फ़्लैश ड्राइव क्या हैं? (What is Flash Drive in Hindi)

flash drive in Hindi: flash drive जिसे USB Stick या USB Pen drive के नाम से भी जाना जाता है। आपको बता दें कि USB flash drive एक portable storage device होती है जो plug-and-play होती है। इसका मतलब यह है कि आप इस device को अपने USB port में कनेक्ट करके सीधे उपयोग कर सकते हैं। कंप्यूटर में USB flash drive को CD के स्थान पर भी इस्तेमाल किया जाता है। यह एक बहुत ही छोटी और हल्की डिवाइस होती है जिसे आप अपने साथ कहीं भी लेकर जा सकते हैं। जब भी हम अपने कंप्यूटर के USB पोर्ट में flash drive को कनेक्ट करते हैं तो operating system पहले इसे एक removable drive के रूप में recognizes करता है और बाद इसे drive D, E या F के रूप में assigns करता है।

What is Flash Drive in Hindi

USB flash drive में आप अपनी आवश्यक फाइल, डाटा बैकअप या फिर अपनी आवश्यक फाइल को स्टोर कर सकते हैं। इसके अलावा आप इस ड्राइव में operating system का setup डालकर इसे bootable drive बना सकते हैं। जब कंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम currupt हो जाता है या आपको जब इसे इनस्टॉल करने की जरूरत पड़ती है तो ऐसे में bootable USB drive बहुत काम आती है। USB drive से आप windows, linux और MacOS जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम को इनस्टॉल कर सकते हैं।

जो भी USB flash Drives वर्तमान में उपलब्ध है उनमे मल्टी-लेवल सेल (MLC) होती है, जिनकी प्रोग्राम इरेज़ साइकल 3,000 से 5,000 हॉट है. लेकिन कुछ drive सिंगल-लेवल सेल (SLC) मेमोरी के साथ भी आती है जो लगभग 1 लाख writes को सपोर्ट करती है।

USB कितने प्रकार की आती है (Versions of USB Flash Drive in Hindi)

USB फ्लैश ड्राइव मुख्य रूप से 3 तरह की होती है USB 1,0, 2,0 और 3,0। इसमें से हर फ्लैश ड्राइव अपने पिछले version से ज्यादा तेज स्पीड प्रदान करती है.

USB 1.0 जनवरी 1996 में लांच किया गया था जो दो version में उपलब्ध थी जिसमे से एक कम स्पीड वाली थी इसमें डाटा ट्रान्सफर करने की स्पीड 1.5 GB प्रति सेकंड थी और दूसरी जो हाई स्पीड drive थी इसमें डाटा ट्रान्सफर की स्पीड 12 MBPS है। इसके बाद सितंबर 1998 में इसका 1.1 version जारी किया जिसमे कई कमियों को ठीक किया गया था.

USB 2.0, जिसे हाई-स्पीड USB drive भी कहा जाता है. आपको बता दें कि USB 2.0 को साल 2000 अप्रैल में लूंच किया गया था. जारी किया गया था। USB 2.0 में डाटा ट्रान्सफर की स्पीड 480 MBPS तक होती है. इसने USB drive की परफॉरमेंस को 40 गुना तक बढ़ाया।

USB 3.0, जिसे super speed USB के रूप में भी जाना जाता है. इसे नवंबर 2008 में लांच किया गया था। पहले 3.0-compatible USB स्टोरेज की शिपिंग जनवरी 2010 में शुरू की गई थी. इस USB को डाटा ट्रान्सफर की स्पीड और बिजली की खपत को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था. super speed USB के साथ डाटा transfer की speed हाई-स्पीड USB से 10 गुना बढ़कर 5 GBPS हो गई। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इसे activate और deactivate होने के लिए कम बिजली की आवश्यकता होती है.

इसे बाद जुलाई 2013 में USB 3.1 को लांच किया गया जिसे SuperSpeed+ या SuperSpeed ​​USB 10 Gbps के नाम से जाना जाता है. इसकी डाटा ट्रांसफर की स्पीड USB 3.0 से भी ज्यादा तेज है.

USB फ्लैश ड्राइव के Pros और cons (Pros and Cons of USB Flash Drive in Hindi)

USB फ्लैश ड्राइव बहुत ही छोटी और हल्की होती है जिसकी वजह से इसे हम अपने साथ कहीं भी ले जा सकते हैं। यह बहुत ही कम पॉवर का उपयोग करती है। इसमें हार्डडिस्क के सामान कोई भी मूव करने वाला पार्ट नहीं होता। USB flash drive प्लास्टिक या रबर के कवर से ढकी होती है जो इसे खराब होने से बचाता है।

USB फ्लैश ड्राइव पर डाटा को लंबे समय के लिए स्टोर किया जा सकता है। इसे कंप्यूटर से आसानी से plug और unplug किया जा सकता है। यह एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डाटा transfer करने को सुविधाजनक बनती है। इसे आप कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

दूसरी removable drives की तरह USB flash drives को कंप्यूटर में कनेक्ट करने के बाद उसे रीबूट करने की जरूरत नहीं पड़ती और ना ही इसे किसी एक्सटर्नल पॉवर की जरूरत होती है. बहुत ही कंपनी ऐसी भी है जो अपनी USB flash drive के साथ कुछ एक्स्ट्रा feature देती है जैसे पासवर्ड प्रोटेक्शन और Drivers जो कि पुराने कंप्यूटर सिस्टम के साथ भी आसानी से compatible हो सकती है.

Also Read: Computer ke Parts in Hindi

जिस तरह USB फ्लैश ड्राइव के कुछ फायदे हैं तो इसमें कुछ कमियाँ भी है. जैसे drive के ख़राब होने पर डाटा को रिकवर करना मुश्किल होता है. इसके साथ ही इसमें मैलवेयर आसानी से अटैक कर सकते हैं. इसमें डेटा लीकेज एक समस्या है क्योंकि डिवाइस पोर्टेबल हैं और इसे ट्रैक करना मुश्किल है। जब इस drive को किसी infected system में plug किया जाता है तो इसमें भी वायरस बड़ी आसानी से लग जाते हैं. हालाँकि अगर आप नियमित रूप से इसे स्कैन करके सुरक्षित रख सकते हैं.

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *