Assembler Program notes in Hindi

Assembler एक ऐसा प्रोग्राम है जो Assembly language में लिखे प्रोग्राम को Machine Language में Translate करता है। असेम्बली भाषा में लिखे गए सोर्स कोड को Mnemonic Code कहते है। जैसे- ADD, LDA, STA आदि इसके उदाहरण है। इस प्रकार हम असेम्बलर को एक ऐसा प्रोग्राम भी कह सकते है जो इन निमोनिक कोड को बाईनरी में परिवर्तित करता है। यह Compiler की तरह ही कार्य करता है इसके दो प्रकार के होते है—One Pass Assembler और Two Pass Assembler. वन पास असेम्बलर एक ही पास में सभी Symbols और Lables को कलेक्ट करके उन्हें असेम्बल करता है। जबकि टू पास असेम्बलर इसी कार्य को दो पास में करता है। यह पहली पास में केवल Symbols और Lables को कलेक्ट करता है और दूसरी पास में उन्हें असेम्बल करता है। इसके अतिरिक्त वन पास असेम्बलर Mnemonics व Pseudocode को स्टोर करने के लिए केवल एक ही टेबल Machine Opcode Table (MOT) का प्रयोग करता है जबकि टू पास असेम्बलर इन दोनों को स्टोर करने के लिए क्रमशः दो टेबल Machine Opcode Table (MOT) व Pseudo Opcode Table (POT) का प्रयोग करता है।

Assembler Program notes in Hindi
Fig. Difference between One Pass and Two Pass Assembler
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Interpreter Program notes in Hindi

Interpreter एक प्रोग्राम हैं जो Compiler की तरह ही High Level Language में लिखे गए Program (Source Code) को Machine Language (Binary Code) में Translate करने का कार्य करता है। किन्तु यह एक बार में एक Statement को Machine Language में Translate करके सीधे रन करता है और किसी प्रकार की गलती होने पर Error Message प्रदर्शित करता है जिसे जब तक सुधारा न जाए Translation का कार्य आगे नहीं बढ़ता है। इस प्रकार यह किसी प्रकार का आबजेक्ट फाईल भी नहीं बनाता है इसीलिए प्रोग्राम को रन करने के लिए सदैव इसकी जरूरत होती है। चूँकि एंटरप्रेटर एक-एक करके स्टेटमेंट को ट्रांस्लेट करता है अतः इसकी गति कम्पाइलर से कम होती है। बहुत सी प्रोग्रामिंग भाषाएँ जैसे—BASIC, HTML, CSS, Java, Java Script, PHP, LISP, Perl, Python आदि में एंटरप्रेटर का प्रयोग किया जाता है।

Interpreter Program notes in Hindi
Fig. Working of Interpreter
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Compiler Language Translator Program Notes in Hindi

Compiler एक ऐसा प्रोग्राम हैं जो High Level Language में लिखे गए Program (Source Code) को Machine Language (Binary Code) में Translate करने का कार्य करता है। यह एक बार में ही प्रोग्राम के सभी Statements को Translate करता है और किसी प्रकार की गलती होने पर Error Message प्रदर्शित करता है। एक बार सोर्स फाईल पूरी तरह कम्पाइल हो जाने पर बने बाईनरी फाईल को Object File कहते है। बाद में इसी आबजेक्ट फाईल से executable फाईल बनाया जाता है जो वास्तव में साफ्टवेयर होता है जिसे कम्प्यूटर पर रन किया जा सकता है। चूँकि कम्पाइलर एक ही बार में प्रोग्राम के सभी स्टेटमेंट को ट्रांस्लेट कर सकता है अतः यह बहुत तीव्र गति से कार्य करता है। ज्यादातर प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे—C, C++, Java, Visual Basic आदि में सोर्स कोड को बाईनरी कोड में बदलने के लिए कम्पाइलर का ही प्रयोग किया जाता है।

Compiler Language Translator Program Notes in Hindi
Fig. Working of Compiler
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Firmware Program notes in Hindi

