MS DOS Booting Process notes in Hindi

Explain Booting Process of MS DOS in Hindi

कम्प्यूटर को Start एवं Restart करना Booting कहलाता है। बंद पड़े कम्प्यूटर को स्टार्ट करना Cold Booting तथा पहले से चालू कम्प्यूटर को रिस्टार्ट करना Warm Booting कहलाता है। जब हम कम्प्यूटर का पावर बटन आन करते है तो ROM Memory में स्टोर प्रोग्राम BIOS (Basic Input Output System) अपने आप Execute (Run) हो जाता है। यह प्रोग्राम सभी Devices को Check करता है जिसे POST (Power On Self Test) कहते है।

MS-DOS आपरेटिंग सिस्टम के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Microsoft Disk Operating System (MS DOS)

यदि सभी डिवाईस ठीक तरह से कार्य कर रहे होते है तो यह  MS-DOS को External Storage Device (Hard Disk) से Internal Memory Device (RAM) में लोड करता है। इस प्रक्रिया को Booting Process कहा जाता है। सफलातापूर्वक Booting हो जाने के बाद हमें DOS Command Prompt ( C:\> ) दिखायी देता है और हमारा कम्प्यूटर कार्य करने के लिए तैयार हो जाता है। MS-DOS के Booting Process को निम्नलिखित Steps से समझा जा सकता है—

  1. BIOS Initialization: इस चरण में BIOS Firmware कम्प्यूटर सिस्टम से जुड़े हार्डवेयर डिवाइसों की पहचान करता है और उन्हें प्रारंभ करता है।
  2. POST: इस चरण में BIOS आपरेटिंग सिस्टम के लोडिंग के लिए Disk की पहचान करता है तथा Boot Sector में स्थित MBR को पढ़ता है।
  3. MBR Program Data Area में स्टोर दो फाईलों IO.SYS व MSDOS.SYS को ढूँढ़कर इसे मेमोरी में लोड करता है इसके बाद कम्प्यूटर के द्वारा CONFIG.SYS फाईल को लोड किया जाता है।
  4. Booting के अंतिम चरण में COMMAND.COM नामक फाईल को मेमोरी में लोड किया जाता है जिसमें DOS के सभी Internal Commands स्टोर होते है। इसके बाद AUTOEXEC.BAT फाईल स्वतः ही Execute हो जाता है और हमारा कम्प्यूटर पूरी तरह से चालू हो जाता है।
Booting Process notes in Hindi
Fig. Booting Process

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS Booting Process in Hindi)

  1. POST – Power On Self Test, BIOS – Basic Input Output System, MBR – Master Boot Records
  2. Boot Sequence: यह उन Operations का समूह होता है जिन्हें कम्प्यूटर तब Perform करता है जब कम्प्यूटर स्टार्ट होता है।
  3. Bootstrap Loader: यह आपरेटिंग सिस्टम को स्टार्ट करने के लिए आवश्यक अन्य साफ्टवेयर को मेमोरी में लोड करता है।
  4. Master Boot Record (MBR): Hard Disk के सबसे पहले Sector में स्टोर सूचना होता है जो बताता है कि आपरेटिंग सिस्टम डिस्क में कहाँ स्थित है और इसे किस तरह मेमोरी में लोड किया जा सकता है। Master Boot Record को Master Partition Table भी कहा जाता है।
  5. Warm Reboot के लिए Keyboard Shortcut Ctrl+Alt+Del का प्रयोग किया जाता है।
  6. Cold Booting में कम्प्यूटर के हार्डवेयर पार्ट्स ठंडे होते है जबकि Warm Booting में कम्प्यूटर पहले से ही चालू होता है अतः इसके हार्डवेयर पार्ट्स गरम होते है इसीलिए इसका नाम Warm Booting है।
  7. आपरेटिंग सिस्टम क्या होता है इसके बारे में अधिक जानने के लिए देखें—OS: Operating System Software
Share it to:

Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

What is MS DOS in Hindi

MS-Windows क्या होता है Windows और DOS में क्या अंतर होता है जानने के लिए देखें—Introduction to MS-Windows

Microsoft Disk Operating System (MS-DOS) एक आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है Microsoft कम्पनी के द्वारा बनाया गया है। यह CLI अर्थात् Command Line Interface पर आधारित आपरेटिंग सिस्टम साफ्टवेयर है जिसमें सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है। इसे Disk Operating System इसलिए कहा जाता है क्योकिं यह कम्प्यूटर के Hard Disk को नियंत्रित करता है और अधिकतर Disk से संबंधित Input/Output का कार्य करता है। MS-DOS हमारे Hard Disk को मुख्यतः निम्नलिखित दो भागों में विभाजित करता है—System Area और Data Area.

