Connecting: Networking and Internetworking Devices notes in Hindi

Connecting: Networking and Internetworking Devices notes in Hindi

Connecting Device वे Device होते है जिनका प्रयोग दो अलग-अलग कम्प्यूटरों तथा नेटवर्कों को आपस में Connect करने के लिए किया जाता है। दो अलग-अलग कम्प्यूटरों को आपस में Connect करना Networking कहलाता है तथा दो अलग-अलग नेटवर्कों को आपस में Connect करना Internetworking कहलाता है। इन सभी कार्यो के लिए निम्नलिखित Connecting Devices का प्रयोग किया जाता है—

Connecting Networking and Internetworking Devices notes in Hindi

Network Interface Card (NIC)

NIC एक ऐसा Device होता है जो हमारे कम्प्यूटर को नेटवर्क से जोड़ने का कार्य करता है। यह हमारे कम्प्यूटर के मदरबोर्ड में पूर्व निर्मित होता है। कम्प्यूटर व नेटवर्क के मध्य डेटा भेजने या प्राप्त करने का कार्य NIC की सहायता से ही होता है। प्रत्येक NIC Card का एक Unique Address होता है जिसे MAC Address कहते है। इस Address को कार्ड के निर्माता कम्पनी द्वारा उसके निर्माण के समय दिया जाता है जो उस Device को नेटवर्क में अद्वितीय रूप से पहचानने के काम आता है। NIC को Network Adapter, LAN Adapter या Physical Network Interface भी कहा जाता है। नेटवर्किंग के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Computer Networks and its Types

Network Operating System (NOS)

NOS एक ऐसा Operating System है जो LAN से कम्प्यूटरों एवं अन्य डिवाईसों को जोड़ने का कार्य करता है। LANtastic, Banyan VINES, NetWare, LAN Manager, Open VMS, Windows NT, Windows Server आदि इसके उदाहरण है। इस प्रकार के आपरेटिंग सिस्टम में नेटवर्किंग से संबंधित सारे फिचर्स होते है। इनकी सहायता से हम फाईल, प्रिंटर, डेटाबेस, एप्लीकेशन आदि को Share कर सकते है। साथ ही इसमें नेटवर्क की सुरक्षा से संबंधित फीचर्स भी होते है।

Modem

Modem शब्द दो शब्दों Modulator और Demodulator से मिलकर बना है। यह एक ऐसा Device है जो Analog Signal को Digital Signal में तथा Digital Signal को Analog Signal में परिवर्तित करने का कार्य करता है। हमारे कम्प्यूटर में जो भी डेटा स्टोर होता है वह सब Digital Form में होता है। किन्तु Digital Data किसी Analog Media में Transmit नहीं हो सकते है। इसीलिए इन्हें Sender कम्प्यूटर के साथ उपलब्ध Modem के द्वारा Analog Signal में परिवर्तित करके Transmit किया जाता है। यह क्रिया Modulation कहलाता है। बाद में Receiver कम्प्यूटर के साथ उपलब्ध Modem पुनः इसे Digital Signal में परिवर्तित कम्प्यूटर को भेजता है। यह क्रिया Demodulation कहलाता है।

Hub

Hub एक ऐसा Device है जो किसी नेटवर्क के सभी कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। यह Star Network में Central Controller का कार्य करता है। इसमें बहुत सारे Ports होते है जिससे सभी कम्प्यूटरों को केबल के द्वारा जोड़ दिया जाता है। Hub अपने पास आने वाले सभी Data Packets को बिना किसी परिवर्तन के अपने से जुड़े सभी Devices को Forward कर देता है। Hub भी Passive और Active दो प्रकार के होते है। Passive Hub सभी Data Packets को बिना किसी प्रोसेसिंग के Forward करता है जबकि Active Hub में Data Packets को प्रोसेसिंग करने की भी क्षमता होती है। Active Hub को सामान्यतः Repeater भी कहा जाता है।

Repeater

Repeater एक ऐसा Device है जो किसी नेटवर्क के अलग-अलग भागों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। यह भी Hub की तरह ही होता है किन्तु इसका प्रयोग तब किया जाता है जब नेटवर्क का आकार बड़ा हो जाता है। ऐसी स्थिति में Signals नेटवर्क में प्रयुक्त Media से होकर जाते-जाते बीच में ही कमजोर होने लगते है और उनमें परिवर्तन होने लगता है। इससे बचने के लिए बड़े नेटवर्क को छोट-छोटे भागों में विभाजित कर उन्हें आपस में Repeater की सहायता से जोड़ दिया जाता है। Repeater Signals को प्राप्त कर उन्हें पुनः वास्तविक एवं शक्तिशाली रूप में उत्पन्न करके आगे Forward करता है। इसीलिए Repeater को Regenerator भी कहा जाता है।