Firmware एक विशेष प्रकार का प्रोग्राम या साफ्टवेयर होता है जो कम्प्यूटर के अंदर Non-Volatile मेमोरी में स्टोर रहता है। फर्मवेयर न केवल कम्प्यूटरों में प्रयोग किया जाता है बल्कि यह सभी प्रकार के इलेक्ट्रानिक डिवाइसो में भी पाया जाता है। जैसे— Keyboard, Mouse, Printer, CD/DVD Drives, Hard Disk Drive, Video Cards, TV, Washing Machine, Digital Camera आदि में भी फर्मवेयर होता है। वास्तव में फर्मवेयर मेमोरी और साफ्टवेयर दोनों को एकसाथ कहा जाता है जिसे इन डिवाईसों में इसके निर्माण के समय ही डाल दिया जाता है। फर्मवेयर में ये डिवाईस दूसरे डिवाईसो से कैसे संचार करेंगे इसके लिए आवश्यक निर्देश होते है। उदाहरण के लिए कम्प्यूटर में ROM मेमोरी में BIOS फर्मवेयर होता है जो विभिन्न डिवाइसो के Configurations & Settings को स्टोर करता है और कम्प्यूटर को स्टार्ट करने में मदद करता है। पहले फर्मवेयर को रखने के लिए ROM का प्रयोग किया जाता था किन्तु वर्तमान में फर्मवेयर EEPROM मेमोरी में स्टोर होता है जो एक Flash Memory है।

Firmware Program notes in Hindi
Fig. Firmware
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Device Driver notes in Hindi

Device Driver एक ऐसा साफ्टवेयर होता है जो किसी विशेष डिवाइस को कम्प्यूटर से जोड़ने का कार्य करता है। जब भी हमें कम्प्यूटर में किसी डिवाइस को कनेक्ट करके प्रयोग करना होता है तो इसके लिए इसके ड्राईवर साफ्टवेयर को Install करना पड़ता है अन्यथा हम उस डिवाइस का प्रयोग नहीं कर सकते है। कुछ जरूरी डिवाईस जैसे—मॉनीटर, की-बोर्ड, माउस, हेडफोन, पेन ड्राइव आदि के ड्राइवर आपरेटिंग सिस्टम के साथ ही आते है। इसलिए हमें इनका प्रयोग करने के लिए किसी प्रकार के ड्राईवर को Install नहीं करना पड़ता है। किन्तु कुछ अन्य डिवाइस जैसे—प्रिंटर, स्केनर, स्पीकर आदि को प्रयोग करने के लिए इनका ड्राईवर Install करना जरूरी होता है।

Device Driver notes in Hindi
Fig. Communication between OS and Devices

डिवाईस ड्राईवर डिवाईस और आपरेटिंग सिस्टम के मध्य Translator का कार्य करता है। इसकी सहासता से ही हम उस हार्डवेयर डिवाईस से Interact कर पाते है। यह आपरेटिंग सिस्टम के Input/Output निर्देशों को डिवाईस के समझने योग्य निर्देशों में परिवर्तित करता है। कम्प्यूटर में सामान्य डिवाईस ड्राईवर के अतिरिक्त Virtual Device Drivers (VxD) का प्रयोग भी किया जाता है जो Applications और Devices के मध्य सीधे ही संचार स्थापित करता है। इसकी सहायता से एक से अधिक Applications एक ही समय में एक ही डिवाईस को बिना किसी बाधा के Access करते है।

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Headphone Earphone Earbud Headset notes in Hindi

Headphone भी स्पीकर की तरह ही एक ऐसा डिवाईस है जो ध्वनि तरंगो के रूप में आउटपुट देता है। इसे Earphone या Earbud के नाम से भी जाना जाता है और कान में लगाकर प्रयोग किया जाता है। इसमें कान के नजदीक ही दो छोटे-छोटे स्पीकर लगे होता है जिन्हें Transducer कहा जाता है। Transducer मिडिया प्लेयर से प्राप्त विद्युत सिग्नल को ध्वनि तरंगो में बदलता है।

Headphone स्पीकर के मुकाबले बहुत ही पोर्टेबल होते है जिन्हें हम अपनी जेब में रखकर कहीं भी ले जा सकते है। इसका प्रयोग सामान्यतः स्मार्टफोन में संगीत सुनने में किया जाता है किन्तु डेस्कटाप, लैपटाप में भी इसका प्रयोग कर सकते है। आजकल हेडफोन में स्पीकर के साथ माईक्रोफोन को भी समाहित कर दिया गया है जिसे Headset कहा जाता है। हम इसकी सहायता से फोन या कम्प्यूटर पर बात भी कर सकते है।

Fig. Headphone
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Speaker output device notes in Hindi