Microsoft Disk Operating System MS DOS notes in Hindi

System Area वह भाग होता है जिसमें हमारे डिस्क के नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएँ होती है तथा Data Area वह भाग होता है जहाँ यूजर का डेटा स्टोर होता है। System Area आगे तीन भागों Boot Record, File Allocation Table (FAT) व Root Directory में विभाजित होता है। Boot Record Disk का सबसे पहला भाग होता है जहा DOS को चालू करने सें संबंधित जानकारी स्टोर होता है। File Allocation Table (FAT) में हार्ड डिस्क के Data Area को नियंत्रण करने से संबंधित जानकारी संग्रहीत रहता है। Root Directory कम्प्यूटर सिस्टम का सबसे प्रमुख File Directory होता है जिसे Backslash ( \ ) से सूचित किया जाता है।

I-Facts (Interesting facts related to MS DOS in Hindi)

  1. Interface के आधार पर Operating System मुख्यतः दो प्रकार के होते है—CLI और GUI.
  2. CLI – Command Line Interface आपरेटिंग सिस्टम में सारे कार्य Keyboard से Command Type करके किया जाता है।
  3. GUI – Graphical User Interface आपरेटिंग सिस्टम में कार्य करने के लिए Graphics और Mouse का प्रयोग किया जाता है।
  4. DOS को CUI (Character User Interface) आपरेटिंग सिस्टम भी कहा जाता है।
  5. Microsoft से पहले International Business Machines (IBM) ने Personal Computer Disk Operating System (PC-DOS) नाम से सन् 1981 में एक आपरेटिंग सिस्टम बनाया था।
  6. MS-DOS का पहले Version सन् 1981 में रिलिज किया गया था जिसका नाम MS-DOS 1.0 था। इसका अंतिम Version MS-DOS 6.22 था जिसे सन् 1994 में रिलिज किया गया था। इसके बाद से DOS को Windows के साथ Accessories में Command Prompt के नाम से जोड़ दिया गया।
Share it to:

Access Specifiers Modifiers or Visibility Levels in C++ in Hindi

What are Access Specifiers or Visibility Levels in C++ in Hindi

C++ में Class और Object क्या होता है इनका प्रोग्राम कैसे लिखते है जानने के लिए देखें—Class and Object

C++ में Access specifiers का प्रयोग class के members के लिए access permission निर्धारित करने के लिए किया जाता हैं। इसमें private, public व protected ये तीन तरह के access modifier होते हैं। इन तीनों keywords का प्रयोग करके ही हम class के members को private, public व protected declare करते है। इस प्रकार access specifier यह निर्धारित करते हैं कि class के members को किसी बाहरी function के द्वारा access किया जा सकता हैं कि नहीं। Access specifiers को access modifiers या visibility levels भी कहा जाता हैं।

  1. Private access specifier
  2. Protected access specifier
  3. Public access specifier
Access Specifiers Modifiers or Visibility Levels in C++ in Hindi

Private access specifier

Private access specifier के अंर्तगत declare किए गए members को केवल उसी class के functions के द्वारा ही access किया जा सकता है। ये किसी बाहरी function के access से सुरक्षित होते हैं। इसके अंतर्गत declare किया गया डेटा किसी बाहरी function से पूर्णतः छुपा हुआ व सुरक्षित रहता है।

Protected access specifier

Protected  access specifier के अंर्तगत declare किए गए members को भी बाहरी functions के द्वारा access नहीं किया जा सकता किन्तु इसके immediate derived class के function इन्हें access कर सकते हैं। इसमें डेटा private से कम किन्तु public से अधिक छुपा हुआ रहता है।

Public access specifier

Public access specifier के अंर्तगत declare किए गए members को किसी भी बाहरी class के functions के द्वारा access किया जा सकता हैं। इसलिए इसमें सामान्यतः functions को ही declare किया जाता है तथा data को private एवं protected में declare किया जाता हैं। इसमें डेटा बाहरी functions से छुपा हुआ नहीं रहता है।

Object Oriented Programmings (OOPs) के विभिन्न Concepts को जानने के लिए देखिए हमारा यह पोस्ट—Concepts of OOP

Share it to:

Computer Number System notes in Hindi

Introduction to Decimal, Binary, Octal and Hexadecimal Number Systems in Hindi

कम्प्यूटर में एंट्री किए जाने वाले संख्यात्मक डेटा (Numerical Data) को दर्शाने व उस पर प्रोसेसिंग करने के लिए नम्बर सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। संख्यात्मक डेटा के अंतर्गत टेस्ट के प्राप्तांक, रूपए-पैसे आदि आते है। हम संख्यात्मक डेटा पर गणना के लिए Decimal Number System का प्रयोग करते हैं किन्तु कम्प्यूटर Binary Number System में कार्य करता है। इसलिए कम्प्यूटर हमारे द्वारा एंट्री किए गए सभी संख्यात्मक डेटा को पहले बाईनरी में परिवर्तित करता है फिर अपने मेमोरी में स्टोर कर उस पर प्रोसेसिंग करता है। मुख्यतः नम्बर सिस्टम निम्नलिखित प्रकार के होते है—

Computer Coding System क्या होता है जानने के लिए देखें यह पोस्ट—Computer Coding Systems

  1. Decimal Number System 
  2. Binary Number System 
  3. Octal Number System
  4. Hexadecimal Number System

Decimal Number System

डेसिमल नम्बर सिस्टम हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाला नम्बर सिस्टम है। इस नम्बर सिस्टम का उपयोग गणित, व्यापार आदि सभी जगह किया जाता है। इस नम्बर सिस्टम में 0 से 9 तक के कुल दस अंको का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इस नम्बर सिस्टम का आधार 10 होता है। डेसिमल नम्बर सिस्टम में संख्या का मूल्य अंको के स्थानीय मान पर निर्भर करता है तथा अंको का स्थानीय मान ईकाई, दहाई, सैकड़ा, हजार आदि के क्रम में निकाला जाता है। उदाहरण के लिए डेसिमल नम्बर (4975)10 का मूल्य निम्नलिखित प्रकार से निकालते है—

