Characteristics of Monitor in Hindi

 

मानीटर की बहुत सारी विशेषताएँ होती है जिनके आधार पर इसकी गुणवत्ता को परखा जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है—

 

Characteristics of Monitor in Hindi

 

Size

मानीटर के दो कोनो के बीच के Diagonal दूरी को ही इसका Size कहते है। इसे Inch में मापा जाता है जो सामान्यतः 14 Inch से लेकर 40 Inch तक का होता है।

 

Aspect Ratio

मानीटर के चौड़ाई और ऊचाई के अनुपात को Aspect Ratio कहा जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी मानीटर की चौड़ाई 20 Inch और ऊचाई 15 Inch है तो इसका Aspect Ratio 20:15 या 4:3 होगा।

 

Resolution

Resolution मानीटर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है। यह मानीटर स्क्रीन पर दिखाई दे रहे आउटपुट की स्पष्टता (Sharpness) को बताता है। हम जानते है कि मानीटर स्क्रीन पर आउटपुट का निर्माण इसके छोटे-छोटे Dots के चमकने से होता है जिन्हें Pixels कहा जाता है। Pixel का पूरा नाम Picture Element होता है। स्क्रीन पर इकाई क्षेत्रफल में इन Dots (Pixels) की संख्या ही Resolution कहलाता है जिसे Dot Per Inch (DPI) में मापा जाता है।   इस प्रकार स्क्रीन पर जितने अधिक Pixels होते है इसका Resolution भी उतना ही अधिक होता है और आउटपुट का क्वालिटि भी उतनी ही बेहतर होती है। उदाहरण के लिए यदि किसी मानीटर का Display Resolution 1920×1080 है तो इसका अर्थ है कि स्क्रीन के एक Row में 1920 Pixels तथा एक Column में 1080 Pixels है।

 

Refresh Rate

मानीटर स्क्रीन पर हमें जो कुछ भी आउटपुट दिखाई देता है व स्थायी रूप में दिखाई देता है। किन्तु वास्तव में ऐसा नहीं होता है। मानीटर स्क्रीन पर आउटपुट एक Image के रूप में सतत् बनते व मिटते रहता है जिसे मानीटर का Refresh होना कहा जाता है। इस प्रकार इकाई समय में मानीटर जितनी बार Refresh होता है उसे उसका Refresh Rate कहते है। Refresh की प्रक्रिया इतनी तेजी से होता है कि हमारी आँख इसे पकड़ नहीं पाता है और हमें आउटपुट स्थायी प्रतीत होता है। हमारी आँखे मानीटर को Refresh होता हुआ तब देख पाती है जब इसका Refresh Rate बहुत कम होता है या जब हम इसे Refresh करते है। मानीटर के Refresh Rate को Hertz में मापा जाता है।

 

Dot Pitch

Dot Pitch भी मानीटर के आउटपुट की क्वालिटि को मापने की एक तकनीक है। इसी Pixel Pitch या Phosphor Pitch भी कहा जाता है। इसका अर्थ अलग-अलग तरह के मानीटर में अलग-अलग होता है। CRT मानीटर में यह Shadow Mask के Holes के मध्य दूरी को बताता है जबकि LCD मानीटर में यह स्क्रीन पर दो एक ही रंग के Pixels के मध्य दूरी को प्रदर्शित करता है। Dot Pitch का मापन Millimeter में किया जाता है। मानीटर का Dot Pitch जितना कम होता है इसकी क्वालिटि उतनी ही अधिक होती है। वर्तमान में मानीटर का Dot Pitch समान्यतः 0.25mm से 0.31mm तक होता है।

 

Bit Mapping

Bitmap एक Text या Image होता है जो बहुत सारे Pixels से मिलकर बना होता है। हम जानते है कि मानीटर का स्क्रीन बहुत छोटे-छोटे Dots से मिलकर बनता है जिन्हें Pixels कहते है। किसी एक Pixel कि स्क्रीन पर प्रदर्शित करने के लिए कितने Bits की जरूरत है यह यह उस मानीटर के द्वारा Display कर सकने वाले रंगो की कुल संख्या पर निर्भर करता है। अर्थात् मानीटर जितने अधिक रंगो में आउटपुट को Display करता है उसे उतने ही अधिक Bits की आवश्यकता इन रंगो को दिखाने के लिए होती है। इस प्रकार Bit Mapping एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मेमोरी में स्टोर Bits Information के अनुसार कम्प्यूटर मानीटर के स्क्रीन पर Pixels को सक्रिय करके Text या Image को विभिन्न रंगो में प्रदर्शित करता है। सबसे सरल Bitmap Monochrome होता है जिसे मानीटर पर दिखाने के लिए कम्प्यूटर को केवल एक Bit (0 for Black & 1 for White) Per Pixel की आवश्यकता होती है।

 

Interlacing & Non-Interlacing

कम्प्यूटर के मानीटर में आउटपुट का निर्माण लगातार बनती और मिटती हुई Image के रूप में होता है। ये इमेज Electron Beam के स्क्रीन पर टकराने से निर्मित होती है। Electron Beam स्क्रीन पर उपर से नीचे की ओर Row Wise इमेज का निर्माण करती है। Interlaced Monitor एक ऐसा मानीटर होता है जिसमें इमेज का निर्माण दो Pass में होता है। अर्थात् इसमें Electron Beam Alternate Rows को Fill करते हुए दो Pass में इमेज का निर्माण करती है। इसके विपरीत Non-Interlaced Monitor इस कार्य को एक ही Pass में करता है। Interlace मानीटर को बनाना आसान होता है और यह सस्ता भी होता है। किन्तु यह Non-Interlace मानीटर के मुकाबले उतना अच्छा नहीं होता है क्योंकि इसमें इमेज बनाने की प्रक्रिया लम्बी होती है इसीलिए Flickering की समस्या होती है।

 

 

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