Switch

Switch Hub की तरह ही एक ऐसा Device है जो किसी नेटवर्क के सभी कम्प्यूटरों को अपस में जोड़ने का कार्य करता है। Hub की तरह इसमें भी बहुत सारे Ports होते है जिससे सभी कम्प्यूटरों को केबल के द्वारा जोड़ दिया जाता है। किन्तु Switch और Hub के कार्य करने के तरीके में अंतर होता है। Hub अपने पास आने वाले Data Packets को अपने से जुड़े सभी Devices को Forward करता है वही Switch अपने पास आने वाले Data Packets केवल उन Devices को Forward करता है जिनको इसकी जरूरत होती है। इसके लिए Switch अपने से जुड़े सभी Devices के MAC Address का प्रयोग करता है। Switch का प्रयोग करने से नेटवर्क में Data Transfer की गति बढ़ती है और इसके Performance में भी सुधार होता है। Personal Computer के विभिन्न Hardware Parts को जानने के लिए देखें—Parts of Personal Computer (PC)

Bridge

Bridge Repeater की तरह ही एक ऐसा Device है जो किसी नेटवर्क के अलग-अलग भागों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। साथ ही यह एक समान प्रोटोकाल का प्रयोग कर रहे दो अलग-अलग नेटवर्कों को भी आपस में जोड़ सकता है। किन्तु Repeater और Bridge के कार्य करने के तरीके में अंतर होता है। Repeater अपने पास आने वाले Data Packets को पुनः उत्पन्न करके नेटवर्क के सभी भागो में Forward करता है वही Bridge अपने पास आने वाले Data Packets उनके MAC Address के अनुसार नेटवर्क के केवल उन्हीं भागों में  Forward करता है जिनको इसकी जरूरत होती है। इस प्रकार Bridge किसी बड़े नेटवर्क में Data Transfer Rate, Performance और Security में भी सुधार लाता है।

Router

Router एक ऐसा Device है जो एक समान प्रोटोकाल का प्रयोग कर रहे दो अलग-अलग नेटवर्कों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। Repeater और Bridge बहुत ही साधारण डिवाईस होते है जबकि Router एक बहुत ही जटिल डिवाईस होता है। यह विभिन्न नेटवर्कों के कम्प्यूटरों के हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर अलग-अलग होने पर भी उन्हें जोड़ने की क्षमता रखता है। यह Sender की ओर से अपने पास आने वाले सभी Data Packets को उनके IP Address के अनुसार एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में Forward करते रहता है जब तक कि ये Receiver तक नहीं पहुँच जाते है। Router Data Packets को Sender से Receiver तक पहुँचाने के लिए उपलब्ध सभी रास्तों में से सबसे छोटे रास्ते का चुनाव करता है। साथ ही यह बेकार के Data Packets को नष्ट करने तथा Data Traffic को मैनैज करने का भी कार्य करता है।

Gateway

Gateway एक ऐसा Device है जो अलग-अलग प्रकार के प्रोटोकाल का प्रयोग कर रहे दो अलग-अलग नेटवर्कों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। यह भी Router की तरह विभिन्न नेटवर्कों के कम्प्यूटरों के हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर अलग-अलग होने पर उन्हें जोड़ने की क्षमता रखता है। किन्तु यह सभी प्रकार के Connecting Devices में सबसे जटिल डिवाईस होता है। क्योंकि यह अलग-अलग प्रोटोकाल का प्रयोग करने वाले नेटवर्कों के प्रोटोकाल को Convert करने की क्षमता रखता है। इसीलिए Gateway को प्रोटोकाल Converter भी कहा जाता है। सामान्यतः कुछ Router, Firewall व Proxy Server ही इतने शक्तिशाली होते है कि वे Gateway का कार्य करते है। Gateway किसी नेटवर्क का Gate होता है। नेटवर्क से जो भी Data Packet बाहर की ओर जाता है या जो भी Data Packet अंदर की ओर आता है उन्हें Gateway से होकर गुजरना पड़ता है। Gateway आने-जाने वाले सभी Data Packets को Check करता है और उनमें कुछ गड़बड़ी होने पर उन्हें Block करने की भी क्षमता रखता है। कम्प्यूटर में साफ्टवेयर क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है जानने के लिए देखें—Software and its Types

I-Facts (Interesting facts about Networking and Internetworking)

  1. सामान्यतः Repeater व Bridge नेटवर्किंग डिवाईस कहलाते है जबकि Router व Gateway इंटरनेटवर्किंग डिवाईस कहलाते है।
  2. Node: कम्प्यूटर नेटवर्क में Node एक Redistribution Device या Terminal Device होता है जो सूचनाओं को नेटवर्क में Send, Receive या Forward करने की क्षमता रखता है। यह दो प्रकार का होता है—DCE और DTE.
  3. DCE – DCE को Data Communication Equipment कहा जाता है। यह एक ऐसा Device होता है जो अपने पास आने वाले Data को नेटवर्क में आगे भेजने का कार्य करता है। उदाहरण—Modem, Router, Hub, Bridge, Switch आदि।
  4. DTE – DTE को Data Terminal Equipment कहा जाता है। ये ऐसे डिवाईस है जो नेटवर्क में भेजे जा रहे डेटा के लिए Source या Target होते है। अर्थात् ये डेटा को भेजते या प्राप्त करते है। उदाहरण—Computer, Server, Workstation, Printer,  Mobile, Telephone, Fax Machine आदि।
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I am a computer teacher, programmer and web developer