अंक                          स्थानीय मान           
 5              -            5*1=5
 7              -            7*10=70
 9              -            9*100=900
 4              -            4*1000=4000
  
 अतः संख्या = 5+70+900+4000 = (4975)10 

Binary Number System

बाईनरी नम्बर सिस्टम कम्प्यूटर में उपयोग होने वाला नम्बर सिस्टम है। इस नम्बर सिस्टम का उपयोग कम्प्यूटर अपने सभी प्रकार के प्रोसेसिंग कार्यो के लिए करता है। इस नम्बर सिस्टम में 0 व 1 केवल दो अंको का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इस नम्बर सिस्टम का आधार 2 होता है। यहाँ वास्तव में 0 व 1 कम्प्यूटर के डिजिटल सर्किट में दो वोल्टेज लेवल को दर्शाते है। 0 low voltage (0 volt) तथा 1 high voltage (5 volt) को दर्शाता है। 0 को false तथा 1 को true भी कहते है। उदाहरण के लिए बाईनरी नम्बर (10011)2 का मान दशमलव संख्या पद्धति में (19)10 होगा।

आधुनिक युग में कम्प्यूटर के विभिन्न उपयोग क्या-क्या है जानने के लिए पढ़े यह पोस्ट—Applications and Uses of Computer

Introduction to Decimal Binary Octal and Hexadecimal Number Systems in Hindi

Octal Number System

Octal Number System में 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 इन आठ अंको का प्रयोग संख्याओं को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। इसीलिए इस संख्या पद्धति का आधार 8 होता है। इस नम्बर सिस्टम का विकास प्रोग्रामरो के कार्य को आसान बनाने के लिए किया गया है क्योकि इसे बाईनरी के मुकाबले सरलता से समझा जा सकता है। इसका प्रयोग कई कम्प्यूटर निर्माताओं के द्वारा हार्डवेयर और साफ्टवेयर में किया जाता है। उदाहरण के लिए संख्या (3426)8 एक Octal संख्या को निरूपित करता है जिसका दशमलव पद्धति में मान (1814)10 है।

Hexadecimal Number System

किसी नम्बर सिस्टम में संख्याओं को व्यक्त करने के लिए कितने अंको की जरूरत होती है यह उस नम्बर सिस्टम में अंको की कुल संख्या पर निर्भर करता है। अर्थात् जिस नम्बर सिस्टम में जितने कम अंक होगें संख्याओं को लिखने के लिए उतने ही अधिक अंको की जरूरत पड़ेगी। उदाहरण के लिए बाईनरी नम्बर सिस्टम में संख्याओं को व्यक्त करने के लिए डेसिमल नम्बर सिस्टम के मुकाबले अधिक अंको की जरूरत पड़ती है। इसके साथ ही बाईनरी सिस्टम को समझना थोड़ा कठीन भी होता है। अतः संख्याओं को लिखने के लिए एक और सिस्टम Hexadecimal का प्रयोग किया जाता है। Hexadecimal में संख्याओं को प्रदर्शित करने के लिए 0 से 9 तक के अंको तथा A से F तक के अक्षरों का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार इसमें कुल सोलह अंक होते है इसलिए इसका आधार 16 होता है। उदाहरण के लिए संख्या (5C7F)16 एक Hexadecimal संख्या को निरूपित करता है जिसका दशमलव पद्धति में मान (23679)10 है।

I-Facts (Interesting facts about Numbers Systems)

  1. Number systems को बड़े अर्थो में दो प्रकारो में विभाजित किया जाता है—Positional Number System और Non-Positional Number System
  2. Decimal, Binary, Octal और Hexadecimal ये सभी Positional Number System के अंतर्गत आते है जिसमें अंको का मूल्य उनके Position पर निर्भर करता है।
  3. Non-Positional Number System में संख्याओं को दर्शाने के लिए अंको का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसमें एक ही चित्र या आकृति को दोहराकर अंको को निरूपित किया जाता है। इसका प्रयोग बच्चो को गिनती सीखाने के लिए किया जाता है।
  4. ऐसा कहा जाता है कि Binary Number System का विकास जर्मन गणितज्ञ Gottfried Wilhelm Leibniz ने किया था।
  5. कम्प्यूटर में Port क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है जानने के लिए देखें—Computer Ports and Connectors
Share it to:

C C++ program to print complete ASCII table

C C++ program to print complete ASCII table

विभिन्न प्रकार के Computer Coding Systems जैसे—BCD, ASCII, EBCDIC आदि के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Computer Coding Systems

C Language के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Brief Introduction of C

C++ Language के बारे में अधिक जानने के लिए देखें—Brief Introduction of C++

C program to print complete ASCII table

#include<stdio.h>
int main()
{
    int num=0;
    while(num<=255)
    {
        printf("%d = %c\t",num,num);
        num++;
    }
    return 0;
}

C++ program to print complete ASCII table

#include<iostream>
using namespace std;
int main()
{
    int num=0;
    char ch;
    while(num<=255)
    {
        ch=num;
        cout<<num<<" = "<<ch<<"\t";
        num++;
    }
    return 0;
}