Speaker एक Audio आउटपुट डिवाइस है। यह कम्प्यूटर के Hard Disk,  CD, DVD, Pen Drive आदि में स्टोर Audio Files जैसे—गाने या रिकार्ड की गयी आवाज आदि को हमें सुनाने का कार्य करता है। सारे Audio Files कम्प्यूटर में डिजिटल रूप में स्टोर होते है जिन्हें Sound Card के द्वारा पहले विद्युत सिग्नल में बदला जाता है फिर स्पीकर को भेज दिया जाता है। फिर स्पीकर साउंड कार्ड से उत्पन्न विद्युत सिग्नलों को प्राप्त कर इसे ध्वनि तरंगो में बदलता है।

स्पीकर का प्रयोग मुख्यतः संगीत सुनने, मूवी देखने विडियो गेम खेलने, आडियो-विडियो काल करने आदि के लिए किया जाता है। कम्प्यूटर में इन सभी मल्टीमीडिया का प्रयोग करने के लिए स्पीकर का होना अनिवार्य होता है। हम बिना स्पीकर के मल्टीमीडिया का आनंद नहीं ले सकते है। इन सबके अतिरिक्त Speech Synthesis के लिए भी कम्प्यूटर में स्पीकर का होना जरूरी होता है। Speech Synthesis एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कम्प्यूटर में स्टोर Text को ध्वनि में बदला जाता है।

Speaker output device notes in Hindi
Fig. Speaker
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Plotter and its types notes in Hindi

Plotter भी प्रिंटर की तरह ही एक हार्डकापी आउटपुट डिवाइस हैं। इसका प्रयोग CAD, CAM, Civil Engineering आदि में किया जाता है। इसकी सहायता से बड़े Drawing, Chart, Graph, Map आदि को प्रिंट किया जाता हैं। प्लाटर और प्रिंटर के प्रिंट करने के तरीके में यह अंतर होता है कि प्रिंटर पेपर पर आउटपुट को Dots के रूप में प्रिंट करता है जबकि प्लाटर पेपर पर आउटपुट को लगातार Lines बनाकर Draw करता है। यह किसी आकृति को Inch Per Seconds (IPS) की गति से प्लॉट करता हैं। प्लाटर निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं—

1 Drum Pen Plotter

Drum Pen Plotter या Roller Plotter में एक ड्रम होता है जिसकी सतह पर पेपर लिपटा हुआ होता है। साथ ही इसमें एक पेन होता है जो पेपर पर आकृति बनाने का कार्य करता हैं। ड्रम की सतह पर चढ़ा हुआ पेपर धीरे-धीरे खिसकता है और पेन एक कलाकार की तरह Left-Right घूमते हुए इस पर आकृति बनाते जाता है। Drum Pen Plotter में Fiber Tipped pen का प्रयोग होता है और यदि उच्च क्वालिटी आउटपुट की आवश्यकता हो तो Technical Drafting Pen का प्रयोग किया जाता हैं। रंगीन प्लॉटर में सामान्यतः चार या चार से अधिक पेन होते हैं।

2 Flat Bed Plotter

Flat Bed Plotter या Table Plotter में एक बड़ा समतल सतह होता है जिसमें पेपर को रखा जाता है। इसमें एक भुजा में पेन लगा होता है जो कागज पर Horizontal – Vertical घूमते हुए आकृति बनाता है। इस प्रकार इसमें प्लाटिंग के दौरान कागज स्थिर रहता है। Flat Bed Plotter का प्रयोग एक निर्धारित आकार के पेपर पर छपाई करने के लिए ही किया जा सकता है क्यकिं इसकी सतह का आकार सीमित होता है।

Plotter notes in Hindi
Fig. Plotter
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Thermal Printers notes in Hindi

Thermal Printer एक Non-Impact Printer है जिसमें प्रिंटिंग का कार्य उष्मीय प्रभाव के द्वारा किया जाता है। इसके लिए एक विशेष प्रकार के पेपर का प्रयोग किया जाता है जिसे थर्मल पेपर कहा जाता है जो ताप संवेदी होता है। थर्मल प्रिंटर में भी दो प्रकार की तकनीक Direct Thermal और Thermal Transfer प्रयोग में लायी जाती है।

Thermal Printers notes in Hindi
Fig. Thermal Printer (POS Machine)

