facts (Interesting facts related to Utility Programs in Hindi)

  1. Compression Utility एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो हार्ड डिस्क में स्टोर Data या Files को Compress करता है अर्थात् उन्हें छोटी आकार की Files में परिवर्तित करता है।
  2. Encryption Utility एक ऐसा प्रोग्राम है जो विशेष Algorithm का प्रयोग करते हुए Data, File, Application आदि को Encrypt करने का कार्य करता है ताकि इन्हें Unauthorized Users से बचाया जा सके।
  3. Backup Utility  एक ऐसा प्रोग्राम है जो हमारे हार्ड डिस्क में स्टोर Data या File की कापी बनाता है। इसकी सहयता से हम अपने डेटा को Disk Failure की स्थिति में होने वाले नुकसान से सुरक्षित रखते है। Backup Manual व Automatic दोनो तरीको से किया जा सकता है।
  4. Synchronization Utility एक ऐसा प्रोग्राम है जो दो Data Sources के मध्य Consistency बनाए रखता है। यह एक Data Source में हुए परिवर्तन के अनुसार दूसरे Data Source को भी अपडेट करते जाता है। यह Auto Backup का ही उदाहरण है।
  5. Debugger क्या होता है किसी साफ्टवेयर के विकास में इसकी क्या भूमिका होती है जानने के लिए देखें—Debugger: A Debugging Tool
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Debugger and Debugging Tools notes in Hindi

What is Debugger and Debugging Tools in Hindi

Debugger एक ऐसा प्रोग्राम है जो किसी अन्य कम्प्यूटर प्रोग्राम में errors का पता लगाता है और उसे ठीक करता है। प्रोग्राम बनाते समय प्रोग्रामर से गलतिया हो जाती है जिन्हें bug कहा जाता है। इन bug का पता लगाकर उसे ठीक करना debug कहलाता है। और जो प्रोग्राम debug करने का कार्य करता है वह debugger कहलाता है।  इसे debugging tool भी कहा जाता है।

Linker और Loader क्या होता है इनका प्रयोग क्यो किया जाता है जानने के लिए देखें—Linker and Loader

वैसे तो हम कोई छोटा प्रोग्राम बनाते है तो उसमें गलतियों को ढूँढ़ना बहुत आसान होता है किन्तु बड़े प्रोग्राम में यह उतना आसान नहीं होता है। इसीलिए यहाँ debugger का प्रयोग किया जाता है। Debugger प्रोग्राम की जाँच करके प्रोग्रामर को बताता है कि इसके किस लाईन में क्या गलती है। साथ ही यह प्रोग्राम के लाईनों को step-by-step भी चेक कर सकता है जिससे हमें प्रोग्राम कब और कहाँ crash होता है इसका पता चल जाता है।

सामान्यतः आजकल text editor, compiler, debugger और साफ्टवेयर बनाने के लिए अन्य जरूरी tools एकसाथ आते है जिन्हें Integrated Development Environment (IDE) साफ्टवेयर कहा जाता है। CodeBlocks, Turbo C++, MS-Visual Studio, Dev C++ आदि इसके उदाहरण है।

Debugger and Debugging Tools notes in Hindi
Fig. Debugger Menu under CodeBlocks

I-Facts (Interesting facts related to Debugger and IDE Software)

  1. Code Blocks एक Free, Open Source और Cross Platform IDE है जिसे Code Block Team ने बनाया है। यह एक से अधिक Compiler को सपोर्ट करता है। उदाहरण के लिए इसमें Clang और GCC Compilers का प्रयोग किया जाता है।
  2. Turbo C++ एक Freeware IDE है जिसे सर्वप्रथम Borland Software Corporation के द्वारा बनाया गया था। यह वर्तमान में Discontinued है किन्तु इसका प्रयोग आज भी किया जाता है।
  3. Vsual Studio माईक्रोसाफ्ट के द्वारा विकसित किया गया एक एक Freemium IDE है। यह एक बहुत ही बड़ा IDE साफ्टवेयर है जिसकी सहयता से न केवल साफ्टवेयर बनाए जा सकते है बल्कि Mobile Apps और Websites भी बनाए जा सकते है।
  4. Dev C++ एक Free IDE Software है जिसका विकास सर्वप्रथम Bloodshed Software के दवारा किया गया था। इसमें MinGW तथा GCC Compilers का प्रयोग किया जाता है।
  5. Utility Software कौन – कौन से होते है और उनके क्या क्या कार्य होते है जानने के लिए देखें—Utility Software: Service Programs
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Linker and Loader notes in Hindi