Output of C C++ program to print complete ASCII table

C C++ program to print complete ASCII table

ASCII table related other C C++ programs

  1. Find ASCII values of a character
  2. Convert lowercase to uppercase
  3. Convert uppercase to lowercase
Share it to:

C C++ program to convert hours into minutes and seconds

Write a C C++ program to convert hours into minutes and seconds

C Language की विशेषताओं एवं शक्तियों को जानने के लिए देखें—Features and Powers of C

C Language में Character set क्या होता है जानने के लिए देखें—Character set of C

Flowchart to convert hours into minutes and seconds

Flowchart to convert hours into minutes and seconds

C program to convert hours into minutes and seconds

#include<stdio.h>
int main()
{
    float h,m,s;
    printf("Enter time in hours: ");
    scanf("%f",&h);
    m=h*60;
    s=h*3600;
    printf("Minutes = %f Seconds = %f",m,s);
    return 0;
}

C++ program to convert hours into minutes and seconds

#include<iostream>
using namespace std;
int main()
{
    float h,m,s;
    cout<<"Enter time in hours: ";
    cin>>h;
    m=h*60;
    s=h*3600;
    cout<<"Minutes = "<<m<<" Seconds = "<<s;
    return 0;
}

Output of C C++ program to convert hours into minutes and seconds

Enter time in hours: 2
Minutes = 120 Seconds = 7200
Enter time in hours: 5
Minutes = 300 Seconds = 18000

Similar important programs in C C++

  1. Sum of two entered numbers
  2. Average of three entered numbers
  3. Simple interest
  4. Total and Percent
  5. Swapping values of two variables
  6. Swapping without using third variable
  7. Celsius to Fahrenheit conversion
  8. Find area and circumference of circle
Share it to:

Example program break continue goto statement in C C++

Example programs for break, continue and goto statements in C

Unconditional branching statements के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें— Break, Continue and Goto in C

Looping और iterative statements के बारे में और अधिक जानने के लिए देखें— Looping statements in C

break statement example program in C

#include<stdio.h>
int main()
{
    int n=1;
    while (n<=3)
    {
        printf("ABC\n");
        n++;
        break;
        printf("DEF\n");
    }
    return 0;
}

Output:

ABC

continue statement example program in C

#include<stdio.h>
int main()
{
    int n=1;
    while (n<=3)
    {
        printf("ABC\n");
        n++;
        continue;
        printf("DEF\n");
    }
    return 0;
}

Output:

ABC
ABC
ABC

goto statement example program in C

#include<stdio.h>
int main()
{
    int n=1;
    printf("ABC\n");
    goto xyz;
    printf("DEF\n");
    xyz:
    return 0;
}

Output:

ABC

Example programs for break, continue and goto statements in C++

break statement example program in C++

#include<iostream>
using namespace std;
int main()
{
    int n=1;
    while (n<=3)
    {
        cout<<"ABC\n";
        n++;
        break;
        cout<<"DEF\n";
    }
    return 0;
}

Output:

ABC

continue statement example program in C++

#include<iostream>
using namespace std;
int main()
{
    int n=1;
    while (n<=3)
    {
        cout<<"ABC\n";
        n++;
        continue;
        cout<<"DEF\n";
    }
    return 0;
}

Output:

ABC
ABC
ABC

goto statement example program in C++

#include<iostream>
using namespace std;
int main()
{
    int n=1;
    cout<<"ABC\n";
    goto xyz;
    cout<<"DEF\n";
    xyz:
    return 0;
}

Output:

ABC

Similar programs in C and C++

  1. Absolute value of number (simple if)
  2. Checking odd or even number (if else)
  3. Checking leap year (if else)
  4. Greater in two numbers (if else)
  5. Finding grade from percent (else if ladder)
  6. Total percent and division (else if ladder)
  7. Greatest in three numbers (nested if)
  8. Simple calculator program (switch case single case)
  9. Switch between Mon to Sun (switch case single case)
  10. Checking vowel or consonant (switch case multiple case)
  11. Number of days in a month (switch case multiple case)
Share it to:

Computer Coding Systems: BCD ASCII EBCDIC notes in Hindi

Introduction to Various types of Computer Coding Systems: BCD ASCII EBCDIC in Hindi

कम्प्यूटर में एंट्री किए जाने वाले असंख्यात्मक (Non-Numerical) डेटा को दर्शाने व उस पर प्रोसेसिंग करने के लिए कोडिंग सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। यहाँ असंख्यात्मक डेटा का अर्थ ऐसा डेटा से है जिस पर कोई गणितीय कार्य नहीं करना होता है जैसे— अक्षर व अक्षर से बनने वाले शब्द, नाम, मोबाईल नंबर, पता आदि। चूँकि कम्प्यूटर बाईनरी में ही कार्य कर सकता है अतः यह हमारे द्वारा एंट्री किए गए सभी असंख्यात्मक डेटा को भी पहले बाईनरी में परिवर्तित करता है। कम्प्यूटर इसके लिए किसी कोडिंग सिस्टम का प्रयोग करता है जिसमें प्रत्येक अक्षर (A-Z), अंक (0-9), व विशेष चिन्ह (+ – * / @  # & etc.) के लिए एक अद्वितीय बाईनरी कोड होता है। कुछ प्रमुख कोडिंग सिस्टम निम्नलिखित है—

Computer Number System क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है जानने के लिए देखें—Computer Number Systems