Direct Thermal Printing में एक बिजली द्वारा गरम किया गया पिन होता है जो कागज पर आउटपुट का निर्माण करता है। जब यह पिन कागज से टकराता है तो कागज भी गर्म हो जाता है और उसकी कोटिंग काली हो जाती है जिससे आउटपुट का निर्माण होता है। यह बहुत सस्ता होता है और इसमें किसी प्रकार का इंक या कर्ट्रेज आदि का प्रयोग भी नहीं किया जाता है। किन्तु इस प्रिंटिंग विधि के द्वारा उत्पन्न आउटपुट बहुत ही संवेदनशील होता है और कुछ समय पश्चात् ही मिटने लग जाता है।

इसीलिए अधिक टिकाउ आउटपुट प्राप्त करने के लिए आजकल Thermal Transfer Printing का उपयोग किया जाता है। इस विधि में रिबन कर्ट्रेज का प्रयोग किया जाता है जिसमें विशेष प्रकार का Waxy Material होता है। इसमें प्रयुक्त पिन ताप संवेदी रिबन को ताप देकर गर्म करता है। इससे कार्ट्रेज का Waxy Meterial पिघलने लगता है। इसके बाद रिबन कागज के संपर्क में आता है और उसे गरम कर उस पर पिघलता हुआ Waxy Metrial डाल देता है जिससे आउटपुट का निर्माण होता है। इस प्रिंटिंग विधि को Wax Thermal Transfer भी कहा जाता है।

चूकिं थर्मल प्रिंटर द्वारा प्राप्त आउटपुट बहुत जल्दी मिटने लगता है इसीलिए इसका ऐसे स्थानों पर किया जाता है जहाँ प्रिंट किए गए डाक्यूमेंट को अधिक समय तक नहीं रखना होता है। उदाहरण के लिए Banking, Retail, Railway, Airline आदि में Receipt, Ticket प्रिंट करने के लिए थर्मल प्रिंटर का प्रयोग किया जाता है। इन स्थानों पर लगे POS, Cash Register, ATM आदि मशीनों में थर्मल प्रिंटर होता है।

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Laser Printers notes in Hindi

Laser Printer एक Non Impact प्रिंटर हैं जो Photocopy/Xerox मशीन के सिद्धांत पर कार्य करता है। इस प्रिंटर में ऐसा Cartridge प्रयोग किया जाता है जिसके अंदर सुखी स्याही पाउडर होता हैं जिसे Toner कहते है। साथ ही इसमें लेजर किरण उत्पन्न करने वाला एक लेजर स्रोत और एक धानावेशित फोटोसंवेदी ड्रम होता है। लेजर स्रोत से उत्पन्न लेजर किरण दर्पणों से परावर्तित होकर धनावेशित फोटोसंवेदी ड्रम से टकराता है। लेजर किरण ड्रम के जिस-जिस भाग से टकराता है वहा के धनावेश को मिटाकर ऋणावेश में बदल देता है और इस प्रकार ड्रम में पूरे पेज में जो कुछ प्रिंट होना है उसका इमेज तैयार हो जाता है।

Laser Printers notes in Hindi
Fig. Laser Printer

जब यह ड्रम घूमता है तो इसके ऋणावेशित स्थान पर धनावेशित टोनर चिपक जाता है। इसके बाद प्रिंटर कागज को खींचता है और उसे धनावेशित कर कर देता है। इस प्रकार जब पेपर ड्रम के करीब से गुजरता है तो ऋणावेशित टोनर कागज पर स्थानान्तरित हो जाता है जिससे आउटपुट कागज पर छप जाता है। यह आउटपुट भी अस्थायी होता है जिसे स्थायी रूप से कागज पर छापने के लिए काजग को एक गरम रोलर से गुजारा जाता है।

सामान्यतः लेजर प्रिंटर में अपना खुद का Microprocessor, RAM तथा ROM होता है। इसके ROM में प्रिंटिंग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रोग्राम लोड होते है। लेजर प्रिंटर के छपाई की क्वालिटी सबसे अच्छी होती है। यह 300 से 1200 DPI Resolution में छपाई करता है तथा इसकी गति 1-20 पेज प्रति मिनट की होती है। इसका प्रयोग बड़ी मात्रा में छपाई के लिए किया जा सकता है। साथ ही इसका प्रयोग Offset Printer की Master Copy छापने में भी होता है। किन्तु यह रंगीन प्रिंटिंग उतने अच्छे से नहीं कर पाता है साथ ही यह बहुत महंगा व भारी होता है।

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