Linker and Loader notes in Hindi

Compiler क्या है यह कैसे कार्य करता है जानने के लिए देखें—Compiler: A Language Translator Program

किसी छोटे कम्प्यूटर प्रोग्राम को बनाना और कम्प्यूटर पर क्रियान्वित कर वांछित आउटपुट प्राप्त करना Multiple Steps में होने वाली प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया प्रोग्राम के Source Code के लेखन से प्रारंभ होती है। इस दौरान Source Code विभिन्न चरणों जैसे— Compilation, Linking, Loading और Execution से होकर गुजरता है। Compiler का कार्य प्रोग्राम के Source Code को बाईनरी में परिवर्तित करना होता है इसके बाद Linker और Loader की बारी आती है।

Linker एक ऐसा प्रोग्राम है जो कम्पाइलर के द्वारा बनाए गए सभी आबजेक्ट को असेम्बल करके इन्हें एक executable फाईल में परिवर्तित करता है। यह प्रोग्राम के objects व libraries दोनों को लिंक करके एक executable फाईल बनाता है। Executable फाईल ही वास्तविक साफ्टवेयर होता है जिसे कम्प्यूटर समझता है और रन करता है।

Utility Programs क्या होते है इनका प्रयोग करने की आवश्यकता क्यो होती है जानने के लिए देखें—Utility Software: Service Programs

Loader एक ऐसा प्रोग्राम है जो लिंकर के द्वारा बनाए गए executable फाईल या साफ्टवेयर को रन करने के लिए कम्प्यूटर की मेमोरी में लोड करता है। लोड करते समय यह साफ्टवेयर के निर्देशों के लिए मेमोरी एड्रेस प्रदान करता है। मेमोरी में लोड होने के बाद ही प्रोसेसर साफ्टवेयर के निर्देशों को execute कर पाता है। सामान्यतः Loader आपरेटिंग सिस्टम का ही भाग होता है।

Linker and Loader notes in Hindi
Fig. Linking and Loading Process

I-Facts (Interesting facts on Linker and Loader in Hindi)

  1. लिंकर सामान्यतः दो प्रकार का होता है—Linkage Editor और Dynamic Linker.
  2. Linkage Editor एक ऐसा लिंकर होता है जो प्रोग्राम की लोडिंग से पहले Objects व Libraries को लिंक करके Relocatable या Executable File उत्पन्न करता है जबकि Dynamic Linker इसी कार्य को प्राग्राम की लोडिंग के समय Run Time में करता है।
  3. वर्तमान में Program Loading के लिए तीन Approach Absolute Loading, Relocatable Loading और Run Time Loading का प्रयोग किया जाता है।
  4. Absolute Loading में Program को सदैव एक ही मेमोरी लोकेशन में लोड किया जाता है। Relocatable Loading में प्रोग्राम के लिए Actual Address न उत्पन्न कर Relative Address उत्पन्न करता है। Dynamic Loading में प्रोग्राम के Execution के समय Run Time में इसके लिए Absolute Address उत्पन्न किया जाता है।
  5. Debugger क्या होता है इसका प्रयोग क्यो किया जाता है जाननेे के लिए देखें—Debugger: A Debugging Tool
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Difference between Compiler and Interpreter in Hindi

What are some Important Difference between Compiler and Interpreter in Hindi

Compiler एक ऐसा प्रोग्राम हैं जो High Level Language में लिखे गए Program (Source Code) को Machine Language (Binary Code) में Translate करने का कार्य करता है। यह एक बार में ही प्रोग्राम के सभी Statements को Translate करता है और किसी प्रकार की गलती होने पर Error Message प्रदर्शित करता है।

Compiler के बारे में अधिक पढ़ने के लिए यह लेख देेखें—Compiler: A Language Translator Program

Interpreter एक प्रोग्राम हैं जो Compiler की तरह ही High Level Language में लिखे गए Program (Source Code) को Machine Language (Binary Code) में Translate करने का कार्य करता है। किन्तु यह एक बार में एक Statement को Machine Language में Translate करके सीधे रन करता है और किसी प्रकार की गलती होने पर Error Message प्रदर्शित करता है जिसे जब तक सुधारा न जाए Translation का कार्य आगे नहीं बढ़ता है।

Interpreter के बारे में अधिक पढ़ने के लिए यह लेख देेखें—Interpreter: A Language Translator Program

इस प्रकार हमने पढ़ा कि Compiler और Interpreter दोनों का प्रयोग High Level Language में लिखे गए प्रोग्राम के कोड को मशीनी भाषा में अनुवाद करने के लिए किया जाता है। किन्तु इनके कार्य करने के तरीके में बहुत अंतर होता है। साथ ही किसी भाषा के लिए Compiler तो किसी भाषा के लिए Interpreter अधिक उपयुक्त होता है। हम इन दोनों की तुलना निम्नलिखित टेबल के माध्यम से कर सकते है—