  1. Binary Coded Decimal (BCD)
  2. American Standard Code for Information Interchange (ASCII)
  3. Extended Binary Coded Decimal Interchange Code (EBCDIC)

Binary Coded Decimal (BCD)

बाइनरी कोडेड डेसिमल कोडिंग सिस्टम में प्रत्येक दशमलव अंक को 4 binary अंको से व्यक्त किया जाता है। इसमें प्रत्येक दशमलव अंक के लिए एक अद्वितीय 4 अंकीय बाईनरी कोड होता है। इसमें संपूर्ण Decimal Number को Binary  में बदलने की बजाय Decimal Number के प्रत्‍येक अंक को उसके चार अंकीय बाइनरी तुल्‍यांक से प्रतिस्‍थापित कर दिया जाता है। इसे 4  Bit BCD Code कहा जाता हैं। 0 से 9 तक के अंको के लिए BCD कोड निम्नलिखित है—

Coding System Binary Coded Decimal BCD Codes notes in Hindi

American Standard Code for Information Interchange (ASCII)

ASCII सबसे लोकप्रिय कोडिंग सिस्‍टम है जिसका प्रारंभ ANSI – American National Standards Institute ने 1963 में किया था। इसमें की–बोर्ड में प्रयुक्‍त प्रत्‍येक अक्षर को 7 बिट के अद्वितीय कोड से निरूपित किया जाता है। आज लगभग सभी कम्पनी के कम्प्यूटर में अक्षरों को दर्शाने के लिए ASCII कोड का ही प्रयोग किया जाता है। ASCII कोड में दो भाग होते है। इसमें left side के भाग को zone कहते है जो 3 bit का होता है तथा right side के भाग को digit कहते है जो 4 bit का होता है। वर्णमाला के अक्षरों व अंको के लिए ASCII Code निम्नलिखित है—

कम्प्यूटर का इतिहास और इसके विकास क्रम को जानने के लिए देखें—History and Development of Computer

Coding System American Standard Code for Information Interchange ASCII Codes notes in Hindi

Extended Binary Coded Decimal Interchange Code (EBCDIC)

EBCDIC कोडिंग भी ASCII के जैसे ही होता है। किन्तु इसमें अक्षरों को 8 bit के अद्वितीय बाईनरी कोड से निरूपित किया जाता है। EBCDIC कोडिंग में भी दो भाग होते है। इमसें zone और digit दोनो हो 4-4 bit के होते है। EBCDIC कोडिंग का प्रयोग मुख्यतः Mainframe और Super जैसे बड़े कम्प्यूटरों में किया जाता है।

I-Facts (Interesting facts about Coding Systems)

  1. Unicode: Universal Code एक ऐसा Coding System है जिसमें दुनिया की प्रत्येक भाषा में प्रयुक्त अक्षर के लिए एक Unique Code होता है। इसमें पहले 256 Character का कोड ASCII Code ही होता है किन्तु प्रत्येक Character को 32 Bit से निरूपित किया जाता है। यह तीन प्रकार का होता है—UTF-8, UTF-16 व UTF-32
  2. UTF-8: यह 8 Bit या 1 Byte पर आधारित Format है अर्थात् इसमें अक्षरों के लिए 8 Bit का कोड होता है।
  3. UTF-16: यह 16 Bit पर आधारित Format है। 16 Bit को 1 Word कहा जाता है।
  4. UTF-32: यह 32 Bit पर आधारित Format है। 32 Bit 2 Word के बराबर होता है।
  5. UTF – Unicode Transformation Format का संक्षिप्त रूप है।
  6. Analog, Digital और Hybrid Computer क्या होता है जानने के लिए देखें—Analog Digital and Hybrid Computer
Share it to:

Computer Ports in Hindi

Physical and Virtual Ports of Computer in Hindi

कम्प्यूटर Port एक Physical Docking Point होता है जिसका प्रयोग Internal व External Devices को कम्प्यूटर से जोड़ने के लिए किया जाता है। कोई भी Device कम्प्यूटर से Cables और Ports की सहायता से ही कनेक्ट होता है। कम्प्यूटर के सारे Ports इसके Motherboard में निर्मित होते है। ये पोर्ट विभिन्न प्रकार के Internal Devices जैसे—Hard Disk Drive (HDD), Optical Disk Drive (ODD), Switch Mode Power Supply (SMPS) तथा External Devices जैसे—Mouse Keyboard, Monitor, Printer, Speaker आदि को Motherboard से कनेक्ट करते है। कम्प्यूटर के विभिन्न भागों के बारे में जानने के लिए देखें—Parts of Personal Computer (PC). कम्प्यूटर पोर्ट निम्नलिखित दो प्रकार होते है—

Physical and Virtual Ports of Computer in Hindi

Physical Ports of Computer

Physical Ports का प्रयोग किसी Device को केबल या तार के द्वारा कम्प्यूटर से जोड़ने के लिए किया जाता है। ये मुख्यतः हार्डवेयर को जोड़ने का कार्य करते है। कुछ प्रमुख Physical Ports निम्नलिखित है—

  1. USB Port:  USB पोर्ट का प्रयोग महत्वपूर्ण Devices जैसे—की-बोर्ड, माऊस, प्रिंटर, स्केनर आदि को कम्प्यूटर से कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। USB पोर्ट की गति बहुत तीव्र होती है। इनकी गति 12 Mbps प्रति सेकण्ड की होती है।
  2. PS/2 Port: इस पोर्ट का प्रयोग पुराने की-बोर्ड और माउस को कम्प्यूटर से कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। वर्तमान में इसके स्थान पर USB का प्रयोग किया जाता है। PS/2 Port में 6 Holes होते है। इसकी गति बहुत कम होती है।
  3. VGA Port:  इसका प्रयोग कम्प्यूटर में मदरबोर्ड और मानीटर को आपस में कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से ही हम कम्प्यूटर द्वारा किए जा रहे प्रोसेसिंग को मानीटर में देख पाते है। इसमें 15 Holes होते है।
  4. Serial Port: इसका प्रयोग पुराने Modem और कम्प्यूटर माउस को मदरबोर्ड से कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। या 9 Pin व 25 Pin के दो माडल में उपलब्ध होता है। इसकी गति 115 Kilobits प्रति सेकण्ड होती है।
  5. Parallel Port: इसका प्रयोग स्केनर व प्रिंटर को कम्प्यूटर से कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। इसमें 25 Pins का प्रयोग किया जाता है।
  6. Modem Port: इस पोर्ट का प्रयोग माडेम को कम्प्यूटर से कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। इसे RJ11 Port भी कहा जाता है।
  7. Ethernet Port: इसका प्रयोग कम्प्यूटर को High Speed इंटरनेट नेटवर्क से कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। इसे RJ45 Port भी कहा जाता है। यह पोर्ट ईथरनेट कार्ड पर बना होता है। इसकी गति 10-1000 Mbps तक की होती है।
  8. Power Connector: यह कम्प्यूटर के पावर केबल को SMPS से कनेक्ट करने का कार्य करता है। पावर केबल एक ओर Wall Socket व दूसरी ओर SMPS से कनेक्ट होता है। इसमें 3 Pin होते है।
  9. Sockets: इनका प्रयोग माइक्रोफोन व स्पीकर को कम्प्यूटर के Sound Card से कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। सामान्यतः ये एक वृत्ताकार Holes होते है।

Virtual Ports of Computer

Virtual Ports का प्रयोग विभिन्न Applications के मध्य संचार स्थापित करने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है। ये TCP/IP Networking Protocol के भाग होते है। कुछ प्रमुख Virtual Ports निम्नलिखित है—

  1. HTTP Port: HTTP Port का प्रयोग World Wide Web पर इन्टरनेट के द्वारा संचार संचार स्थापित करने के लिए किया जाता है। इसका Port Number 80 होता है।
  2. SMTP Port: SMTP Port का प्रयोग ईमेल के रुट का संचालन करने के लिए किया जाता है। इसका Port Number 25 होता है।
  3. Telnet Port: इसका प्रयोग किसी दूरस्थ कम्प्यूटर से जुड़कर उस पर कार्य करने के लिए किया जाता है। इसे Remote Login भी कहा जाता है। इसका Port Number 23 होता है।
  4. SQL Port: SQL Port का प्रयोग SQL Server से जुड़ने के लिए किया जाता है। इसका Port Number 1433 होता है।

I-Facts (Interesting facts about Physical and Virtual Ports of Computer)

  1. USB – Universal Serial Bus – वर्तमान में विभिन्न Devices जैसे—Keyboard, Mouse, Printer, Scanner आदि को कनेक्ट करने के लिए सबसे प्रचलित केबल।
  2. PS / 2 – Personal System 2 – पुराने समय में Keyboard, Mouse को कनेक्ट करने के लिए प्रचलित केबल।
  3. VGA – Video Graphics Array – मानीटर का एक Display Standard जिसका Resolution 640*480 होता है।
  4. HTTP – Hyper Text Transfer Protocol – वेबपेजों के स्थानांतरण के लिए प्रयुक्त प्रोटोकाल।
  5. SMTP – Simple Mail Transfer Protocol – ई-मेल भेजने व प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त प्रोटोकाल।
  6. Telnet – Telecommunication Network – Remote Login के लिए प्रयुक्त प्रोटोकाल।
  7. SQL – Structured Query Language – Database Management में प्रयुक्त Query Language.
  8. कम्प्यूटर के इनपुट डिवाईसों के बारे में जानने के लिए देखें—Input Devices and its Types
  9. कम्प्यूटर के आउटपुट डिवाईसों के बारे में जानने के लिए देखें—Output Devices and its Types
Share it to:

Parts and Components of Personal Computer PC in Hindi

Important Parts and Components of Personal Computer PC in Hindi

Personal Computer उन कम्प्यूटरों को कहा जाता है जिसमें एक समय में सामान्यतः एक ही व्यक्ति कार्य कर सकता हैं। इनके अंतर्गत डेस्कटाप, लैपटाप, टेबलेट, स्मार्टफोन आदि आते है। Personal Computer में एक Microprocessor लगा होता है इसलिए इन्हें Micro Computer भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इसके विभिन्न भाग निम्नलिखित होते है—

Parts and Components of Personal Computer PC in Hindi

Internal Parts and Components of PC

Computer के वे सभी Parts जो CPU Cabinet के अंदर लगे होते है Internal Parts या Internal Components कहलाते है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित Parts आते है—

Central Processing Unit (CPU)