I-Facts (Interesting facts about Compilation and Interpretation Process in Hindi)

  1. Compilation Process: Source Code -> Preprocessing -> Compilation -> Linking -> Executable Code -> Loading -> Execution -> Output
  2. Interpretation Process: Source Code -> Parser -> Output
  3. Translation Process के दौरान मुख्यतः निम्नलिखित तीन प्रकार की गलतिया (Errors or Bugs) होती है— Syntax Errors, Execution Errors, Logical Errors.
  4. इसमें से Syntax Errors का पता लगाना सबसे आसान होता है जबकि Logical Errors को ढूँढ़ना सबसे कठीन होता है।
  5. Assembler के बारे में पढ़ने के लिए यह लेख देखें—Assembler: An Assembly Language Translator Program
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Assembler Program notes in Hindi

Assembler Program notes in Hindi

Compiler के बारे में जानने के लिए देखें—Compiler: A Language Translator Program

Assembler एक ऐसा प्रोग्राम है जो Assembly language में लिखे प्रोग्राम को Machine Language में Translate करता है। असेम्बली भाषा में लिखे गए सोर्स कोड को Mnemonic Code कहते है। जैसे- ADD, LDA, STA आदि इसके उदाहरण है। इस प्रकार हम असेम्बलर को एक ऐसा प्रोग्राम भी कह सकते है जो इन निमोनिक कोड को बाईनरी में परिवर्तित करता है। यह Compiler की तरह ही कार्य करता है इसके दो प्रकार के होते है—One Pass Assembler और Two Pass Assembler.

Interpreter के बारे में जानने के लिए देखें—Interpreter: A Language Translator Program

वन पास असेम्बलर एक ही पास में सभी Symbols और Lables को कलेक्ट करके उन्हें असेम्बल करता है। जबकि टू पास असेम्बलर इसी कार्य को दो पास में करता है। यह पहली पास में केवल Symbols और Lables को कलेक्ट करता है और दूसरी पास में उन्हें असेम्बल करता है। इसके अतिरिक्त वन पास असेम्बलर Mnemonics व Pseudocode को स्टोर करने के लिए केवल एक ही टेबल Machine Opcode Table (MOT) का प्रयोग करता है जबकि टू पास असेम्बलर इन दोनों को स्टोर करने के लिए क्रमशः दो टेबल Machine Opcode Table (MOT) व Pseudo Opcode Table (POT) का प्रयोग करता है।

Assembler Program notes in Hindi
Fig. Difference between One Pass and Two Pass Assembler

I-Facts (Interesting facts related to Assembler and Assembly Language in Hindi)

  1. Assembler केवल Assembly भाषा में लिखे गए प्रोग्रामों को Machine भाषा में परिवर्तित करता है।
  2. MOT – Machine Opcode Table तथा POT – Pseudo Opcode Table का संक्षिप्त रूप है।
  3. Assembly Language में लिखे गए प्रोग्राम Machine Language में लिखे गए प्रोग्रामों के बाद सबसे तीव्र गति से क्रियान्वित होने वाले प्रोग्राम होते है।
  4. C व C++ Language में लिखे गए प्रोग्राम Assembly Language के मुकाबले धीमी गति से क्रियान्वित होते है।
  5. Compiler और Interpreter की तुलना करने के लिए देखें—Compiler vs Interpreter
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Interpreter Program notes in Hindi

What is Interpreter Program in Hindi

Compiler क्या होता है यह Interpreter से किस प्रकार भिन्न होता है जानने के लिए देखें—Compiler: A Language Translator Program

Interpreter एक प्रोग्राम हैं जो Compiler की तरह ही High Level Language में लिखे गए Program (Source Code) को Machine Language (Binary Code) में Translate करने का कार्य करता है। किन्तु यह एक बार में एक Statement को Machine Language में Translate करके सीधे रन करता है और किसी प्रकार की गलती होने पर Error Message प्रदर्शित करता है जिसे जब तक सुधारा न जाए Translation का कार्य आगे नहीं बढ़ता है।

Assembler क्या होता है यह कितने प्रकार का होता है जानने के लिए देखें—Assembler: An Assembly Language Translator Program