CPU अर्थात् Central Processing Unit को System Unit भी कहते है| यह Computer का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता हैं| इससे कम्प्यूटर के सभी Devices जुड़े हुए रहते है जैसे- Keyboard, Mouse, Monitor, Printer आदि| इसे Computer का मस्तिष्क (Brain) भी कहते है| इसका मुख्य कार्य प्रोग्राम (Programs) को क्रियान्वित (Execute) करना तथा डेटा (Data) को Process करना होता है। CPU के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट देखे—Organization of Computer. CPU के निम्नलिखित तीन भाग होते है–

  1. Arithmetic and Logic Unit (ALU)
  2. Main Memory (RAM)
  3. Control Unit (CU)

Random Access Memory (RAM)

RAM कम्प्यूटर का अस्थायी व प्राथमिक मेमोरी होता हैं। हम की-बोर्ड या अन्य किसी इनपुट डिवाइस से जो कुछ भी डेटा इनुपट करते है वह सबसे पहले RAM में स्टोर होता है फिर मानीटर पर दिखाई देता है। चूँकि RAM में डेटा व प्रोग्राम अस्थायी रूप से संगृहीत होते है और कम्प्यूटर के बंद हो जाने या बिजली चले जाने डिलिट हो जाते है। इसलिए RAM को Volatile मेमोरी भी कहा जाता है। RAM के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट देखे—RAM: Random Access Memory

Hard Disk Drive (HDD)

Hard Disk कम्प्यूटर में डेटा स्टोर करने के लिए सबसे प्रचलित Secondary Storage Device है। किसी भी कम्प्यूटर में कोई और सेकेण्डरी स्टोरेज हो या न हो एक हार्ड डिस्क जरूर लगा होता है। हार्ड डिस्क में Aluminium के बने एक या एक से अधिक पतले Disk (Plate) होते है जिसमें चुंबकीय पदार्थ Iron Oxide की परत चढ़ी होती है। हार्ड डिस्क में डिस्क Track में बँटे होते है और प्रत्येक Track में भी छोटे-छोटे Sector होते है। एक Sector में 512 Byte डेटा स्टोर होता है। Disk के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट देखे—Hard Disk: Essential Secondary Storage Device

Optical Disk Drive (ODD)

Optical Disk एक चपटा, वृत्ताकार Polycorbonate डिस्क होता है। इस पर डाटा एक समतल सतह के अन्दर Pits के रूप में Store किया जाता हैं। Pits को Bumps भी कहा जाता है जो वास्तव में Optical Disk की सतह पर बने छोटे-छोटे गढ्ढ़े होते है। ये इतने छोटे होते है कि इन्हें हम अपनी आँखों से नहीं देख सकते है। Optical Disk में डेटा को प्रकाश किरण की सहायता से स्टोर किया जाता है इसीलिए इसे Optical Disk कहा जाता है। ये दो प्रकार के होते है—CD व DVD. इनके बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट देखे—Optical Disk: CD/DVD Notes in Hindi

Switch Mode Power Supply (SMPS)

SMPS एक Power Conversion यूनिट होता है जो 220V के AC को विभिन्न डिवाईसों की आवश्यकता के अनुसार DC में परिवर्तित करके उन्हें देता है। कम्प्यूटर के इलेक्ट्रानिक डिवाईसों को 5V तथा मोटर, पंखे आदि को 12V के पावर की आवश्यकता होती है।

Video Card

विडियो कार्ड को Graphics Card या Display Card के नाम से भी जाना जाता है। इसका कार्य मानीटर स्क्रीन पर आकृतियों व आउटपुट का निर्माण करना होता है। आजकल के कम्प्यूटरों में विडियो कार्ड मदरबोर्ड पर पहले से ही Inbuilt होता है।

Sound Card

साउंड कार्ड भी विडियो कार्ड की तरह ही मदरबोर्ड पर पहले से ही Inbuilt होता है। इसका कार्य माईक्रोफोन से प्राप्त Analog Signals को Digital Data में परिवर्तित करके मेमोरी में स्टोर करना होता है। साथ ही यह मेमोरी में स्टोर Digital संगीत को Analog रूप में परिवर्तित करके स्पीकर को भेजता है।

Network Interface Card (NIC)

NIC एक ऐसा Device होता है जो हमारे कम्प्यूटर को नेटवर्क से जोड़ने का कार्य करता है। यह हमारे कम्प्यूटर के मदरबोर्ड में पूर्व निर्मित होता है। कम्प्यूटर व नेटवर्क के मध्य डेटा भेजने या प्राप्त करने का कार्य NIC की सहायता से ही होता है। प्रत्येक NIC Card का एक Unique Address होता है जिसे MAC Address कहते है। NIC को Network Adapter, LAN Adapter या Physical Network Interface भी कहा जाता है।

Motherboard

मदरबोर्ड को कम्प्यूूटर को Main Board या Backbone भी कहा जाता है। यह एक तरह का Printed Circuit Board (PCB) होता है जिससे कम्प्यूटर के बाकी सभी डिवाईस प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते है। इसीलिए इसे कम्प्यूटर का ह्रदय भी कहा जाता है।

External Parts and Components of PC

Computer के वे सभी Parts जो CPU Cabinet के बाहर लगे होते है External Parts या External Components कहलाते है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित Parts आते है—