इस प्रकार यह किसी प्रकार का आबजेक्ट फाईल भी नहीं बनाता है इसीलिए प्रोग्राम को रन करने के लिए सदैव इसकी जरूरत होती है। चूँकि एंटरप्रेटर एक-एक करके स्टेटमेंट को ट्रांस्लेट करता है अतः इसकी गति कम्पाइलर से कम होती है। बहुत सी प्रोग्रामिंग भाषाएँ जैसे—BASIC, HTML, CSS, Java, Java Script, PHP, LISP, Perl, Python आदि में एंटरप्रेटर का प्रयोग किया जाता है।

Interpreter Program notes in Hindi
Fig. Working of Interpreter

I-Facts (Interesting facts related to Interpreter base Languages)

  1. BASIC – Beginners All Purpose Symbolic Instructin Code का संक्षिप्त रूप है। इस भाषा का प्रयोग सरलतापूर्वक प्रोग्रामिंग सीखाने के लिए किया जाता है।
  2. HTML – Hyper Text Markup Language का प्रयोग Website के Webpages के निर्माण के लिए एक आधार भाषा की तरह किया जाता है।
  3. CSS – Cascading Style Sheet का प्रयोग Webpages को सुंदर एवं आकर्षक बनाने के लिए किया जाता है।
  4. Java Script (JS) को Client Side Scripting Language कहा जाता है। इसके प्रयोग से Client कम्प्यूटर में चलने वाले प्रोग्राम लिखे जाते है।
  5. PHP (PHP Hypertext Preprocessor) को Server Side Scripting Language कहा जाता है। इसके प्रयोग से Server कम्प्यूटर में चलने वाले प्रोग्राम लिखे जाते है।
  6. LISP – List Processing का संक्षिप्त रूप है। इस भाषा का प्रयोग Artificial Intelligence में किया जाता है।
  7. Compiler और Interpreter में प्रमुख अंतर कौन-कौन से होते है जानने के लिए देखें—Compiler vs Interpreter
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Compiler Language Translator Program Notes in Hindi

What is Language Translator Program Compiler in Hindi

Interpreter क्या होता है यह Compiler से किस प्रकार भिन्न होता है जानने के लिए देखें—Interpreter: A Language Translator Program

Compiler एक ऐसा प्रोग्राम हैं जो High Level Language में लिखे गए Program (Source Code) को Machine Language (Binary Code) में Translate करने का कार्य करता है। यह एक बार में ही प्रोग्राम के सभी Statements को Translate करता है और किसी प्रकार की गलती होने पर Error Message प्रदर्शित करता है।

एक बार सोर्स फाईल पूरी तरह कम्पाइल हो जाने पर बने बाईनरी फाईल को Object File कहते है। बाद में इसी आबजेक्ट फाईल से executable फाईल बनाया जाता है जो वास्तव में साफ्टवेयर होता है जिसे कम्प्यूटर पर रन किया जा सकता है। चूँकि कम्पाइलर एक ही बार में प्रोग्राम के सभी स्टेटमेंट को ट्रांस्लेट कर सकता है अतः यह बहुत तीव्र गति से कार्य करता है। ज्यादातर प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे—C, C++, Java, Visual Basic आदि में सोर्स कोड को बाईनरी कोड में बदलने के लिए कम्पाइलर का ही प्रयोग किया जाता है।

Assembler क्या होता है यह कितने प्रकार का होता है जानने के लिए देखें—Assembler: An Assembly Language Translator Program

Compiler Language Translator Program Notes in Hindi
Fig. Working of Compiler

I-Facts (Interesting facts related to Compiler in Hindi)

  1. Compiler प्रोग्राम के सभी निर्देशों को एक बार में ही Binary Code  में परिवर्तित करता है। इस दौरान प्रोग्राम के कोड में किसी प्रकार की गलती होने पर इसकी सूचना देता है। इन गलतियो को Bugs कहा जाता है।
  2. Compilation Process के दौरान मुख्यतः निम्नलिखित तीन प्रकार की गलतिया (Errors or Bugs) होती है— Syntax Errors, Execution Errors, Logical Errors.
  3. इसमें से Syntax Errors का पता लगाना सबसे आसान होता है जबकि Logical Errors को ढूँढ़ना सबसे कठीन होता है।
  4. Syntax Errors को Compile Time Errors भी कहा जाता है। ये गलतिया Comma या Semicolon का छूट जाना, Capital या Small का सही प्रयोग न करना, Missspelt आदि के कारण होता है।
  5. Execution Errors को Run Time Errors भी कहा जाता है। Infinite Loop व Divide by Zero इसके उदाहरण है।
  6. Logical Errors को Output Time Errors भी कहा जाता है। इसके कारण गलत आउटपुट आता है।
  7. Compiler और Interpreter में अंतर जानने के लिए देखें—Compiler vs Interpreter
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