Monitor

Monitor एक Softcopy आउटपुट डिवाईस है जो स्क्रीन पर आउटपुट को प्रदर्शित करता है। इसका स्क्रीन सामान्यतः एक टी.वी. की तरह होता है जिसे Visual Display Unit (VDU) या Visual Display Terminal (VDT) भी कहा जाता है। यह हमें की-बोर्ड के द्वारा इनपुट किए जा रहे डेटा एवं प्रोसेसिंग के परिणामों को लगातार दिखाते रहता है। वर्तमान में मानीटर सर्वाधिक प्रचलित Softcopy आउटपुट डिवाइस है जिसका प्रयोग सभी कम्प्यूटर में किया जाता है। मनीटर के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट देखे—Monitor: An Essential Softcopy Output Device

Printer

Printer एक Hardcopy आउटपुट डिवाइस है जो कागज पर छापकर आउटपुट को प्रदर्शित करता है। कागज पर आउटपुट की यह प्रतिलिपि हार्डकापी कहलाता है। इस प्रकार प्रिंटर एक ऐसा आउटपुट डिवाइस है जो साफ्टकापी को हार्डकापी में परिवर्तित करता हैं।
मनीटर के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट देखे—Printer: Hardcopy Output Device

Speaker

Speaker एक Audio आउटपुट डिवाइस है। यह कम्प्यूटर के Hard Disk,  CD, DVD, Pen Drive आदि में स्टोर Audio Files जैसे—गाने या रिकार्ड की गयी आवाज आदि को हमें सुनाने का कार्य करता है। यह साउंड कार्ड से उत्पन्न विद्युत सिग्नलों को प्राप्त कर इसे ध्वनि तरंगो में बदलता है।

Mouse

माउस एक Pointing इनपुट डिवाइस है। इसका प्रयोग स्क्रीन पर प्रदर्शित Options/Tools को Select करके कम्प्यूटर को निर्देश देने के लिए किया जाता है। साथ ही इसकी सहायता से Graphics/Drawing बनाए जाते है। वर्तमान समय में माउस सबसे प्रचलित Pointing Device है। इसमें सामान्यतः तीन बटन होते है जिनकी सहायता से कम्प्यूटर को निर्देश दिये जाते है। ये तीन बटन left click, right click व scroll होते है।

Keyboard

की-बोर्ड एक टाईपिंग इनपुट डिवाईस है। इसको मुख्यतः Text, Characters व Numbers इनपुट करने के लिये डिजाइन किया गया हैं। साथ ही इसकी सहायता से Keyboard Shortcuts का प्रयोग करते हुए कम्प्यूटर को निर्देश भी दिए जा सकते है। की-बोर्ड भौतिक रूप से प्लास्टिक का आयताकार बाक्स होता है जिसमें टाइपराइटर के समान Keys बने होते है।

Scanner

Scanner एक ऐसा Input Device है जो किसी Page पर बनी आकृति या लिखित सूचना को सीधे Computer में Input करता है। इसका मुख्य लाभ यह है कि User को सूचना टाइप नहीं करनी पड़ती हैं जिससे समय की बचत होती है| इस प्रकार हम कह सकते है कि Scanning एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें Document का सीधे ही Hardcopy-to-Softcopy Conversion होता है।

Modem

Modem शब्द दो शब्दों Modulator और Demodulator से मिलकर बना है। यह एक ऐसा Device है जो Analog Signal को Digital Signal में तथा Digital Signal को Analog Signal में परिवर्तित करने का कार्य करता है।

Uninterruptible Power Supply (UPS)

UPS एक प्रकार का बैटरी होता है जो बिजली के चले जाने पर भी कम्प्यूटर को लगातार इसकी पूर्ति करते रहता है। इसका प्रयोग कम्प्यूटर को अचानक से बंद होने से बचाने व वर्तमान में किए जा रहे कार्य को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।

Cables

Cables कम्प्यूटर सिस्टम के महत्वपूर्ण भाग होते है। इनका कार्य कम्प्यूर सिस्टम के सभी डिवाईसों को आपस में कनेक्ट करना होता है ताकि सिस्टम कार्य कर सके। इसके लिए कम्प्यूटर में विभिन्न प्रकार के केबल का प्रयोग किया जाता है जैसे—Power Cable, Display Cable, USB Cable आदि।

I-Facts (Interesting facts about Personal Computers PCs)

  1. प्रथम IBM-PC में Intel 8086 प्रोसेसर का प्रयोग किया गया था जो 8 bit का होता था। इस प्रकार के PC में स्टोरेज के लिए Floppy Disk होता था।
  2. PCXT – Personal Computer Extended Technology PC का विकसित रूप था जिसमें Intel 8088 प्रोसेसर का प्रयोग किया गया था। यह भी 8 bit का प्रोसेसर था किन्तु इस प्रकार के PC में Floppy Disk और Hard Disk दोनो लगा होता था।
  3. PCAT – Personal Computer Advanced Technology PC का और विकसित रूप था जिसमें Intel 80286 प्रोसेसर का प्रयोग किया गया था जो 16 bit का होता था। वर्तमान पीढ़ी के सभी PC को PCAT ही कहा जाता है।
  4. सभी प्रकार की नियंत्रण एवं गणनाएँ करने का कारण CPU को PC का दिमाग तथा सभी डिवाईसों को जोड़ने के कारण Motherbaord को इसका ह्रदय कहा जाता है।
Share it to: